UFO, एलियन, एरिया 51, सीक्रेट फाइलें और वॉइट हाउस की बयानबाज़ी. हॉलीवुड की साइंस फिक्शन फिल्मों में ये शब्द अक्सर देखने और सुनने को मिलते हैं. मगर अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) इन्हें फिल्म की स्क्रिप्ट से निकालकर रीयल लाइफ में लाने वाले हैं.
Epstein Files के बाद Alien Files? ओबामा के बहाने ट्रंप खोलेंगे इतिहास का सबसे बड़ा सच?
19 फ़रवरी 2026 को Donald Trump ने Pentagon और अन्य एजेंसियों को UFO, UAP और Alien Life से जुड़ी सरकारी फाइलें जारी करने का निर्देश देने की बात कही. यह बयान Barack Obama के पॉडकास्ट में एलियन जीवन पर की गई टिप्पणी के बाद आया. जिससे अमेरिकी मीडिया में UFO Files, Area 51 और Declassified Documents को लेकर चर्चा तेज हो गई.


19 फ़रवरी 2026 को ट्रंप का एक बयान आया और पुरानी बहस फिर से गर्म हो गई. क्या सरकार कुछ छिपा रही है? क्या वाकई कोई रहस्य है? या फिर यह सिर्फ अज्ञात को लेकर इंसानी जिज्ञासा है. आइए पूरी कहानी को जोड़कर समझते हैं.
19 फ़रवरी 2026, ट्रंप का बयान और फाइलें खोलने का ऐलानसमाचार एजेंसी रॉयटर्स की ख़बर के मुताबिक 19 फ़रवरी 2026 को Donald Trump ने कहा कि वह पेंटागन और दूसरी एजेंसियों को निर्देश दे रहे हैं कि यूएफओ, यूएपी और कथित एलियन जीवन से जुड़ी फाइलों की पहचान कर उन्हें सार्वजनिक किया जाए. उन्होंने कहा कि लोगों में “जबरदस्त दिलचस्पी” है, इसलिए पारदर्शिता ज़रूरी है.
इस ऐलान के दौरान ट्रंप ये कहना नहीं भूले कि उन्हें खुद नहीं पता कि एलियन असली हैं या नहीं.
लेकिन आगे बढ़ने से पहले समझ लेते हैं कि आखिर ऐसा क्या कहा गया था, जिसका जिक्र करते हुए ट्रंप ने यह कदम उठाया.
ओबामा ने पॉडकास्ट में क्या कहा था?अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama का एक पॉडकास्ट पिछले दिनों खूब चर्चा में रहा. इस पॉडकास्ट में ओबामा ने ब्रह्मांड और जीवन की संभावना पर बात की. ओबामा ने कहा,
मैंने ऐसा कोई सबूत नहीं देखा जिससे साबित हो कि एलियन, हमसे संपर्क कर चुके हैं. लेकिन ब्रह्मांड इतना विशाल है कि कहीं न कहीं जीवन होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता.
रॉयटर्स (Reuters) की ख़बर के मुताबिक ट्रंप ने आरोप लगाया कि ओबामा ने “क्लासिफाइड जानकारी” का जिक्र कर दिया. हालांकि ओबामा ने बाद में साफ किया कि उनके पास पृथ्वी पर एलियन आने का कोई प्रमाण नहीं है.
अब सवाल उठता है कि ट्रंप जिन फाइलों को खोलने की बात कर रहे हैं, वे आखिर हैं क्या?
UFO या UAP फाइलें क्या होती हैं?नासा (NASA) की यूएपी इंडिपेंडेंट स्टडी रिपोर्ट 2023 (UAP Independent Study Report 2023) के मुताबिक अमेरिका में “यूएफओ” शब्द की जगह अब अक्सर “यूएपी” यानी “अनआइडेंटिफाइड एरियल फेनोमेना” इस्तेमाल होता है. मतलब ऐसी घटनाएं, जिनमें पायलट, रडार या सैन्य सिस्टम आसमान में ऐसी वस्तु दर्ज करते हैं, जिसकी तुरंत पहचान नहीं हो पाती.
पेंटागन (United States Department of Defense) की एएआरओ रिपोर्ट 2024 (Pentagon AARO Report 2024) और NASA ने हाल के वर्षों में रिपोर्ट जारी कर कहा है कि
सैकड़ों घटनाओं की जांच हुई. लेकिन अब तक एलियन जीवन या तकनीक का कोई प्रमाण नहीं मिला.
यहीं से समझ आता है कि “अज्ञात” का मतलब “एलियन” नहीं होता. लेकिन अमेरिका में यह मुद्दा बार-बार क्यों उठता है? इसे समझने के लिए थोड़ा पीछे चलते हैं.
अमेरिका में UFO की चर्चा कब से1947 से ही अमेरिका में “फ्लाइंग सॉसर” शब्द चल पड़ा था. हिस्ट्री चैनल के शो ‘यूएफओ टाइमलाइन’ (UFO Timeline) के मुताबिक 1947 के बाद से ही अमेरिकी वायुसेना ने इन कथित UFO की जांच के लिए कई प्रोग्राम शुरू किए.
इनमें से सबसे बड़ा था United States Air Force का “प्रोजेक्ट ब्लू बुक”. अमेरिका के राष्ट्रीय आरकाइव (U.S. National Archives) के मुताबिक इस इनवेस्टिगेशन के तहत 1952 से 1969 तक 12,618 रिपोर्ट्स की जांच हुई. 701 मामले “अनआइडेंटिफाइड” रहे, लेकिन एलियन गतिविधि का प्रमाण नहीं मिला.
अब यहां एक और नाम सामने आता है, जो अमेरिकी पॉप कल्चर में सबसे ज्यादा गूंजता है. वो शब्द है- एरिया-51
एरिया 51 क्या है?Area 51 नेवादा में स्थित एक गुप्त सैन्य परीक्षण स्थल है. अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के दस्तावेजों (CIA Declassified Area 51 Documents) के मुताबिक यहां 1950 और 60 के दशक में U-2 जासूसी विमान का परीक्षण हुआ. इसकी गोपनीयता ने इसे साजिश सिद्धांतों का केंद्र बना दिया.

लंबे समय तक अमेरिकी सरकार ने इसका नाम तक स्वीकार नहीं किया था. इसलिए लोगों ने मान लिया कि यहां एलियन या उनका यान छिपाकर रखा गया है. सीआईए आरकाइव के मुताबिक सरकार ने कई बार कहा कि यह केवल सैन्य तकनीक परीक्षण का बेस है, न कि एलियन रिसर्च सेंटर.
एरिया-51 के बारे में ज्यादा जानना चाहते हैं तो लल्लनटॉप की रिपोर्ट “दुनिया के सबसे टॉप सीक्रेट मिलिट्री ठिकाने 'एरिया 51' के अंदर क्या होता है?” पर क्लिक करें और अपनी जानकारी बढ़ाएं.
बहरहाल आगे बढ़ते हैं, सीआईए की रिपोर्ट के बाद भी अमेरिका में UFO को लेकर चर्चा नहीं रुकी. हाल के सालों में फिर हलचल मची.
2017 के बाद फिर क्यों बढ़ी चर्चा?16 दिसंबर 2017 में अमेरिकी नौसेना के कुछ वीडियो समाचार पत्र The New York Times में प्रकाशित हुए. जिनमें पायलटों ने अजीब हरकत करती उड़ती वस्तुएं रिकॉर्ड की थीं.

इसके बाद 17 मई, 2022 को अमेरिकी कांग्रेस में सुनवाई हुई और पेंटागन ने AARO नाम का विशेष दफ्तर बनाया जो ऐसी घटनाओं की जांच करता है.
पेंटागन की 2024 (Pentagon AARO Report 2024) में प्रकाशित हुई रिपोर्ट में सैकड़ों मामलों का जिक्र है, लेकिन अधिकतर मामलों में ऐसे रहस्यमयी ऑब्जेक्ट दिखने के संभावित कारण ड्रोन, गुब्बारे या अन्य सामान्य वस्तुएं बताए गए.
अब सवाल आता है कि क्या सिर्फ अमेरिका में ही ऐसा हुआ है, या दुनिया भर में भी हलचल रही है.
दुनिया भर में क्या हुआ?इन कथित यूएफओ को देखे जाने का दावा सिर्फ अमेरिका में ही किया जाता रहा हो, ऐसा नहीं है. एशिया और यूरोप के कई देशों में ऐसे दावे देखने को मिले हैं.
फ्रांस में CNES के तहत GEIPAN नाम की यूनिट दशकों से यूएफओ रिपोर्ट की जांच करती है और डेटा सार्वजनिक करती है.
ब्रिटेन का रक्षा मंत्रालय भी 2009 तक UFO डेस्क चलाता रहा. यूके की राष्ट्रीय आरकाइव ने बाद में ऐसे हजारों दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए.

इतना ही नहीं संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) में भी 1978 में ग्रेनाडा ने UFO पर अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग रखी थी. संयुक्त राष्ट्र महासभा के रिकॉर्ड्स (UN General Assembly Records) में इस बाबत विस्तार से बताया गया है. मगर उस पर कभी अलग से चर्चा करेंगे.
13 अप्रैल 2025 को अमेरिकी समाचार पत्र न्यूयॉर्क पोस्ट ने सीआईए सूत्रों के हवाले से दावा किया कि
यूक्रेन में ट्रेनिंग के दौरान सोवियत सैनिकों की एलियंस के साथ मुठभेड़ हुई थी, जिसके बाद एलियंस ने 23 सैनिकों को पत्थर में तब्दील कर दिया. इस रिपोर्ट में बाकायदा प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटना के बाद की तस्वीरें भी शामिल हैं.

इस रिपोर्ट को आप विस्तार से लल्लनटॉप के आर्टिकल "धरती पर आए थे 5 एलियंस, सोवियत सैनिकों को पत्थरों में बदला", CIA की सीक्रेट फाइल से क्या पता चला? में पढ़ सकते हैं.
बहरहाल UFO और एलियन को लेकर दावे दुनियाभर में हुए, लेकिन किसी भी देश ने आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा कि एलियन पृथ्वी पर आए हैं.
ये तो बात हुई अमेरिका और बाकी की दुनिया की, अब जरा नजर भारत पर भी डाल लेते हैं.
भारत में क्या कभी हलचल हुई?द स्टेट्समैन की मार्च 1951 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली फ्लाइंग क्लब के पायलटों ने New Delhi के ऊपर अजीब वस्तु देखने की रिपोर्ट दी थी. हालांकि इस खबर की कभी पुष्टि नहीं की जा सकी.
अगस्त 2013 में द हिंदू में छपी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया कि Ladakh सेक्टर में सेना और ITBP ने रहस्यमयी रोशनियां देखे जाने की रिपोर्ट दी थी. कुछ ऐसा ही दावा 2 नवंबर 2012 की रिपोर्ट में इंडिया टुडे ने भी किया था. मगर सेना या भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने आधिकारिक तौर पर ऐसी किसी खबर की पुष्टि नहीं की.

इन दावों की जांच हुई. रिपोर्ट में खगोलीय पिंड, ड्रोन या अन्य प्राकृतिक कारणों की संभावना जताई गई. मगर इसरो (Indian Space Research Organisation) और भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) ने कभी भी एलियन उपस्थिति की पुष्टि नहीं की.
पूरी कहानी का निचोड़तो ट्रंप का बयान उस लंबे सिलसिले की अगली कड़ी है, जिसमें अमेरिका और दुनिया की सरकारें समय-समय पर “अज्ञात उड़ती वस्तुओं” की फाइलें खोलती रही हैं.
सरकारी रिकॉर्ड यह मानते हैं कि “आसमान में कुछ घटनाएं हुईं जिनकी तुरंत पहचान नहीं हो पाई.” लेकिन आज तक किसी भी देश ने यह आधिकारिक रूप से नहीं कहा कि एलियन पृथ्वी पर आए हैं.
ब्रह्मांड बड़ा है, संभावना खुली है, पर प्रमाण अब भी नहीं.
वीडियो: संसद के अंदर दिखाए गए एलियन के कंकालों का पूरा सच पता चल गया















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