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US टैरिफ रोलबैक से किन-किन सेक्टर को मिलेगा फायदा? एक्सपर्ट्स ने क्या बताया?

अमेरिका के टैरिफ की वजह से कई सेक्टर्स और प्रोडक्ट्स बाजार में इनकॉप्टिटिव हो गए थे. 50 से 18 परसेंट टैरिफ होने से इन सेक्टर्स को सपोर्ट मिलेगा.

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टैरिफ कम होने के बाद भारतीय शेयर बाजार में जोश देखने को मिला. Nifty फ्यूचर्स में तेजी आई, रुपया मजबूत हुआ.

अमेरिका ने भारतीय एक्सपोर्ट पर लगने वाले 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया है. मंगलवार, 3 फरवरी को इस डील का असर शेयर मार्केट पर दिखने लगा. मार्केट में तेजी दिखी. टैरिफ घटने से भारत के एक्सपोर्ट को बड़ा फायदा होगा. दावा किया जा रहा है कि इससे कंपनियों के मार्जिन बेहतर होंगे और अमेरिकी बाजार में कॉम्पिटिशन बढ़ेगा. खासतौर पर टेक्सटाइल, कैमिकल्स, ऑटो पार्ट्स, सीफूड और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे सेक्टर में पॉजिटिव साइन देखने को मिल सकते हैं.

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किन सेक्टर्स को इस डील से फायदा मिलेगा, इस बारे में विस्तार से बात करेंगे. लेकिन पहले जानते हैं कि अभी तक क्या स्थिति थी?

2025 में अमेरिका ने भारत के कई सामानों पर टैरिफ बहुत बढ़ा दिया था. कुछ पर तो 50% तक कर दिया गया था. इसका एक कारण भारत का रूसी तेल खरीदना था, जिस पर अमेरिका नाराज था. इस वजह से भारत के एक्सपोर्टर्स को बहुत नुकसान हुआ. कई सेक्टरों में अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी घटी. ऑर्डर कम हुए और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ा. लेकिन अब यह टैरिफ कम होने से भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

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ट्रंप ने खुद ट्रुथ सोशल पर लिखा कि पीएम मोदी की रिक्वेस्ट पर उन्होंने ये छूट दी है. भारत की तरफ से भी अमेरिकी सामानों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर कम करने और अमेरिका से ज्यादा एनर्जी, टेक्नोलॉजी आदि खरीदने का वादा किया गया है. इससे दोनों देशों के आर्थिक रिश्ते और मजबूत होंगे.

अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल, इससे भारत के कौन-कौन से सेक्टर सबसे ज्यादा फायदा उठाएंगे?

1. टेक्सटाइल और अपैरल (कपड़ा और तैयार कपड़े): ये सेक्टर सबसे ज्यादा फायदा पाने वाला है. भारत अमेरिका को बहुत सारा कपड़ा और गारमेंट्स एक्सपोर्ट करता है. पहले हाई टैरिफ की वजह से कीमतें बढ़ जाती थीं, जिससे अमेरिकी खरीदार दूसरे देशों की तरफ मुड़ जाते थे. अब टैरिफ 18% रहने से भारतीय कपड़े सस्ते हो जाएंगे, ऑर्डर बढ़ेंगे और कंपनियों के मार्जिन (मुनाफा) बेहतर होंगे.

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उदाहरण के लिए, Vardhman Textiles जैसी कंपनी के शेयर में 10% से ज्यादा की तेजी आई.

2. केमिकल्स: केमिकल सेक्टर में भी अच्छा असर देखने को मिल सकता है. भारत से अमेरिका में कई तरह के केमिकल प्रोडक्ट्स जाते हैं. टैरिफ कम होने से ये प्रोडक्ट्स ज्यादा कॉम्पिटिटिव बनेंगे. इससे एक्सपोर्ट बढ़ेगा और कंपनियों को बेहतर ऑर्डर मिलेंगे. इस सेक्टर में UPL, SRF, Jubilant Ingrevia जैसी बड़ी कंपनियों को फायदा मिलेगा. इन कंपनियों के शेयर में मंगलवार, 3 फरवरी को 5-7 परसेंट की बढ़त देखने को मिली.

3. सीफूड (समुद्री भोजन): झींगा, मछली आदि का एक्सपोर्ट भारत-अमेरिका के ट्रेड का बहुत बड़ा हिस्सा है. अमेरिका भारत का बड़ा बाजार है. टैरिफ कम होने से ये प्रोडक्ट्स सस्ते होंगे, जिससे डिमांड बढ़ेगी.

4. ऑटो एंसेलरीज और इंजीनियरिंग गुड्स (ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग सामान): ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां अमेरिका को बहुत सामान एक्सपोर्ट करती हैं. पहले हाई टैरिफ से मार्जिन दब गया था. अब राहत मिलेगी, ऑर्डर विजिबिलिटी बेहतर होगी. Bharat Forge और Ramkrishna Forgings जैसी कंपनियों के शेयर में अच्छी बढ़त देखी गई.

Bharat Forge मंगलवार, 3 फरवरी को 7 परसेंट की बढ़त पर ट्रेड कर रहा है. Ramkrishna Forgings के शेयर 10 फीसदी तक बढ़े.

5. जेम्स एंड ज्वेलरी: डायमंड्स, गोल्ड ज्वेलरी आदि का एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा. भारत दुनिया का बड़ा डायमंड कटर और एक्सपोर्टर है. टैरिफ कम होने से अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी वापस बढ़ेगी.

6. कंज्यूमर एक्सपोर्ट्स: इस सेक्टर की कंपनियां अमेरिका में काफी सामान बेचती हैं. LT Foods अमेरिका से अपनी कुल कमाई (रेवेन्यू) का 39% हिस्सा कमाती है. यानी अमेरिका इसका सबसे बड़ा बाजार है. टैरिफ कम होने से उनके प्रोडक्ट्स (जैसे चावल, बासमती, रेडी-टू-ईट फूड) अमेरिका में सस्ते हो जाएंगे. इससे बिक्री बढ़ेगी, मुनाफा (मार्जिन) बेहतर होगा और नए ऑर्डर आसानी से मिलेंगे.

वहीं, Tata Consumer Products अमेरिका से 12% रेवेन्यू कमाती है. ये कंपनी टी, कॉफी, नमक, मसाले आदि एक्सपोर्ट करती है. टैरिफ घटने से इनके प्रोडक्ट्स की कीमतें अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी (कॉम्पिटिटिव) बनेंगी. डिमांड बढ़ेगी और कंपनी को अच्छा फायदा होगा.

KRBL भी बासमती चावल की बड़ी एक्सपोर्टर है और अमेरिका से इसका 10% रेवेन्यू आता है. पहले हाई टैरिफ की वजह से नुकसान हुआ था, लेकिन अब राहत मिलने की उम्मीद है. इससे एक्सपोर्ट आसान होगा और कंपनी मजबूत पोजीशन में आएगी.

इन सब के अलावा लेबर-इंटेंसिव सेक्टर को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. इन सेक्टर्स में रोजगार की संभावना भी ज्यादा होती है.

एक्सपर्ट्स क्या मानते हैं?

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड (IIFT) के वाइस चांसलर प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने बताया,

“भारत कुछ सेक्टर्स में अमेरिकी पर काफी निर्भर करता था. टेलीकॉम सेक्टर में 42 परसेंट एक्सपोर्ट अमेरिका को जाता है. मरीन सेक्टर में हिस्सा 36 फीसदी है. वहीं टेक्सटाइल और अपैरल में 34 फीसदी एक्सपोर्ट अमेरिका जाता है.”

प्रोफेसर राकेश ने बताया कि अमेरिका के टैरिफ की वजह से कई सेक्टर्स और प्रोडक्ट्स बाजार में इनकॉप्टिटिव हो गए थे. 50 से 18 परसेंट टैरिफ होने से इन सेक्टर्स को सपोर्ट मिलेगा. उन्होंने कहा,

“देखिए, हमारे टॉप 10 एक्सपोर्ट आइटम में अमेरिका की 70 परसेंट हिस्सेदारी है. 2024-25 में 21 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट था. जो इस साल बढ़कर 22.6 बिलियन डॉलर हो गया. इन सेक्टर्स में हमारे पास ऑल्टरनेट बाजार नहीं था. जो कि अब आसानी से मिल जाएगा.”

प्रोफेसर राकेश ने आगे बताया कि ट्रेड डील न होने की वजह से मार्केट में काफी अनिश्चितता थी. लेकिन इस बीच हमने UK, ओमान और EU से डील फाइल की. प्रोफेसर ने बताया,

“इससे अमेरिका को संदेश गया कि भारत अपने लिए दूसरे मार्केट तलाश रहा है. बजट का भी असर देखने को मिला. बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर दिया गया है. जो कि एक पॉजिटिव संदेश था. इसलिए अमेरिका से ये डील ऐसे समय में फाइनल हुई है. भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है. इस डायनेमिक दौर में हम अच्छा करेंगे.”

फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को स्वागत योग्य बताया. लेकिन उन्होंने कुछ चीजों पर अभी इंतजार करने की बात कही. शरद ने बताया,

“भारत सरकार को रूस से तेल खरीदने पर अपनी बात साफ करनी होगी. क्या भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा? अगर बंद करेंगे तो कब तक बंद करेंगे? क्योंकि हम ये तुरंत तो बंद नहीं कर सकते हैं. क्या भारत वेनेजुएला से तेल खरीदना शुरू कर देगा? अगर हां, तो क्या वो रूस के तेल से सस्ता होगा या महंगा? और कब से लेंगे?”

शरद कोहली ने आगे कहा कि ट्रंप ने 500 बिलियन डॉलर ट्रेड की घोषणा की है. उन्होंने कहा,

“500 बिलियन डॉलर का ट्रेड काफी फ्यूचरिस्टिक लगता है. क्योंकि भारत-अमेरिका का ट्रेड जब सबसे ज्यादा था, तब भी 100-123 बिलियन डॉलर के आसपास था. तो क्या ये 2030 का टारगेट है? या ये एक साल का टारगेट है? सरकार को ये भी स्पष्ट करना चाहिए.”

अमेरिका ने कहा कि भारत अमेरिका का सामान बिना किसी टैरिफ के लेगा. इस पर शरद कोहली ने कहा,

“अमेरिका से भारत 40-50 बिलियन डॉलर का सामान अभी भी लेता है. और इस पर औसतन टैरिफ 16 परसेंट के करीब लगता है. तो क्या हम सारा टैरिफ छोड़ देंगे?”

शरद कोहली ने कहा कि भारत सरकार की तरफ से इन सभी बातों का स्पष्टीकरण कुछ समय में आना चाहिए. फिलहाल, इस डील के बाद मार्केट में उत्साह है. जो भी बिजनेस बंद होने की कगार पर थे, उनको जान मिली है.

मार्केट का रिएक्शन क्या रहा?

टैरिफ कम होने के बाद भारतीय शेयर बाजार में जोश देखने को मिला. Nifty फ्यूचर्स में तेजी आई, रुपया मजबूत हुआ. कई एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कंपनियों के शेयरों में 5-18% तक की उछाल आई. निवेशक इसे बड़ा पॉजिटिव मान रहे हैं क्योंकि इससे अनिश्चितता खत्म हुई.

हालांकि, एक बात ध्यान देने वाली है. सभी सेक्टर पूरी तरह राहत में नहीं आए. कुछ सेक्टर जैसे स्टील, एल्युमिनियम, ऑटोमोबाइल्स, टिम्बर, कॉपर आदि पर Section 232 टैरिफ (25% या ज्यादा) अभी भी लागू हैं. फिर भी ये डील भारत के लिए बहुत अच्छी मानी जा रही है.

भारत के एक्सपोर्ट बढ़ेंगे, रोजगार बढ़ेगा, कंपनियों का मुनाफा सुधरेगा और इकोनॉमी को नई गति मिलेगी. अमेरिका को भी भारत से ज्यादा सामान खरीदने और बेचने का मौका मिलेगा.

वीडियो: पीएम मोदी और ट्रंप के बीच फ़ोन कॉल, ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ कम कर दिए?

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