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अजित पवार: चाचा की छाया से निकला 'दादा' जिसने महाराष्ट्र की राजनीति को बदल डाला

अजित पवार का राजनीति करियर 4 दशक से ज्यादा लंबा रहा. अपने चाचा शरद पवार की छत्रछाया में सियासत शुरू करने वाले अजित पवार ने महाराष्ट्र की राजनीति में 'दादा' बन चुके थे.

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अजित पवार. (फाइल फोटो- इंडिया टुडे)

अजित पवार अब इस दुनिया में नहीं हैं. 4 दशक से महाराष्ट्र की राजनीति में स्थापित अजित पवार रिकॉर्ड 6 बार डिप्टी सीएम बने और लगातार 8 बार विधानसभा चुनाव जीते. लेकिन ये आंकड़े अजित पवार की राजनीति को समझा नहीं सकते. उन्होंने कुछ ऐसे फैसले लिए जिनसे महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई.

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चाचा को बिना बताए, चुपचाप शपथ ग्रहण!

2019 महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी-शिवसेना वाले NDA को बहुमत मिला था. पर बीजेपी को 2014 चुनाव से 17 कम 105 सीटें मिलीं. सीटें उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना की भी कम हुईं, लेकिन ये तय हो चुका था कि गठबंधन के बिना बीजेपी सरकार नहीं बना सकती. शिवसेना ने मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोक दिया. बार्गेनिंग का दौर चल ही रहा था. लंबे समय से शांत बैठे शरद पवार ने अपने राजनीतिक चक्षु एक्टिव किए. शिवसेना और बीजेपी में जितनी दूरियां बढ़ रही थीं, शरद पवार उद्धव को उतना ही अपने पास खींच रहे थे. बीजेपी से बिगड़ती बात शिवसेना को NCP और कांग्रेस के साथ बातचीत की टेबल तक ले आई थी.

बंद कमरों में कई दफा की बातचीत के बाद ये माना जाने लगा था कि महाराष्ट्र में सत्ता बीजेपी से दूर होती जा रही है. शिवसेना को मनाने का दौर भी लगभग खत्म हो गया. दिल्ली में तब 'बीजेपी के चाणक्य' ने ‘साम-दाम-दंड-भेद’ का इस्तेमाल किया.

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23 दिसंबर, 2019 सुबह 8 बजे थे. हर रोज की तरह टीवी पर मॉर्निंग बुलेटिन और राशि फल बताए जा रहे थे. अचानक मीडिया चैनल्स के पास महाराष्ट्र के राजभवन से फीड रिले होने लगती है. जो विजुअल आ रहे थे उनका किसी को अंदाजा भी नहीं था. सेकेंड के बराबर समय भी बर्बाद किए बगैर महाराष्ट्र की खबर देशभर के टीवी चैनल्स पर ऑन एयर हो चुकी थी. देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की दोबारा शपथ ले ली थी. और उनके साथ उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सबको चौंकाया अजित पवार ने.

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शपथग्रहण के दौरान देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार. (ANI)

ना तो पवार परिवार में ऐसा पहले कभी हुआ था और ना ही महाराष्ट्र की राजनीति में. बीजेपी पहली बार शिवसेना से इतर किसी दूसरी पार्टी के साथ सरकार बना रही थी. हालांकि, अजित पवार को BJP के पास गए 80 घंटे भी नहीं बीते थे कि शरद पवार ने बागी हुए भतीजे को विधायकों समेत वापस बुला लिया और खाली हाथ BJP के देवेंद्र फडणवीस को इस्तीफा देना पड़ा. लेकिन अजित पवार के इस एक कदम ने महाराष्ट्र की राजनीति को हरदम के लिए बदल दिया. भले ही पहला दांव सफल नहीं हुआ लेकिन अजित पवार और बीजेपी ने भविष्य में एक दूसरे के लिए रास्ते खोल दिए थे.

NCP ही तोड़ दी!

शिवसेना जब टूटी, सबको चौंकाते हुए बीजेपी ने एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री बनाया और फडणवीस को उनका डिप्टी नियुक्त किया. नई सरकार बने साल भर से ऊपर हो गया था. लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में एक खिचड़ी और पक रही थी. और इसके 'शेफ' थे अजित पवार.

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गाहे-बगाहे अजित पवार का 'राग मोदी' सुनाई देने लगा था. अजित पवार ने मीडिया से बात करते हुए और सभाओं में पीएम मोदी की तारीफ की. महाविकास अघाड़ी के नेताओं की त्योरियां चढ़ना जायज़ था. पर NCP के अंदर भी अजित पवार की नाराज़गी दिखने लगी थी. एक वाकया हुआ जब दिल्ली में NCP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में अजित पवार शरद पवार के सामने उठकर चले गए. वो इसलिए क्योंकि, महाराष्ट्र NCP अध्यक्ष जयंत पाटिल को अजित से पहले बोलने के लिए बुला लिया गया था.

इसके बाद अमित शाह अप्रैल 2023 में मुंबई दौरे पर गए तो ऐसे कयास लगाए जाने लगे कि शाह और अजित पवार के बीच गुप्त मीटिंग हुई है. हालांकि, अजित पवार ने इन खबरों का खंडन कर दिया था.

उस दौरान NCP में राजनीतिक घटनाक्रम बहुत तेजी से बदल रहा था. 10 जून, 2023 की दोपहर शरद पवार ने अपनी पार्टी के 25वें स्थापना दिवस पर चौंकाने वाला एलान कर दिया. पवार ने अपनी बेटी और सांसद सुप्रिया सुले और पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रफुल्ल पटेल को NCP का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया. शरद पवार ने संदेश दे दिया था कि उन्हें भतीजे से ज्यादा बेटी प्यारी है. अजित पवार इसे बखूबी समझ पा रहे थे.

फिर आया 2 जुलाई, 2023 का दिन. एक बार फिर टीवी पर अचानक महाराष्ट्र के राजभवन से तस्वीरें आने लगीं. अजित पवार, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल समेत 14 विधायकों के साथ राजभवन पहुंचे थे. वो देवेंद्र फडणवीस की बगल वाली कुर्सी में बैठे थे. थोड़ी देर बाद अजित पवार ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद की शपथ ली.

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2 जुलाई, 2023 की राजभवन की तस्वीर. (India Today)

अजित पवार ने ना सिर्फ NCP तोड़ी, बल्कि पार्टी के संस्थापक अपने चाचा शरद पवार से छीन भी ली. अजित पवार ने NCP पर कब्जा जमाया और बीजेपी के साथ हो लिए. शरद पवार के लिए उनके राजनीतिक जीवन की ये सबसे गहरी चोट थी.

बड़ा कौन, शरद पवार या अजित पवार?

2024 का लोकसभा चुनाव, पहली परीक्षा थी जब अजित पवार अपने चाचा की छत्रछाया से हटकर चुनाव लड़ रहे थे. बीजेपी और शिवसेना के साथ अजित पवार की NCP पहली बार गठबंधन में चुनाव लड़ रही थी. लेकिन नतीजे वैसे नहीं आए, जैसी उम्मीद थी. अजित पवार की NCP चार सीटों पर लड़ी, पर जीत सिर्फ एक पर हासिल हुई. यहां तक कि साख का सवाल बनी 'बैटल ऑफ बारामती' में अजित पवार, शरद पवार के सामने नहीं टिक पाए. बारामती सीट पर सुप्रिया सुले के खिलाफ अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार ने चुनाव लड़ा था. दोनों, चाचा भतीजे ने अपनी अपनी ताकत झोंकी लेकिन अजित पवार अपनी पत्नी को जीत नहीं दिलवा पाए.

लोकसभा चुनाव के बाद कहा जाने लगा कि अजित पवार, शरद के सामने नहीं टिक सके. अजित पवार के लिए यह मुश्किल घड़ी थी, लेकिन उन्होंने हार से सबक लिया. 2024 में ही विधानसभा के चुनाव हुए और लोकसभा से उलट उन्होंने अपने प्रदर्शन से लोहा मनवा दिया.

विधानसभा में अजित पवार की NCP ने 59 सीटों पर चुनाव लड़ा और 41 पर जीत हासिल की. जबकि शरद पवार की पार्टी ने 86 सीटों पर चुनाव लड़ा, जीत सिर्फ 10 सीटों पर हासिल हो पाई.

इस जीत के पीछे वफादारों की एक कोर टीम की बारीकी से तैयार की गई रणनीति थी. इस टीम ने हर सीट का अलग-अलग स्तर पर आंकलन किया और रणनीति तैयार की. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर गांव और हर कम्युनिटी ग्रुप के लिए अलग-अलग मैनिफेस्टो बनाए गए. इनमें अजीत पवार ने अपने लंबे कार्यकाल में किए गए कामों और सत्ता में आने पर किए जाने वाले वादों को हाईलाइट किया.

यहां एक और बात को हाईलाइट करने की जरूरत है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले, जुलाई में महाराष्ट्र में महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली लाडकी बहन योजना लागू की गई. इसके तहत 21 साल की उम्र से बड़ी महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाएंगे. सरकारी खजाने पर बोझ लादने वाली यह योजना जब लागू की गई तब सरकार में वित्त मंत्रालय अजित पवार के ही जिम्मे था. यह कहने में गुरेज नहीं करना चाहिए इस योजना ने NDA की जीत में मदद तो की. और अजित पवार की जीत ने शरद पवार को हरा दिया. 

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: अजित पवार विमान हादसे की पूरी कहानी

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