The Lallantop

पीयूष जैन जैसे मामलों में सीज हो चुका पैसा और संपत्ति वापस मिल सकते हैं?

ऐसे केसों में जब्त की गई रकम का क्या होता है?

Advertisement
post-main-image
पीयूष जैन की जब्त की गई रकम पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच अभी जारी है (फोटो सोर्स -PTI और आजतक)
करोड़ों की नकदी, सोना और चंदन के तेल के अलावा गुटखा बनाने में इस्तेमाल होने वाला बेहिसाब कच्चा माल. ये सब जब्त किया गया कारोबारी पीयूष जैन के ठिकानों पर पड़े छापों में. वही 'कानपुर वाले'. इस रेड के बाद ‘कानपुर माने गुटखा सिटी’ वाले मीम अब गुटखा खाने के अलावा बनाने पर भी बनने लगें तो हैरान न होइएगा. स्कूटर से चलने वाला एक आदमी जिसे उसके मोहल्ले के लोग 'बड़ा ज़मीनी आदमी' बता रहे हैं, फ़िलहाल कानपुर जेल में बंद है. प्रवर्तन एजेंसियों के इतिहास की सबसे बड़ी छापेमारी के बाद.
पीयूष जैन के कानपुर और कन्नौज वाले घरों से कुल 197.47 करोड़ रुपए कैश, 23 किलो सोना और 6 करोड़ की मालिय्यत का चंदन का तेल मिला है. पिछले एक हफ्ते से कानपुर (Kanpur), कन्नौज (Kannauj), पीयूष जैन, छापा , सोना, नकदी, पान मसाला और इत्र जैसे कीवर्ड्स न्यूज़ रूम्स के आस-पास हवा की तासीर गरमाए हुए थे. नोटों से भरा एक कमरा. गिनती करने वाली मशीनें, आते-जाते ट्रक. ऐसा लगने लगा था कि ब्लैक मनी वाले किसी कुबेर के यहां अजय देवगन की रेड मूवी का सीक्वल बन रहा है.
लेकिन अब खबर में थोड़ा ट्विस्ट है. वो ट्विस्ट भी बताएंगे, और आसान भाषा में इस सवाल का जवाब ढूंढने की कोशिश करेंगे कि छापेमारी के दौरान जब्त किए गए पैसे का आखिर होता क्या है. ट्विस्ट क्या है? दरअसल सैकड़ों करोड़ की काली कमाई के मामले में गिरफ्तार हुए पीयूष जैन (Piyush Jain) ने अदालत से मांग की थी कि उन पर जो टैक्स बनता है वो काट लिया जाए और मामले को रफ़ा-दफ़ा किया जाए. रफ़ा-दफ़ा करने का मतलब यहां नियमों के मुताबिक़ कार्रवाई करने से है, घूस लेकर नहीं.
खबरों के मुताबिक पीयूष जैन ने कहा है कि उन पर 32 करोड़ की टैक्स चोरी और उस पर 20 करोड़ की पेनल्टी सहित कुल 52 करोड़ का टैक्स बनता है. DGGI यानी डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ जीएसटी इंटेलिजेंस 52 करोड़ काटकर उन्हें उनका बाकी पैसा वापस कर दे. बाकी कितना? 42 बक्सों में भरके बैंक में जमा किए गए कुल 197.47 करोड़ में से 52 करोड़ काटें तो 142.47 करोड़ रुपए पीयूष वापस मांग रहे हैं.
इस पर DGGI के वकील अंबरीश टंडन ने कहा था कि जो भी पैसा रिकवर किया गया है वो टैक्स नियमों के तहत पीयूष जैन की कंपनी Odochem Industries पर की गई कार्रवाई का हिस्सा है. जिसमें से कोई वापसी नहीं होगी. अंबरीश टंडन ने कहा कि पीयूष जैन ने स्वीकार किया है कि उन्होंने टैक्स चोरी की है. अगर वो अतिरिक्त में 52 करोड़ का टैक्स देना चाहते हैं तो जमा कर दें. जांच अभी चल रही है.
दूसरी तरफ इस पूरे मामले पर सियासत और आरोपों का दौर चलता रहा. कहा गया कि पीयूष को राजनीतिक फायदा मिल रहा है. ये भी कहा गया कि DGGI ने केस को कमज़ोर कर दिया है और पीयूष जैन के यहां से जब्त की गई रकम को उनका 'बिज़नेस टर्नओवर' बता दिया है. वरना इनकम टैक्स डील करती तो मामला ब्लैक मनी का बनता. बाद में इस पर DGGI की तरफ़ से 30 दिसंबर 2021 को प्रेस रिलीज जारी कर सफाई दी गई. एडिशनल डायरेक्टर जनरल विवेक प्रसाद की हस्ताक्षरित प्रेस रिलीज में कहा गया कि मीडिया में चल रही खबरें झूटी और बेबुनियाद हैं. जब्त की गई रकम को DGGI ने पीयूष जैन का बिज़नेस टर्नओवर नहीं माना है, सारा पैसा SBI में जमा है. और न ही पीयूष जैन ने 52 करोड़ रुपए जमा किए हैं. अभी जांच चल रही है.
ये तो हो गया खबर में ट्विस्ट, इस पर आगे क्या होता है, ये आगे की बात है, हमारा सवाल है कि छापेमारी में जब्त रकम जो अब बैंक में जमा कर दी गई है, उसके साथ क्या-क्या हो सकता है और ये कैसे किया जाता है. किस धारा में गिरफ्तारी? पीयूष जैन को CGST (Central Goods And Service Tax) एक्ट की धारा 132 के तहत गिरफ्तार किया गया है. और 27 दिसंबर 2021 से 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेज दिया गया है. CGST एक्ट की धारा 132 के अंर्तगत अधिकारी के पास इस एक्ट के किसी भी आरोपी को अरेस्ट करने और कार्रवाई करने की क्षमता होती है. अहमदाबाद DGGI टीम को मिली जानकारी के मुताबिक पीयूष जैन 50 हजार रुपए से कम की फ़र्ज़ी इनवॉइस के जरिए सामान का ट्रांसपोर्टेशन कर रहे थे जिससे कि वो टैक्स के चक्कर से बचे रहें.
यहां एक टर्म है- ई-वे बिल. इसे समझना ज़रूरी है. मोटा-माटी समझें तो जब दो लोग किसी सामान और बदले में पैसे वाले किसी लेनदेन में पार्टी हैं और दोनों या कोई एक भी अगर GST एक्ट में रजिस्टर्ड है, तो 50 हजार रुपए से ऊपर के सामान के ट्रांसपोर्टेशन के लिए उनके पास ई-वे बिल होना ज़रूरी होता है. और पीयूष का लेन-देन 50,000 रुपए से कम के फर्ज़ी बिल के तहत हो रहा था, जिसके मायने हुए टैक्स की चोरी. बरामद माल का हश्र क्या होगा? GST ऑफिसर्स के मुताबिक पीयूष के घर में एक बड़ा तहखाना मिला था, जिसमें 16 प्रॉपर्टीज के दस्तावेज़ और काफ़ी मात्रा में नकद नारायण मिले. दरअसल जब कोई व्यक्ति किसी जांच एजेंसी की नज़र में आता है, तो जरूरी नहीं कि सिर्फ वही जांच एजेंसी उस व्यक्ति की जांच करे. साथ में अन्य विभाग और एजेंसीज़ भी बहते दरिया में हाथ धो ही लेती हैं. फिर मामला इतनी बड़ी बरामदगी का हो तो पीछे रहने का सवाल ही क्या.
यानी केस भले ही GST डिपार्टमेंट ने पकड़ा हो, लेकिन आयकर विभाग भी अब पीयूष जैन के मामले में पीछे नहीं रहेगा और अनडिस्क्लोज़्ड यानी छिपाई गई इनकम पर लगने वाले इनकम टैक्स के कानूनों की धारा में कार्रवाई कर सकता है.
इनकम टैक्स विभाग में कुछ ऑफिसर्स ऐसे होते हैं जिनके पास छापा मारने की पावर होती है. जैसे इनकम टैक्स विभाग के डायरेक्टर जनरल, डायरेक्टर, चीफ़ कमिशनर, कमिशनर या कोई भी अन्य अधिकारी जिसे बोर्ड नियुक्त करे वो किसी व्यक्ति के घर या ऑफिस में रेड कर सकता है. रेड के दौरान ITO यानी इनकम टैक्स ऑफिसर कैश, ज्वेलरी, जरूरी दस्तावेज, प्रॉपर्टी के कागज़ात, या कोई भी कीमती और जरूरी चीज़ को सीज़ कर सकते हैं. हालांकि कारोबार में यूज़ होने वाले स्टॉक को सीज़ नहीं कर सकते.
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (प्रतीकात्मक फोटो - आज तक)
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (प्रतीकात्मक फोटो - आज तक)

किसी भी एक्ट में कई तरह की पेनल्टीज़ होती हैं. अनडिस्क्लोज़्ड इनकम, जो कि रेड के दौरान पकड़ी जाती है, उस पर इनकम टैक्स की धारा 271AAB के तहत पेनल्टी लगाई जाती है. ये पेनल्टी लगती है असेसी पर, वो व्यक्ति जिसके यहां रेड मारी जाती है. अगर सर्च के दौरान मिले कैश, इन्वेस्टमेंट, ज्वेलरी, प्रॉपर्टी या लोन के कागज़ात का ब्योरा और खरीद के कागजात वगैरा असेसी ITO को नहीं दे पा रहा तो ये डीम्ड इनकम यानी असेसी की इनकम मान ली जाएगी. आय का खुलासा न करने या छिपाने का केस लगाते हुए इस अनडिस्क्लोज़्ड इनकम पर 60 फीसदी की पेनल्टी लगा दी जाएगी. इसके अलावा सरचार्ज और सेस के बतौर कुछ एक्स्ट्रा पेनल्टी अलग से. हालांकि असेसी इन पेनल्टीज़ के खिलाफ हायर अथॉरिटीज के यहां अपील कर सकता है. सरकार इन जब्त संपत्ति का करती क्या है? सरकार खुद दो स्तर पर कमाई करती है. एक, टैक्स रेवेन्यू जैसे कि इनकम टैक्स, GST, म्युनिसिपेलिटी टैक्स आदि. और दूसरा है नॉन टैक्स रेवेन्यू, जैसे कि फ़ाइन और पेनल्टी आदि. इसके अलावा राज्य स्तर पर जब्त संपत्तियों को सरकार अपने ख़जाने में डाल लेती है. अक्सर आपने ट्रैफिक कानून के उल्लंघन में भारी फाइन की रिकवरी सुनी होगी. ये पैसा कहां जाता है? ये जाता है सरकार के ख़जाने में जिसे वो इंफ्रास्ट्रक्चर या अन्य मदों में खर्च करती है.
अब बात आती है कि अगर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट किसी संपत्ति को जब्त करता है तो इस संपत्ति का क्या होता है, क्या ये भी सरकार के ख़जाने में जमा हो जाती है. जवाब है- हां. लेकिन ये बात पूरी तरह सही नहीं है.
यहां पर इन्कम टैक्स की धारा 132B का रोल आता है. धारा 132B केवल डिपार्टमेंट के पक्ष में ही नहीं बल्कि असेसी के पक्ष में भी कुछ प्रोविशन देती है. कुछ नियम या शर्तों के आधार पर अगर असेसी ITO को जब्त संपत्ति के लिए संतोषजनक प्रमाण दे देता है तो ITO सर्च या रेड पूरी होने के 120 दिनों के अंदर उस संपत्ति को रिलीज़ कर देगा. इसके साथ ही असेसी जब्त किए गए कैश पर इंटरेस्ट का भी हक़दार होगा. धारा 132B के मुताबिक जब्त हुई संपत्ति का एक और इस्तेमाल किया जा सकता है, धारा 153A के तहत किसी लायबिलिटी यानी कर्जदारी या देनदारी को चुकाने के लिए. हमने जमीन की कुर्की के सम्बन्ध में एक एक्सप्लेनर किया था
, जिससे आप समझ सकते हैं कि जब्त की गई संपत्ति बेचकर किन नियमों के तहत देनदारी चुकाई जा सकती है.
DGGI ने पीयूष जैन की जब्त की हुई संपत्ति पर हाल-फ़िलहाल यही कहा है कि कोई वापसी नहीं होगी. लेकिन आगे की जांच में इनकम टैक्स इस मामले पर क्या रुख अख्तियार करता है, ये देखने वाली बात होगी. जो भी आता है हम आप तक पहुंचाते रहेंगे. ऐसे मामलों में रिहाई के लिए आरोपी क्या प्रयास कर सकता है, ये भी आपको बताएंगे.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement