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ऑपरेशन अश्वमेध: जब सिर्फ 12 सेकेण्ड में NSG कमांडोज़ ने बचाई 141 जानें

24 अप्रैल 1993 को दिल्ली एयरपोर्ट से फ्लाइट 427 ने श्रीनगर के लिए उड़ान भरी. और उसे बीच में ही हाईजैक कर लिया गया. आतंकी सय्यद सलाउद्दीन ने प्लेन को लाहौर ले जाने की कोशिश की लेकिन पाकिस्तान एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने उसे लैंडिंग की इजाजत देने से मना कर दिया. प्लेन को वापस अमृतसर लाया गया. वहां 6 घंटे नेगोशिएसन के बाद NSG कमांडोज़ ने ऑपरेशन अश्वमेध चलाकर 141 यात्रियों को रेस्क्यू कर लिया था.

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24-25 अप्रैल 1993 के बीच एक एक आतंकी ने एक एयर इंडिया फ्लाइट 427 को हाईजैक किया और उसे काबुल ले जाने की कोशिश की लेकिन ऐन मौके पर NSG के कमांडोज़ की बहादुरी के चलते ये हाईजैकिंग फेल हो गयी (सांकेतिक तस्वीर: Wikimedia Commons)

ट्रेजेडी और कॉमेडी में एक बहुत महीन रेखा होती है. चलते चलते गिर जाना और उस पर हंसी आना, कॉमेडियंस के लिए एक आम ट्रोप है. लेकिन गिरकर किसी को ज्यादा चोट लग जाए, अस्पताल ले जाना पड़े तो फिर वो हादसा है, हंसने की बात नहीं है. लेकिन हंसी इन्वॉलन्टरी होती है. यानी आप जानबूझकर न हंस सकते हैं ,न हंसी रोक सकते हैं. हां नाटक जरूर कर सकते हैं. हंसने का और न हंसने, दोनों का. बहरहाल हंसी की बात से शुरुआत इसलिए की. क्योंकि जो किस्सा बताने जा रहे हैं. वो यूं तो एक ट्रेजेडी है. लेकिन इस किस्से के दौरान जो कुछ हुआ, उसे सुनकर हंसी आना स्वाभाविक है.

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बात है एक प्लेन हाईजैक की. दिल्ली एयरपोर्ट से हाईजैक हुआ था. हाईजैक करने वाला आदमी भी जबर था. सोचा उसने कि प्लेन को हाईजैक कर पाकिस्तान ले जाऊंगा, आका खुश होंगे. नाम होगा, इज्जत मिलेगी, एट्सेटरा. लेकिन फिर ऐन मौके पर पाकिस्तान ने गोटी दे दी. हवा में प्लेन लहराता रहा, लाहौर के जनाब प्लेन को अंदर घुसने देने के लिए तैयार ही नहीं हुए. हाईजैक करने वाला जीनियस प्लेन को वापस भारत लेकर आया. फिर बोला, अबकी काबुल ले जाऊंगा.

काबुल जाने के लिए पाकिस्तान से होकर गुजरना था. भारत से अधिकारी समझाते रहे, भाई साहब पाकिस्तान आने नहीं देगा, कैसे जाओगे. फिर भी हाईजैकर अड़ा रहा. जाना है तो जाना है. फिर थक हार कर बोल अच्छा अब दिल्ली ले जाने दो. अंत में प्लेन न दिल्ली गया न लाहौर. बल्कि हुआ एक ऑपरेशन. ऑपरेशन अश्वमेध. आज 25 अप्रैल है और आज की तारीख का संबंध है एक प्लेन हाइजैकिंग की घटना से.

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कंधार हाईजैक

IC814 प्लेन हाईजैकिंग भारत में घटी सबसे बड़ी प्लेन हाइजैकिंग की घटना थी. 1999 में इस हाइजैकिंग के चलते भारत को मसूद अजहर जैसे आतंकियों को छोड़ना पड़ा था.

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रॉ के पूर्व चीफ अमरजीत सिंह दुलत (तस्वीर: ANI)

तब RAW के सेक्रेटरी हुआ करते थे. साल 2015 में उन्होंने दावा किया कि प्लेन को अमृतसर में ही रोका जा सकता था. और सरकारी स्तर पर ढिलाई के चलते हमने ये मौका खो दिया था. तब पंजाब के पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, KPS गिल ने भी उनका समर्थन किया था. गिल का मानना था कि अगर सही तरीके से नेगोशिएट किया जाता, तो प्लेन को अमृतसर में ही रोककर रेस्क्यू ऑपरेशन कराया जा सकता था. उन्होंने कहा,

“मैं दो बार पहले अमृतसर हवाई अड्डे पर हाईजैकिंग से डील कर चुका था. इसलिए अपना अनुभव साझा करने के लिए कैबिनेट सेक्रेटरी को कॉल मिलाया. लेकिन मुझे वहां से कोई जवाब नहीं मिला.”

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गिल जिस पुराने अनुभव की बात कर रहे थे. वो 1993 में हुई हाईजैकिंग की घटना थी. तब गिल पंजाब पुलिस में डायरेक्टर जनरल हुआ करते थे. और गिल ने इस हाईजैकिंग में नेगोशिएटर की भूमिका निभाई थी.

दिल्ली टू श्रीनगर

24 अप्रैल 1993 से कहानी की शुरुआत होती है. उस रोज़ दिल्ली पालम हवाई अड्डे से एक प्लेन टेक ऑफ करता है. फ्लाइट 427. प्लेन में क्रू और पायलट को मिलकर कुल 141 लोग सवार थे. और प्लेन का डेस्टिनेशन था श्रीनगर. घड़ी में दोपहर के 1 बजकर 57 मिनट हो रहे थे. ठीक 46 मिनट बाद दिल्ली एयर ट्रैफिक कण्ट्रोल को एक मेसेज मिलता है. प्लेन हाईजैक हो चुका था.

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साल 1999 में कंधार हाइजैकिंग के चलते भारत को मसूद अजहर जैसे खूंखार आतंकियों को छोड़ना पड़ा था (तस्वीर: getty)

सय्यद सलाउद्दीन नाम का एक बंदा पिस्तौल लहराते हुए खड़ा हुआ और उसने प्लेन को हाईजैक कर लिया. उसने धमकी दी कि उसके बाद हैंड ग्रेनेड हैं. और अगर प्लेन को काबुल नहीं ले जाया गया तो उसे बम से उड़ा देगा. पायलट और क्रू ने उसके कहे अनुसार प्लेन को काबुल की ऒर घुमाया. रास्ता लाहौर यानी पाकिस्तान से होकर गुजरता था.

जैसे ही प्लेन पाकिस्तान के एयर स्पेस में पहुंचा. लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल ने चेतावनी जारी कर दी. पाकिस्तान में घुसने की इजाजत नहीं दी गई. सलाउद्दीन चौंका. बोला, उनसे कहो, प्लेन हाईजैक हुआ है.

अब ये तो नहीं पता कि सलाउद्दीन उस वक्त सोच क्या रहा था. लेकिन ये सब प्लान के विपरीत था. अब तक कई प्लेन हाईजैक हुए थे. और सबका मोडस ऑपरेंडी लगभग यही हुआ करता था. पाकिस्तान अंदर आने की इजाजत नहीं देगा, ऐसी उसे उम्मीद नहीं थी. उसने पायलट से कई बार लाहौर ATC से बात करने को कहा. प्लेन में फ्यूल सिर्फ श्रीनगर तक के लिए था. इसलिए प्लेन को वापस अमृतसर लाया गया. और वहां हवाई अड्डे पर उसे लैंड कराया गया. घड़ी में 3 बजकर 20 मिनट हो चुके थे. यहां सलाउद्दीन ने प्लेन को रिफ्यूल करने की मांग रखी.

काबुल जाना है

अब तक कैबिनेट सेक्रेट्रिएट में क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप (CMG) हरकत में आ चुका था. CMG ने अमृतसर को कांटेक्ट किया. वहां डिप्टी कमिश्नर और सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस हरदीप सिंह ढिल्लन अमृतसर हवाई अड्डे पर पहुंच चुके थे. सिचुएशन को कंट्रोल करने के लिए हाईजैकर से नेगोशिएशन की शुरुआत हुई. लगभग 6 बजे शाम को पंजाब पुलिस के डायरेक्टर जनरल, KPS गिल अमृतसर पहुंचे और उन्होंने नेगोसिएशन की कमान अपने हाथ में ली.

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पंजाब के पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, के एस गिल (तस्वीर: Getty)

हाइजैकर से उसकी मांगों के बारे में पूछा गया. वो सिर्फ़ एक चीज़ को लेकर अड़ा हुआ था. प्लेन को किसी भी तरह से काबुल ले जाना है. गिल ने उसे समझाया कि पाकिस्तान अपने एयर स्पेस में प्लेन को घुसने नहीं दे रहा. तब भी सलाउद्दीन अपनी मांग पर अड़ा रहा.

उसने गिल से कहा, पाकिस्तान ATC से कांटेक्ट करो. लाहौर एयरपोर्ट को कांटेक्ट कर अधिकारियों ने हाईजैकर की मांग बताई. लेकिन लाहौर ATC इसके लिए हरगिज राजी नहीं था. सलाउद्दीन के लिए अब इधर कुआं-उधर खाई वाला हिसाब हो गया था. करे तो करे क्या. उसने प्लेन में फ्यूल भरने को कहा. गिल समझ चुके थे कि अब उसके पास ज्यादा ऑप्शन नहीं हैं. लेकिन ये बात राहत के साथ-साथ खतरे की भी थी. कोई रास्ता न देखते हुए वो प्लेन को बम से उड़ा भी सकता था.

सरकारी कामचोरों को जानते ही हो

दिल्ली से निर्देश थे कि नेगोशिएसन को देर तक खींचा जाए. गिल ने अपनी कोशिश जारी रखी. पूरे 6 घंटे तक नेगोशिएसन चलता रहा. इस दौरान उन्होंने हाईजैकर को कैसे भी करके उलझाए रखा, इसको लेकर गिल बताते हैं,

“ऐसी सिचुएशन में आपको पुलिस वाले के साथ-साथ एक साइकोलोजिस्ट की भूमिका भी निभानी पड़ती है”

गिल ने हाईजैकर को उलझाए रखने के लिए तरह-तरह के बहाने बनाए. उन्होंने पहले कहा कि उनका फ्यूल टैंक तैयार नहीं है. बाद में बोले कि टायर ख़राब हैं. अंत में ये बहाना तक बनाया कि,

“तुम तो सरकारी कामचोरों को जानते ही हो. फॉरेन मिनिस्ट्री में एक कामचोर ने छुट्टी ले रखी है. इसलिए देर हो रही है”

उन्होंने अगले 6 घंटे तक हाईजैकर को उलझाए रखा. लेकिन प्लेन को रिफ्यूल नहीं किया. सलाउद्दीन गिल की बातों से इतना फ्रस्ट्रेट हो चुका था कि उसने एक आख़िरी चेतावनी जारी करते हुए पिस्तौल से गोली चलाई. जो प्लेन की बॉडी में सुराख़ कर बाहर निकली.

तब गिल ने दिल्ली ऑफिस से जल्द से जल्द एक्शन लेने को कहा. रात 11 बजे दिल्ली से NSG की टीम रवाना हुई. अब तक सलाउद्दीन ने अपनी मांग बदल दी थी. वो कहने लगा था कि काबुल नहीं तो दिल्ली ही ले जाने दो कम से कम. अधिकारी इस पर भी राजी नहीं हुए. उन्हें इंतज़ार था NSG टीम का.

ऑपरेशन अश्वमेध

NSG टीम पहुंची और उन्होंने अपना ग्राउंड असेसमेंट शुरू कर दिया. दिल्ली की तरफ से हरी झंडी दी गई. और आज ही के दिन यानी 25 अप्रैल रात एक बजे शुरू हुआ ऑपरेशन अश्वमेध.

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NSG कमांडो (सांकेतिक तस्वीर: ANI)

NSG के क्रैक 52 स्पेशल एक्शन ग्रुप की टीम इस काम के लिए भेजी गई थी. करीब 62 कमांडो थे, जिन्होंने प्लेन को चारों तरफ से घेर लिया था. ठीक 1 बजे 4 लोगों की टीम प्लेन के अंदर घुसी. इससे पहले कि सलाउद्दीन कुछ समझ पाता, सिर्फ 12 सेकेण्ड के अंदर उसे गोली लग चुकी थी. कमांडोज़ ने उसके पास से दो 9 mm की पिस्तौल बरामद की और सारे यात्रियों को सिक्योर कर लिया. पूरा ऑपरेशन सिर्फ पांच मिनट में पूरा हो गया.

सलाउद्दीन को अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां पहुंचने से पहले उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया. बाद में तहकीकात में सामने आया कि उसका असली नाम मुहम्मद यूनस शाह था. वो हिजबुल मुजाहिदीन का मेंबर था. हालांकि हिजबुल ने इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया था.

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