आज स्वरा इसी फिल्म के खिलाफ खुलकर बोल रही हैं. वजह ही कुछ ऐसी है.
द वायर वेबसाइट के लिए स्वरा ने संजय लीला भंसाली को एक खुला ख़त लिखा. स्वरा के मुताबिक़ इस फिल्म ने उन्हें एक 'बोलती हुई योनि' होने का एहसास दिलाया है. जो वो नहीं होना चाहतीं.
स्वरा ने साफ़ किया कि उन्हें किसी तरह की पर्सनल दिक्कत नहीं. मगर वैचारिक तौर पर उन्हें फिल्म से बहुत दिक्कत है.स्वरा ने ख़त की शुरुआत भंसाली की तारीफ से की. स्वरा ने साफ़ किया कि उन्हें किसी तरह की पर्सनल दिक्कत नहीं. मगर वैचारिक तौर पर उन्हें फिल्म से बहुत दिक्कत है. स्वरा ने लिखा कि उन्होंने भंसाली के साथ गुज़ारिश फिल्म में एक छोटा सा किरदार किया. उन्होंने पाया कि भंसाली दूसरों के विचारों की बहुत कद्र करते हैं. स्वरा ने वक वीडियो भी शेयर किया जिसमें उन्होंने पद्मावत की रिलीज को सपोर्ट किया.
अगर हम इक्कीसवीं सदी में भी औरतों की इज्जत उनकी वजाइना में देखते हैं, तो एक कलाकार के तौर पर हम ठीक नहीं कर रहे हैं.
स्वरा जो बात साफ़ करना चाहती हैं कि औरतें सिर्फ योनि नहीं होतीं. मतलब औरतें केवल सेक्स या भोग की वस्तु नहीं, इंसान होती हैं. लेकिन अगर हम इक्कीसवीं सदी में भी उनकी इज्जत उनकी वजाइना में देखते हैं, तो एक कलाकार के तौर पर हम ठीक नहीं कर रहे हैं. औरतों की 'इज्जत' को बचाने, संभालने की कोई जरूरत नहीं है. क्योंकि उनकी इज्जत उनकी वजाइना नहीं है.
स्वरा के मुताबिक़ आज हम उस समय में जी रहे हैं जब पांच साल पहले चलती बस में हुए एक लड़की के रेप ने पूरे देश को हिला दिया था.ये सच है कि भंसाली ने साफ़ किया है कि उनकी फिल्म एक ऐतहासिक विषय पर बनाई गई है. फिल्म में दिखाया गया समय और साज का समय बहुत अलग है. लेकिन भंसाली ने ये फिल्म बनाना आज चुना है. जो फिल्म को आज के कॉन्टेक्स्ट में सामने आता है. स्वरा के मुताबिक़ आज हम उस समय में जी रहे हैं जब पांच साल पहले चलती बस में हुए एक लड़की के रेप ने पूरे देश को हिला दिया था.
स्वरा ने लिखा कि भंसाली फिल्म की शुरुआत में ही कहते हैं कि वो किसी भी तरह से सती या जौहर का सपोर्ट नहीं करते. मगर जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है, उनका ये डिस्क्लेमर बेमतलब हो जाता है. क्योंकि डिस्क्लेमर देने के बाद वो पूरी फिल्म में राजपूत इज्जत और मान की बात करते दिख रहे हैं.
'अच्छा हो अगर हर वजाइना की इज्जत की जाए. लेकिन जब एक वजाइना के साथ खिलवाड़ हो तो उसकी इज्जत होनी बंद न हो.'स्वरा ने ख़त में लिखा:
'अच्छा हो अगर हर वजाइना की इज्जत की जाए. लेकिन जब एक वजाइना के साथ खिलवाड़ हो तो उसकी इज्जत होनी बंद न हो. सिर्फ इसलिए कि उसकी वजाइना पर किसी बाहरी आदमी ने हमला किया, उसे मौत को गले न लगाना पड़े.
वजाइना के अलावा औरत बहत कुछ होती है. इसलिए वजाइना के अलावा भी उसका जीवन हो सकता है.'














