The Lallantop

टीपू सुल्तान और नेपोलियन का सीक्रेट कनेक्शन

विश्व के इन दो नायकों की वो कहानी, जो अब तक ज्यादा लोगों को नहीं पता है.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
  • अविनाश विवेक
टीपू सुल्तान की 4 मई को बरसी थी. आज यानी 5 मई को बरसी है नेपोलियन बोनापार्ट की. दोनों ही विश्व इतिहास के महान नायक हैं. पर किंवदंती बन चुके इन दोनों नायकों के बीच कुछ सीक्रेट कनेक्शन भी था. यहां जानिए क्या था दोनों के बीच का रिश्ता.
फ्रांसीसियों और अंग्रेजों के बीच 1793 में युद्ध शुरू हुआ. इस बार अंग्रेजों को हराने को लेकर फ्रेंच एकदम सीरियस थे. उन्होंने तय कर लिया कि देसी शासकों की मदद लेकर इस काम को अंजाम देना है. पांडिचेरी उस समय भारत में फ्रांसीसियों का प्रमुख केंद्र हुआ करता था. वही पांडिचेरी, जिसे हम लोग आजकल पुडुचेरी के  नाम से जानते हैं.
हैदर अली उस समय मैसूर का शासक हुआ करता था. हैदर अंग्रेजों का दुश्मन था. मगर उसका बेटा टीपू उससे भी दो कदम आगे था. टीपू की फ्रांसीसियों से दोस्ती थी. टीपू फ्रांसीसी क्रांति में बहुत रुचि ले रहा था और नेपोलियन का प्रशंसक भी था. उसकी पेरिस की डायरेक्टरी में रुचि थी. डायरेक्टरी फ्रांस की संसद को कहते हैं. उसने जैकोबिन क्लब की सदस्यता भी ले रखी थी. जो वहां का एक क्रांतिकारी पार्टी थी. टीपू को नेपोलियन के मिस्र अभियान से बहुत आशा थी. उसके दिमाग में यही था कि इधर नेपोलियन ने मिस्र में अंग्रेजों के पैर उखाड़े. उधर टीपू भारत में फ्रांसीसियों के साथ मिलकर भारत में अंग्रेजों की हवा निकाल देगा.
इस बारे में उसकी नेपोलियन से बात भी हुई थी. नेपोलियन और टीपू के बीच इस प्लान के बारे में बात हुई. मगर अंग्रेजों ने प्लान के काम करने से पहले ही गेम  कर दिया. उन्होंने सुस्त, आलसी अंग्रेज गवर्नर जनरल जॉन शोर की जगह लार्ड वेलेजली को भारत में नियुक्त किया. लॉर्ड वेलेजली तेज तर्रार था. उसने टीपू के कोई कदम उठाने से पहले ही निजाम को पटा लिया. जो हैदराबाद का शासक था और बहुत दिन से फ्रांसीसियों का साथी था. निजाम ने फ्रांसीसियों से संधि तोड़ दी और फ्रेंच सैनिकों को निकाल दिया. अभी उधर नेपोलियन 1799 में सीरिया में लड़ ही रहा था. तभी अंग्रेजों ने मराठों और निजाम के साथ मिलकर टीपू को टीप दिया. इसी लड़ाई को कहा गया- चौथा अंग्रेज-मैसूर युद्ध. इसमें टीपू सुल्तान मारे गए. और उसका दोस्त नेपोलियन उसकी मदद के लिए नहीं आ सका. टीपू के मरने के बाद उसकी कई बेशकीमती चीजें अंग्रेज उठा ले गए. लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में आज भी कई ऐसी चीजें रखी हुई हैं. आखिरी समय में टीपू ने जो अंगूठी पहन रखी थी, उस पर राम लिखा हुआ था. कहते हैं अंग्रेजों ने उनकी उंगली काटकर वो अंगूठी भी निकाल ली.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement