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इस आदमी की 'मन की बात' सुन के मजा आ जाएगा!

मोदी जी के मन की बात तो हर संडे सुनते हो, आज इनकी पढ़ो.

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मन की बात

vineet singh विनीत दी लल्लनटॉप के रीडर और पक्के वाले दोस्त हैं. बलिया से हैं. जहां से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने थे. उन्हीं ने देवस्थली विद्यापीठ स्कूल खोला था जिस स्कूल में पढ़े हैं विनीत. आजकल मुंबई में रहते हैं और वहीं से दुनिया देख रहे हैं. अपने देखे सुने का तमाम एक्सपीरिएंस लल्लन के साथ भी बांटते हैं. अपने दोस्त मकालू से परेशान रहते हैं, उसके किस्से भेजते हैं. आप भी पढ़िए.

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मेरा वाहियात और सौ फीसदी अन-वांटेड दोस्त मकालू आज सुबह सुबह मेरे घर आ टपका. हाथ में एक पर्ची लेकर आया था. मुझे लगा राशन की दुकान से सामान लाने के लिए भाभी जी ने लिस्ट दी होगी. लेकिन मैं हमेशा की तरह गलत था. कमीन कुछ और ही लिख कर आया था. मुझसे पूछा - गुरु भाभी कहां हैं? पार्क में गयी हैं. अपनी सहेली के साथ. हाथ मुंह तो धो लिया होगा? हां. नश्ता-पानी? कर लिया है. शौच और स्नन वगैरह? अबे पागल हो क्या? बिन शौच किए नश्ता कर लूंगा क्या. बोला - गुरु आजकल किसी का कुछ नहीं पता. खैर तुम पहले तैयार हो जाओ कुछ काम है. फटाफट ये लुंगी उतारो और पैंट बुशर्ट पहन लो. अब मेरा मुंह न देखो. सवाल न पूछो. फटाफट पहन लो बस. जूते भी डाल लेन. मैंने कई बार वजह जानने की कोशिश की लेकिन मकालू ने मुंह ही नहीं खोला. कोई चारा नहीं था सो मैं तैयार हो गया. मकालू कुर्सी खींचकर बोला - गुरु बैठ जाओ. खुद सामने दूसरी कुर्सी पर बैठ गया. अब मुझे झुंझलाहट हो रही थी. कई बार पूछ चुका था कि ये सब करा क्यूं रहे हो. लेकिन कम्बख़्त कोई जवाब ही नहीं दे रहा था. अब मकालू ने किसी दार्शनिक की पर्चा पढ़न शुरू किया - गुरु मेरा दिल बहुत भरा हुआ है. बहुत कुछ कहन चाहता हूं. शुरुआत मैं तुमको धन्यवाद देने से करूंगा कि तुम मुझे इतन प्यार करते हो. मुझे स्कूल से लेकर कॉलेज तक नक़ल कराने के लिए धन्यवाद. अपने मौसा से सिफारिश लगाकर मुझे नौकरी दिलाने के लिए धन्यवाद. कल जो 700 रुपये उधार दिए थे उसके लिए खास तौर पर शुक्रिया. लेकिन कुछ कड़वा सच भी है जिसकी वजह से मुझे तुमको अपन मित्र कहने में शर्म आती है. मुझे शर्म आती है कि तुम आज तक मिडिल क्लास आदमी क्यूं हो? लेकिन मेरी वजह से तुम जरूर एक दिन बड़े आदमी बनोगे. तुझे शर्म आती है? अबे मैं तो आज भी मिडिल क्लास हूं और तू क्या मदद करेगा मेरी. और यही बोलने के लिए तूने मुझे राजा बाबू बनया है? - मैं हैरान था. गुरु तुम बीच में ज्यादा पकर-पकर न बोलो. बस सुनो ध्यान से. मकालू ने मेरी बातों पर बिल्कुल ध्यान न देते हुए पढ़ना शुरू किया - बताओ तुम अपर क्लास में शामिल होन चाहते हो या नहीं? बिल्कुल चाहता हूं - मैंने जवाब दिया. गुरु बोल रहा हूं न कि बीच में न बोलो - मकालू उठा. पलंग पर पड़ा मेरा गमछा उठाया. स्टडी टेबल से टेप उठाया. मेरी कुर्सी के पीछे आया और झटके से मेरा हाथ पकड़ कर पीछे बांध दिया और मेरी मुंह पर टेप लगा कर वापस अपनी कुर्सी पर बैठ कर दुबारा शुरू हो गया - तुम अमीर बनना चाहते हो या नहीं? अपने बच्चों के लिए अच्छा भविष्य चाहते हो या नहीं? मैंने कहा - पहले तू मेरा मुंह खोल फिर बताता हूं. लेकिन असल में जो आवाज बाहर आई वो थी - कूं कूं- कूं कूं. मकालू नॉन स्टॉप जारी रहा - तुम तो जानते ही हो कि मैं कितना विद्वान आदमी हूं. फिर भी मैं सामान्य मानवी की तरह रहता हूं. सिर्फ 200 जैकेट है मेरे पास. दो चार कलर शेड बच गया है वो भी ले लूंगा. आज कल खेतों में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है. जो समृद्धि का प्रतीक है. कुछ बेवकूफ लोग शिकायत कर रहे हैं कि उसे छुट्टे जानवर चर रहे हैं. तो बता दूं कि किसानों को ध्यान में रखकर उन्हें छुट्टे जानवरों को भगाने का काम दिया गया है. इतना अनाज तो बच ही जाएगा खेत में कि किसान खाए बिन नहीं मरने वाले. नौजवानों को असली वाली नौकरी तो मिलने से रही तो राष्ट्रप्रेम के नाम पर उन्हें गौरक्षक दल से लेकर ऑनलाइन एवं ऑफलाइन ट्रोल दल में तब्दील कर दिया गया है. खाली दिमाग शैतान का घर होता है न. और अब इस देश में सिर्फ हिन्दू त्योहार ही धूमधाम से मनेगा. अगर कोई और अपना त्योहार मनाने कि कोशिश करेगा तो हम उस त्योहार के सामने झूठा ही सही लेकिन एक प्रतीकात्मक त्योहार खड़ा कर देंगे. जैसे इस बार क्रिसमस के सामने तुलसी दिवस को लॉन्च कर दिया था. मैं चाहता हूं कि स्वदेशी आंदोलन के नम पर भी एक कानून बने जिसके हिसाब से सबको पतंजलि का सामान खरीदन अनिवार्य हो. सबका आधार कार्ड और डेबिट कार्ड पतंजलि के बैंक अकाउंट से जोड़ दिया जाये. हर महीने का राशन होम डिलीवर हो जाए और पैसा आटोमेटिक लोगों के खाते से कट जाए. एक और कानून बनना चाहिए कि कोई भी अपनी बीवी और मोदी जी के खिलाफ एक शब्द नहीं बोलेगा. अगर विरोध में बोला तो उसकी सैलरी बीवी के खाते में और वोट सीधे मोदी जी को जाएगा. जहां तक बीवीयों का सवाल है मुझे गुप्ता की बीवी बहुत सही लगती है. अगर मौसम की बात करें तो मौसम बहुत ठंडा है लेकिन मेरे लिए बहुत आशिकाना और सुहाना है क्यूंकि मैंने अभी अभी नई रजाई ली है तो तुमको मेरी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. वैसे भी मुझे बचपन से संघर्ष करने की आदत है. बस अब मैं अपनी बातों को विराम देता हूं. मुझे तुमसे बात कर के बहुत ख़ुशी हुई. गुरु कोई फीडबैक या सुझाव हो तो मकालू एप्प पर लिखना. मुझे मेल भी कर सकते हो और पत्र भी लिख सकते हो. ये अलग बात है कि मैं पढूंगा नहीं. मित्र मेरी मन की बात सुनने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. आभार. मकालू उठा. अपन पर्चा समेटा. फिर मेरी तरफ बढ़ा. मुझे लगा अब मकालू मेरा हाथ और मुंह खोलने वाला है. विद्या कसम मैं साले को बहुत कूटने वाला था. लेकिन वो मेरे सामने आया और झुककर उसने मुझे नमस्कार किया और जैसे बड़े नेता स्टेज से हाथ हिलाते हुए उतरते हैं और हेलीकाप्टर पर बैठ कर गायब हो जाते हैं. मकालू भी हाथ हिलाता हुआ गायब हो गया. दो घंटे बाद मेरी बीवी आई तो उसने मेरा हाथ खोला. उसे लगा घर में डाका पड़ा गया है. मैं सुबह से मकालू को ढूंढ रहा हूं. अगर आज मैंने उसे कुत्ते कि तरह कूं कूं न कराया तो मेरा भी नम नहीं. मकालू की बातें कान में धरिए और योगी जी के मन की बात देखिए, फुल्ली लल्लनटॉप.

मकालू के और किस्से:

'रात में बाबाओं की दुकान सजाने वाले चैनलों को दिन में ज्ञान देने का कोई हक नहीं'

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