
'द लल्लनटॉप' के लिए ये आर्टिकल लिखकर भेजा है अभिषेक त्रिपाठी ने. अभिषेक उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में रहते हैं. 1998 में हुए ‘गुड फ्राइडे समझौते’ के बाद से ही अभिषेक बेलफास्ट में हैं. हिंदुस्तान से बाहर रहकर भी हिंदुस्तान की पूरी खबर रखते हैं. हिंदुस्तान के अलावा दुनियावी बातों में भी उनकी बड़ी दिलचस्पी है. अभिषेक ने पहले भी हमारे लिए एक लेख लिखा था. अब उन्होंने ये आर्टिकल लिखकर भेजा है.
अमेरिका के उस ताकतवर परिवार की कहानी, जिसके लोगों को शायद उम्र पूरी न करने का शाप लगा हुआ है
5 जून को इस परिवार के एक सदस्य का मर्डर हुआ था. 50 साल बाद भी उस हत्या के कई सवाल अनसुलझे हैं.
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5 जून के ही दिन रॉबर्ट कैनेडी को गोली मारी गई थी. उसी अंदाज में, जैसे उनके भाई JFK की हत्या की गई थी. इस हत्या को इतने साल बीत गए हैं, मगर इसको लेकर कॉन्सपिरेसी थिअरीज खत्म नहीं हुई हैं (फोटो: रॉयटर्स)
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तारीख: 5 जून, 1968 वक्त: रात के 12.15 बजे जगह: ऐंबैसडर होटल की पैंट्री, लॉस एंजिल्स, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका
उस रात ऐंबैसडर होटल में जश्न का माहौल था. डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े लोगों से होटल भरा था. हजारों की तादाद में खुश लोग. झूमते-गाते. खाते-पीते. हजारों प्रशासकों और पार्टी वर्करों का जमावड़ा. ये सब कैलिफॉर्निया प्राइमरी में अपने नेता के जीतने की जीत की खुशी मना रहे थे. मगर उनके बीच कोई था, जिसका इस खुशी से कोई वास्ता नहीं था. होटल की पैंट्री में छुपकर बैठा था वो. उम्र होगी तकरीबन बीसेक साल. फिलिस्तीनी मूल का जवान सा लड़का. उसकी जेब में एक .22 कैलीबर की एवर जॉनसन कैडेट रिवॉल्वर रखी थी. उसकी आंखें एक खास आदमी को तलाश रही थीं. मगर उसे अपने टारगेट को खोजने में मेहनत नहीं करनी पड़ी. उसका शिकार खुद ही वहां चलकर आ गया. असल में उसे बॉलरूम से निकलकर प्रेस रूम में पहुंचना था. किसी ने कहा, रसोई की तरफ से शॉर्टकट है. बॉडीगार्ड ने कहा, उधर से मत चलिए. लेकिन शॉर्टकट का मोह.
शिकार बढ़कर रसोई में घुस गया. यहीं उसका सामना हुआ जेब में रिवॉल्वर लेकर बैठे अपने शिकारी से. शिकारी एकाएक झपट्टा मारकर अपनी जगह से उठा. और इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, पैंट्री गोलियों की आवाज से थर्रा उठी. लोग बदहवास. यहां भागे, वहां भागे. पूरे माहौल में अफरातफरी मच गई. एक तरफ ये सब हो रहा था. दूसरी तरफ वो इंसान जमीन पर गिर रहा था. वो, जो उस लड़के की रिवॉल्वर का निशाना था. कुल चार गोलियां धंस गई थीं उसके जिस्म में. वो मुंह के बल न गिरे, इस फिक्र में उसके एक सहयोगी ने उसे थामा. सहारा दिया. नीचे गिरते हुए उस शख्स ने अपने सहयोगी से सवाल पूछा-
बाकी सब ठीक हैं कि नहीं?

गोली लगने के बाद जमीन पर गिरे हुए रॉबर्ट कैनेडी (फोटो: रॉयटर्स)
उसकी मौत तय थी. वो तो बस मर ही रहा था. फिर भी मरने की उस घड़ी में वो दूसरों के लिए फिक्रमंद था. उनका हाल-चाल ले रहा था.
कौन था वो? हम आज उसको याद क्यों कर रहे हैं?
रॉबर्ट फ्रांसिस कैनेडी. यही था उनका नाम. अमेरिकी रष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी, यानी JFK के छोटे भाई. शॉर्ट में, RFK. लोग बॉबी भी पुकारते हैं. आज तारीख है 5 जून. बॉबी की हत्या को 50 बरस बीत गए हैं.
1968 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 1968 का साल था. अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले थे. डेमोक्रेटिक टिकट के सबसे मजबूत दावेदार थे लिंडन जॉनसन. पांच साल पहले, यानी 1963 में अमेरिका के पहले कैथलिक राष्ट्रपति JFK की हत्या हुई थी. उस समय उप-राष्ट्रपति थे लिंडन. मर्डर के बाद उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया था. लिंडन के दौर में भी बॉबी अटॉर्नी जनरल के पद पर रहे. लेकिन उनके ऊपर भी राष्ट्रपति बनकर JFK की विरासत को आगे ले जाने का दबाव था. बॉबी ने मगर ये फैसला लेने में पूरा वक्त लिया. करीब चार साल का लंबा वक्त. 16 मार्च, 1968 को अपनी उम्मीदवारी घोषित कर दी.

JKF, रॉबर्ट और अडवर्ड. ये 1960 की फोटो है. जॉन के राष्ट्रपति बनने के पहले के दौर की.
4 जून को कैलिफॉर्निया प्राइमरी में उन्होंने अपने विरोधी यूजीन मैक्कार्थी को हराया. इसी जीत का जश्न ऐंबैसडर होटल में मनाया जा रहा था. JFK की हत्या का उनके ऊपर बहुत असर पड़ा था. वो राष्ट्रपति बनकर अपने भाई के अधूरे काम पूरा करना चाहते थे. मगर शायद कुछ ताकतवर लोगों या संस्थाओं को ये मंजूर नहीं था. बॉबी की हत्या के बाद JFK की पत्नी जैकलिन अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बहुत परेशान हो गईं. उन्होंने कहा कि अगर वो कैनेडी परिवार के लोगों को चुन-चुनकर मार रहे हैं, तो मैं बच्चों समेत अमेरिका छोड़ दूंगी. और वो एक ग्रीक आयलैंड पर जाकर रहने लगीं.
मासूम चेहरा कुशल रणनीतिकार बॉबी, RFK का ये पॉपुलर नाम था. शर्मीला स्वभाव. परिवार से प्यार करने वाला. उनके ऊपर जान छिड़कने वाला. हॉर्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ा. बड़ा वकील. बॉबी की ख्वाहिश थी. खुद को एक अच्छा पति और अच्छा पिता साबित करने की. बॉबी मासूम चेहरे वाले, मीठा बोलने वाले, इंसान थे. दिमाग पैना था मगर. कुशल रणनीतिकार थे. लोग बड़ी आसानी के साथ उनसे जुड़ जाते थे. लोग उन्हें इतना पसंद करते थे कि चुनावी रैलियों में बॉबी अपनी शर्ट कफलिंक्स और टाई खोते रहते थे. क्यों? क्योंकि लोग उन्हें छूने की कोशिश में शर्ट की बाहें पकड़ लेते थे.
निक्सन ने एक बार चिढ़कर कहा था-
जाने क्यों जनता बॉबी को रॉक स्टार की तरह हाथों हाथ ले लेती हैं?

पत्नी जैकलीन के साथ राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी. दिन-दहाड़े राष्ट्रपति की हत्या हो जाना अमेरिका के लिए एक कलेक्टिव शर्मिंदगी की बात थी. ये बात आज भी अमेरिकियों को सालती है.
JFK की परछाईं JFK को अमेरिका का पहला कैथलिक राष्ट्रपति बनाने में भी बॉबी का काफी हाथ था. बहुत मेहनत की थी उन्होंने अपने बड़े भाई के पीछे. लोग कहते, वो JFK के पॉलिटिकल सुरक्षा कवच हैं. दोनों भाइयों के स्वभाव में फर्क था. जॉन के बारे में मशहूर था कि वो ज्यादा लोड नहीं लेते. मतलब, गंभीर किस्म के नेता नहीं हैं. उनकी पर्सनेलिटी चार्मिंग थी. उनके उलट बॉबी शर्मीले, गंभीर, मेहनती, और धार्मिक थे. जब JFK पार्टी और बड़े लोगों की मेहमान नवाज़ी (जिसमें उनकी खास दोस्त मर्लिन मुनरो भी होतीं) में मशगूल होते थे, तब कामकाज देखते बॉबी. सबको मालूम था कि बॉबी अपने ऑफिस में ही मिलेंगे. ऐसे मौकों पर काम की बातें उनसे ही की जाती थीं.
बॉबी ने अमेरिका के 64वें अटॉर्नी जनरल के अपने चार साल के कार्यकाल में अश्वेतों के खिलाफ नस्लभेद को खत्म करने में बड़ा काम किया. मॉर्टिन लूथर किंग ने उनकी कोशिशों के लिए उन्हें बहुत सराहा. अमेरिका में माफिया के खिलाफ बॉबी ने बड़ा अभियान चलाया था. शिकागो से क्राइम खत्म करने में बॉबी की बड़ी भूमिका थी. कहते हैं कि 1962 के क्यूबा मिसाइल क्राइसिस को हैंडल करने में उनका ही दिमाग था. वियतनाम युद्ध के खिलाफ बोलने वाले वो पहले अमेरिकी राजनेता बने.
कैनेडी परिवार के लड़कों में सबसे पहले घर बसाने वाले भी बॉबी ही थे. उन्होंने 24 की उम्र में रईस खानदान की एथल से शादी की. पत्नी के साथ उनके 11 बच्चे हुए. कैथलिक ईसाईयों में उस वक्त बड़ा परिवार होना आम बात थी. क्योंकि कैथलिक्स परिवार नियोजन नहीं मानते थे. बर्थ कंट्रोल की इजाजत पोप की तरफ से नहीं थी. वेटिकन आज भी इसकी मान्यता नहीं देता है.

ये जोसफ कैनेडी की फैमिली फोटो है. साथ में हैं उनकी पत्नी रोजमेरी कैनेडी. और नौ बच्चे. ये फोटो 1938 में ली गई थी (फोटो: AP)
कैनेडी परिवार का अभिशाप कैनेडी परिवार के मुखिया जोसफ कैनेडी एक आयरिश इमिग्रेंट परिवार से आते थे. वो एक प्रभावशाली और धनी व्यापारी थे. उन्हें 1938 में UK में अमेरिका का ऐंबैसडर भी बनाया गया था. उनकी अपने बच्चों को लेकर बड़ी महत्वाकांक्षा थी. बच्चों को आगे बढ़ाने में जोसफ ने अपने रसूख और पैसे का इस्तेमाल किया. कैनेडी परिवार को अमेरिका के सबसे प्रमुख परिवार की श्रेणी में खड़ा करना जोसफ का ही सपना था. कैनेडी परिवार को अमेरिका का शाही परिवार भी कहा जाता है. जोसफ कैनेडी और रोज कैनेडी के नौ बच्चे थे. इनमें सबसे बड़े और पिता के फेवरेट थे- जोसफ कैनेडी जूनियर. वो US एयर फोर्स में पायलट थे. 1944 में दूसरे वर्ल्ड वॉर के दौरान यूरोप में एक सीक्रेट मिशन के दौरान उनके प्लेन में आग लग गई और उनकी मौत हो गई. उनकी असमय मौत के बाद ही जोसफ सीनियर ने अपने दूसरे बेटे JFK को राजनीति के लिए तैयार करना शुरू किया था. चार साल बाद 1948 में उनकी एक बेटी कैथलीन कैनेडी की एक विमान दुर्घटना में मौत हो गई.
नवंबर 1962 में अमेरिका के राष्ट्रपति रहते हुए JFK की हत्या हो गई. डलास शहर में, दिन-दहाड़े. JFK का मर्डर अमेरिका की लोकगाथाओं में शामिल है. इसके बारे में पिछले 55 सालों में बहुत कुछ लिखा-पढ़ा गया है. RFK जोसफ और रोज के 7वीं संतान थे. धर्म के प्रति झुकाव उन्हें मां से मिला था. राष्ट्रपति चुनाव के दौरान RFK की 1968 में लॉस एंजिल्स में हत्या कर दी गई. ये चुनाव निक्सन ने जीता. मगर निक्सन अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए. वॉटरगेट मामले में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.

ये अडवर्ड कैनेडी हैं. कैनेडी भाइयों में सबसे छोटे. साथ में हैं उनकी पत्नी जोआन. ये तस्वीर मार्च, 1962 की है (फोटो: AP)
कम लोगों को पता है कि कैनेडी परिवार की एक बहन यूनिस कैनेडी ने अपनी बहन की बीमारी से प्रेरणा लेकर स्पेशल ओलंपिक्स की स्थापना की थी. छोटी बहन रोजमेरी की पूरी जिंदगी कुछ मानसिक रोगों की वजह से अस्पताल में ही बीती. छोटे भाई टेड कैनेडी एक हादसे में बाल-बाल बचे. इस हादसे में उनके साथ के दो लोगों की मौत हो गई. बाद में टेड कैनेडी परिवार के नुमाइंदे की तरह 50 साल तक सीनेटर बने रहे. 2009 में ब्रेन कैंसर की वजह से उनकी मौत हो गई. टेड को डेमोक्रेटिक पार्टी के एक स्तंभ की तरह देखा जाता है. टेड यूनिवर्सल हेल्थ केयर के बड़े सपोर्टर थे. यह विडंबना ही कही जाएगी कि जब 2010 में ओबामा ने इसे कानून की शक्ल दी, तो इसे देखने के लिए वो जिंदा नहीं थे.
RFK के चौथे बच्चे डेविड कैनेडी की मौत ड्रग ओवरडोज की वजह से 1984 में हो गई थी. RFK की छठी संतान माइकल कैनेडी की मौत एक स्की एक्सिडेंट में 1997 में कोलराडो में हो गई.
जॉन कैनेडी जूनियर, जो कि JFK और उनकी पत्नी जैकलीन की दूसरी संतान थे, की मृत्यु 1999 में एक प्लेन क्रैश में हो गई. इसमें उनकी पत्नी भी मारी गईं. JFK की हत्या के समय जॉन केवल तीन साल के थे. उनका वो विडियो, जिसमें वो अपने पिता की शव यात्रा को अपने नन्हे हाथों से सलूट कर रहे हैं, सारे अमेरिका को रुला गया. लोगों को अब भी वो फ्रेम याद है. एक ही परिवार के अंदर इतनी सारी ऐक्सिडेंटल मौतों, हत्याओं की वजह से इसे 'कैनेडी परिवार का अभिशाप' कहा जाने लगा.

ये 22 जून, 1963 की फोटो है. रॉबर्ट कैनेडी के साथ हैं मार्टिन लूथर किंग जूनियर (फोटो: रॉयटर्स)
साजिश की बू बॉबी की हत्या के बाद अमेरिका में कैनेडी परिवार को लेकर एक असुरक्षा की भावना फैल गई. इसका ये भी असर हुआ कि कैनेडी परिवार की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि आज तक कैनेडी परिवार के बच्चों का सेनेटर या किसी महत्त्व की कुर्सी पर बैठना लगभग जरूरी समझा जाता है. JFK और बॉबी, दोनों की हत्याएं मिलती-जुलती थीं. अकेला गनमैन कहीं से प्रकट होता है और गोलियां बरसा देता है. सुरक्षाकर्मी खड़े रह जाते हैं. अमेरिका में अगर दाल खाते होते, तो ये भारतीय कहावत 'दाल में कुछ काला है' ठीक जमती.
पिछले 50 सालों में इन दोनों हत्याओं के बारे में बहुत सारी बातें कहीं गईं. लिखी गईं. कोई कहता है कि CIA का हाथ था. कोई माफिया की तरफ उंगली उठाता है. लिंडन जॉनसन से बॉबी की अदावत को भी कुछ लोग कारण मानते हैं. दोनों एक-दूसरे को फूटी आंख नहीं सुहाते थे. इस अदावत की भूमिका JFK के इलेक्शन के दौरान 1962 में ही रख दी गई थी. जब बॉबी ने अपने राजनैतिक दांव-पेच का इस्तेमाल करके लिंडन को डेमोक्रेटिक नॉमिनेशन से दूर रखा.
जिसने बॉबी को मारा, उस युवक का नाम सिरहान था. ऐसा कहा गया कि वो इजरायल को सपोर्ट देने के लिए बॉबी से नाराज था. इसी वजह से उसने ये हत्या की. वो अभी भी कैलिफॉर्निया की सन डिएगो जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है. पहले उसे मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन बाद में इसे उम्र कैद में बदल दिया गया था.

दाहिनी तरफ हैं JFK. साथ में हैं उनके भाई रॉबर्ट कैनेडी, बाईं तरफ. तीसरे शख्स हैं अडवर्ड कैनेडी. ये वाइट हाउस के ओवल ऑफिस के बाहर की तस्वीर है. ये तारीख थी 28 अगस्त, 1963 (फोटो: रॉयटर्स)
दूसरा गनमैन भी था RFK की हत्या की 50वीं बरसी होने के कारण ये मुद्दा अमेरिका में हॉट टॉपिक बना हुआ है. उनके बेटे रॉबर्ट कैनेडी जूनियर ने अमेरिकी संसद से अपने पिता की हत्या की नए तरीके से जांच कराए जाने की मांग की है. इसकी एक वजह उस दिन वहां एक और गनमैन मौजूद होने की थिअरी भी है. सिरहान के पास एवर जॉनसन कैडेट रिवॉल्वर थी, जिसमें आठ गोलियां होती थीं. वहां मौजूद लोगों ने 13 गोलियों की आवाज सुनने का दावा किया. इसका मतलब कहीं और से भी गोलियां चलीं. राबर्ट कैनेडी जूनियर ने भी इस ओर इशारा किया है. हत्या के बाद कहा गया था कि सिरहान ने बॉबी को उनके इजराइल के सपोर्ट की वजह से मारा और 5 जून की तारीख खासतौर पर चुनी. क्योंकि इसी दिन 1967 में इजरायल और अरब देशों का युद्ध शुरू हुआ था. हत्या के दिन इसकी पहली सालगिरह थी. मगर एक अकेला आदमी बॉबी जैसे कद्दावर नेता को, जिनके पास FBI के दिए हुए और अपने सुरक्षा गार्ड थे, को इतनी आसानी से मार सकता है, ये बात लोगों के गले नहीं उतरी. ऐसा लगा की किसी अदृश्य शक्ति ने इसे मोहरा बनाया. लोगों के जेहन में यह बात घर कर गई कि कैनेडी की हत्या में कोई गहरी साजिश है.

ये रॉबर्ट की हत्या वाली रात की तस्वीर है. उसी ऐंबैसडर होटल की, जहां उनका मर्डर हुआ. ये फोटो लिए जाने के कुछ ही मिनटों बाद उन्हें गोली मार दी गई थी (फोटो: AP)
गोलियां बहुत पास से मारी गईं उस दिन होटल की पैंट्री में 76 लोग थे. सारे चश्मदीदों ने कहा कि सिरहान बॉबी के सामने था और रिवॉल्वर की नली 2-3 फुट दूर थी. जबकि पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट में साफ- साफ लिखा था कि जिस गोली के घाव से मौत हुई, वो बंदूक उनकी कनपटी के 1-2 इंच से ज्यादा दूर नहीं थी. इसके अलावा गोली पीछे की तरफ से चलाई गई थी, जबकि सिरहान उनके सामने खड़ा था. सर के पीछे के घाव बहुत पास से चली गोली का इशारा कर रहे थे, जबकि इससे सिरहान के लोकेशन और दिशा का कोई तालमेल नहीं था. पुलिस की जांच के ऊपर अमेरिकी आबादी को ज्यादा भरोसा नहीं था. बहुत सारे सबूत जल्दी मिटाने के आरोप लगे. दो रहस्मय लोग, जिनको वहां लोगों ने देखा था, उनको खोजने की जहमत पुलिस ने नहीं उठाई. वहां मौजूद एक फटॉग्रफर का कैमरा सील कर लिया गया और उसमें से तस्वीरें मिटा दी गईं. कहते तो ये भी हैं सिरहान को इस घटना का कोई एहसास नहीं है. लोग कहते हैं कि उसको हिप्नोसिस के तहत हत्या के लिए प्रेरित किया गया. ये सारी बातें, कयासबाजियां आज भी होती हैं.

जो कैनेडी-III फिलहाल अमेरिकी संसद में अपने परिवार के प्रतिनिधि हैं. जो रॉबर्ट कैनेडी के बेटे जोसफ पी कैनेडी द्वितीय के बेटे हैं (फोटो: रॉयटर्स)
तो क्या होता? हम जब किसी दुखद घटना के बारे में सोचते हैं, तो दिल में आता है कि अगर ऐसा होता तो क्या होता. वैसा होता, तो क्या होता. क्या बॉबी अमेरिका के 37वें राष्ट्रपति बन जाते? क्या वो अपने बड़े भाई की विरासत को आगे बढ़ाते? क्या उन्होंने वियतनाम में युद्ध का अंत कर दिया होता? क्या बॉबी अपनी निष्पक्षता से अश्वेत अमेरीकियों को न्याय दिला पाते? इन सारे सवालों का कोई जवाब नहीं हो सकता. क्योंकि बॉबी को वक्त नहीं मिला. वो अर्लिंटन कब्रगाह में अपने भाई से 30 फुट की दूरी पर दफ़्न हैं. बॉबी के पोते अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव में कैनेडी परिवार के प्रतिनिधि हैं. वो भी अपने दादा की तरह वकालत पढ़े हैं और दादा की तरह ही मैसाचुसेट्स को रिप्रजेंट करते हैं. तो क्या ऐसा हो सकता है कि वो भी राष्ट्रपति बन जाएं? पता नहीं. पिछले सवालों की तरह ये सवाल नामुमकिन नहीं है. बस यही एक अच्छी बात है.
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