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रणदीप हुड्डा: जिसके आगे सलमान ख़ान भी एक्टिंग करता है

उसे देखकर महाभारत के कर्ण की याद आती है. क्योंकि उसके पास लुक्स का कवच और एक्टिंग का कुंडल है.

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फोटो - thelallantop
जबसे मॉनसून वेडिंग देखी है, मीरा नायर जी को दुआएं दे रहा हूं. सलाम बॉम्बे के लिए नहीं. द नेमसेक के लिए भी नहीं. दुआएं दे रहा हूं मुझे ये बताने के लिए कि मैन-क्रश बहुत बढ़िया चीज़ है.
https://www.youtube.com/watch?v=RUCiGqAHx4g
फिल्म में रणदीप हुड्डा को देखो. समझ जाओगे. फिल्म में रणदीप एक कच्चा सा अनाड़ी लड़का बना हुआ है. इतना अनाड़ी कि इंडिया आया एनआरआई होने पर भी अपने अंकल की डांट खाता रहता है. जिस लड़की को पसंद करता है, उसके साथ नाचना भी उसके लिए बहुत बड़ा चैलेंज है. आप नहीं समझेंगे, मगर मैं समझता हूं नाचना ना आना आपके चांसेज़ कितने कमज़ोर कर देता है. आज रणदीप हुड्डा का बड्डे है. बताता हूं कि क्यों आदमी मरते हैं रणदीप हुड्डा पे.

कैसे बना रणदीप हुड्डा 'डॉन'

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रणदीप का बचपन औरों से थोड़ा अलग था. पेरेंट्स मिडिल-ईस्ट में रह रहे थे. इस कारण वो अपनी दादी के साथ रहते थे. दादी भी सख़्त थी. 6 साल की ही उमर से उनकी मां उनके गले में Unaccompanied child का बिब डालकर फ्लाइट में बैठाती थीं. एक इंटरव्यू में रणदीप ने कहा था कि इसी वजह से वो बाद तक भी दोस्तों से उनके मां-बाप की मौजूदगी में मिलना पसंद नहीं करते थे. सोनीपत में जिस स्कूल में वो थे, वहां थिएटर करते थे. मगर अपनी ही तरह डॉक्टर बनाने के लिए पेरेंट्स ने उन्हें डीपीएस भेज दिया. गाइडेंस की कमी में वो गुस्सेबाज़ और रूखे नेचर के हो गए. छोटी ही उम्र से शराब और सिगरेट पीना, बंक मारना और डेट पर जाना शुरू हो गया. नतीजा ये हुआ कि उन्हें स्कूल फेयरवेल पर रणदीप 'डॉन' हुड्डा का टाइटल मिला. छोटी-मोटी गुंडई तो की लेकिन फिर उन्हें 'जाट' बॉय कॉम्प्लेक्स हो गया. पढ़ाई करने ऑस्ट्रेलिया गए तो पहले ही साल फ़ेल हो गए. ख़र्च निकालने के लिए और ज़िंदगी सीखने के लिए वेटर बने, कारें धोईं, बर्तन मांजे, और टैक्सी चलाई.

जिसके आगे भाई भी एक्टिंग करता है


जिसके आगे भाई भी एक्टिंग करता है, इमरान हाशमी जिसके आगे पानी भरता है, वो है रणदीप हुड्डा. 'जन्नत 2' में बंदा खीझा हुआ पुलिसवाला बना है. एसीपी प्रताप रघुवंशी. ये फिल्म मैंने केवल रणदीप हुड्डा के लिए देखी थी. फिल्म में हर बीस मिनट में पकड़ के इमरान को हड़का देता है. बंदे की पर्सनैलिटी को अच्छा इस्तेमाल किया है. 'किक' जैसी भी फिल्म है उसमें काम अच्छा किया है रणदीप ने. इस फिल्म में एक सीन है जहां भाई और रणदीप बैठकर शराब पी रहे हैं. ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि रणदीप को मैच करने के लिए भाई को भी अपना लेवल उठाना पड़ रहा है. 'सुल्तान' में भाई से शारीरिक वर्ज़िश करवाने से बहुत पहले रणदीप हुड्डा उनसे एक्टिंग जैसा चुनौतीपूर्ण काम करवा चुका था. जिस सरलता से रणदीप ये जोख़िम भरा काम कर देता है, वो लाजवाब है.

एंग्री यंग मैन 2.0 रणदीप हुड्डा

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'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुम्बई' में रणदीप ने एसीपी एग्नेल विल्सन का रोल किया. इसी फिल्म के साथ उसकी फ़िल्मों में दोबारा वापसी हुई थी. एक सीन में थाने में डॉन सुल्तान मिर्ज़ा के विल्सन को मात देने पर सब ऑफिसर ठिठोली कर रहे होते हैं. इतने में रणदीप हुड्डा अंदर आता है. एक ऑफिसर के चिढ़ाने पर उस ऑफिसर समेत पूरे थाने को ऐसी लताड़ देता है कि देखने वाला भी सिहर जाए. पूरी फिल्म में रणदीप ने एक हारे हुए पुलिस वाले की खीझ को बयां किया है कि क्या कहना. विल्सन जब सुल्तान मिर्ज़ा से उलझता है तो ज़ंजीर का अमिताभ बच्चन याद आता है. हर वक़्त प्राण से ऐंठता हुआ. ज़िद्दी, गुस्सेबाज़. मगर रणदीप के एंग्री यंग मैन में एक बर्फ़ीला तीख़ापन था. जैसा कि क्लिंट ईस्टवुड की स्पगैटी वेस्टर्न्स में होता था. इसके बाद हमारी सुस्त फिल्म इंडस्ट्री ने रणदीप हुड्डा को पुलिसवाला बनाना शुरू कर दिया. जन्नत 2 और किक का ज़िक्र मैं कर ही चुका हूं. इम्तियाज़ अली की 'हाईवे' में रणदीप ने किडनैपर का रोल किया. इस फिल्म ने उसकी मिट्टी को ख़ूब कुरेदा और ऑडियंस को बता दिया कि बॉलीवुड का अगला एंग्री यंग मैन कौन था.

रंगरसिया रील लाइफ, रंगरसिया रियल लाइफ

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2008 में केतन मेहता की 'रंग रसिया' नाम की फिल्म आई. इसमें राजा रवि वर्मा बने रणदीप और उनकी म्यूज़ बनी नंदना सेन. दोनों के इंटिमेट सीनों को लेके सेंसर बोर्ड ने खूब रोना मचाया. ऐसा लगा कि जैसे राजा रवि वर्मा प्रेम करना न जानते रहे हों. खूब खींचतान के बाद ये फिल्म इंडिया में 2014 में ही रिलीज़ हो पाई. ये फिल्म रणदीप हुड्डा के लिए ही नहीं, बल्कि हिंदी फिल्म के बहुत ज़रूरी है. असल ज़िंदगी में भी बहुतों के चहेते रहे हैं रणदीप. सुष्मिता सेन, नीतू चंद्रा, और अदिति राव हैदरी के साथ उनका नाम जुड़ चुका है. 'साहब, बीवी और गैंगस्टर' में माही गिल के लवर का रोल किया है. 'मर्डर 3' में दो हीरोइनों संग रोमांस किया है रणदीप ने. 'जिस्म 2' फिल्म तो कुछ ख़ास नहीं थी लेकिन उनके लुक्स का ख़ासा इस्तेमाल हो गया इसमें.

'लुक्स' वाला थिएटर एक्टर

Source- Wave Cinemas
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नसीर साब, इरफ़ान ख़ान, मनोज वाजपयी, नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी, और ओम पुरी के बारे में दो बातें फ़िल्में देखने वाला हर ऐरा-गैरा जानता है. पहली, कि ये सब थिएटर से फिल्म इंडस्ट्री में टपके हैं और इसलिए 'एक्टर' हैं. दूसरी बात अनकहा सच है कि थिएटर एक्टर कंवेंशनली हैंडसम नहीं हैं. ओम पुरी के गालों पर तो खड्डे भी थे. आवाज़ ऐसी कर्कश कि सोलो लीड भी सही ढंग के वो 'अर्ध सत्य' में ही बन पाए. एक बार याद है जब मैंने कहा था नवाज़ हैंडसम है तो आधे घंटे तक खिल्ली उड़ी थी मेरी. कितना भी लुक्स को ओवरलुक कर लो, मग़र इस देश में नैन-नक़्श का फ़रक पड़ता ही है. मगर रणदीप के लिए आप कंवेंशनल-अंकंवेंशनल सुंदरता की बहानेबाज़ी नहीं कर सकते. उस पर एक्टिंग और लुक्स दोनों ही मेहरबान हैं.
फिल्म इंडस्ट्री में उसे देखकर महाभारत के कर्ण की याद आती है. क्योंकि उसके पास लुक्स का कवच और एक्टिंग का कुंडल है. कुंडल आप निहारते रह जाते हैं और कवच से धराशायी हो जाते हैं. उसके चेहरे पर क़ुदरती एक टैनिंग सी है. जो उसकी शरारती मुस्कान को और सिडक्टिव बना देती है. वो 'सरबजीत' में हड्डियों का ढांचा है और 'दो लफ़्ज़ों की कहानी' में हट्टा-कट्टा एमएमए फाइटर. ऑफ़-स्क्रीन वो घुड़सवार लगता है और 'मैं और चार्ल्स' में बिलकुल स्वॉव और स्मूद ठग.
रणदीप हुड्डा की सबसे प्यारी बात यही लगती है कि वो मसाला बॉलीवुड को भी अपने अलग इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स से करता है. मेरी नज़र में वो सैय्यद जाफ़री और कबीर बेदी से बहुत आगे निकल गया है.
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स्टारडम अजीब चीज़ है. किसी के लिए इसका होना ज़रूरी है, किसी के लिए इसका न होना ज़रूरी है. न होना ज़रूरी इसलिए है क्योंकि स्टारडम की झीनी चमकीली परत को आप खुरचते नहीं. जब वो परत नहीं होती, अंदर का पत्थर अपने आप दिखता है. वही पत्थर रणदीप हुड्डा है. अगर आप अब तक उसकी कीमत नहीं जान पाए हैं, तो चिंता ना करें. वो हर फिल्म में, हर साइड-रोल में अपनी बेहिसाब घिसाई करवा रहा है. वो एक दिन चमकेगा भी, और पैना होकर आप के दिल के आर-पार हो जाएगा.


ये स्टोरी टीम दी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रहे प्रणय ने लिखी है. 




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