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पद्म पुरस्कार लेने का ऐसा अंदाज पहले नहीं देखा होगा, जो मंजम्मा जोगती ने राष्ट्रपति के सामने दिखाया!

कौन हैं पद्म पुरस्कार पाने वाली मंजम्मा जोगती?

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पद्म पुरस्कार समारोह के दौरान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और मंजम्मा जोगती. (तस्वीरें- एएनआई और पीटीआई)
राष्ट्रपति भवन में मंगलवार 9 नवंबर को भी पद्म पुरस्कार दिए गए. इस बार 119 लोगों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा जा रहा है. इनमें केवल एक ट्रांसजेंडर अवॉर्डी है. मंजम्मा जोगती. 9 नवंबर को हुए समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कर्नाटक की मंजम्मा जोगती को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया. वो कर्नाटक जनपद अकादमी की पहली ट्रांसजेंडर अध्यक्ष हैं. सोशल मीडिया पर मंजम्मा जोगती के अवॉर्ड लेने के अंदाज की काफी चर्चा है. दरअसल जब मंजम्मा को पद्मश्री पुरस्कार लेने के लिए बुलाया गया, तो उन्होंने एक अलग ही स्टाइल में राष्ट्रपति कोविंद से ये पुरस्कार प्राप्त किया. पहले उन्होंने दरबार हॉल की जमीन को छुआ. फिर उन्होंने अपनी साड़ी का पल्लू राष्ट्रपति कोविंद की तरफ किया. और इसके बाद झुककर उनके प्रति सम्मान प्रकट किया. इस लम्हे का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है. आप भी देखिए.

कौन हैं मंजम्मा जोगती?

18 अप्रैल 1964 को कर्नाटक के बेल्लारी में जन्मीं मंजम्मा जोगती कन्नड़ थियेटर एक्ट्रेस, गायिका और जोगती नृत्य की डांसर हैं. 'जोगती' नृत्य दरअसल कर्नाटक का एक फोक डांस फ़ॉर्म है. मंजम्मा जोगती ने इस नृत्य और जनपद गीतों सहित कई कला रूपों में महारत हासिल की हुई है. उन्हें देवी-देवताओं की स्तुति में कन्नड़ में मंत्रमुग्ध करने वाले नृत्य के लिए भी जाना जाता है. ऐसा माना जाता है इसे करने से देवी ख़ुश होती हैं. मंजम्मा जोगती एक ट्रांस महिला हैं. लेकिन बचपन से ही उनकी पहचान एक महिला के रूप में देखी जाती रही है. उनका परिवार उन्हें बचपन से ही हुलेगेयम्मा मंदिर ले जाता रहा है. वहीं उन्होंने जोगप्पा के रूप में दीक्षा ली है. जोगप्पा ट्रांस लोगों का एक समुदाय है जो ख़ुद को देवी रेणुका येलम्मा की सेवा के लिए समर्पित करते हैं. लोककथाओं में ऐसा माना जाता है कि जो भी जोगप्पा समुदाय से ताल्लुक़ रखता है वो सभी सदस्य देवी से विवाहित होते हैं. बहरहाल, मंजम्मा जोगती ने अपने पैतृक गांव से 10वीं तक की पढ़ाई की. किशोरावस्था आते-आते परिवार ने उनका बहिष्कार कर दिया था. जाहिर है बतौर ट्रांसजेंडर उनका जीवन संघर्षपूर्ण रहा. वो कहती हैं कि बतौर ट्रांसजेंडर उन्हें अपनी पहचान बनाने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. लेकिन मंजम्मा ने हार नहीं मानी. खराब आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद वो काम करती रहीं और अपनी पहचान के साथ आगे बढ़ती गईं. वे अब तक कई कार्यक्रमों में अपने नृत्य का प्रदर्शन कर चुकी हैं. 2010 में उन्हें प्रतिष्ठित कर्नाटक राज्योत्सव पुरस्कार भी मिल चुका है. साल 2019 में मंजम्मा जोगती कर्नाटक जनपद अकादमी की पहली ट्रांसजेंडर अध्यक्ष बनीं. 72वें गणतंत्र दिवस के मौक़े पर भारत सरकार ने नृत्य कला के क्षेत्र में अहम योगदान देने के लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की थी.

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