आपका पोस्ट 19 जनवरी को ही फेसबुक के माध्यम से प्राप्त हो गया था. 12 बजकर 55 मिनट पर. उसमें आपने लिखा था- अगर हर संभव कोशिश के बाद भी, पद्मावत मूवी नहीं रुकी तो मां पद्मावती की सौगंध, रिलीज डेट के दिन ही फेसबुक लाइव पर आत्मदाह कर लूंगा. पोस्ट का स्क्रीनशॉट नीचे दे रहा हूं. इसके पांच हजार के करीब शेयर हो चुके हैं.

शेयर्स देखो, जी खुश हो जाएगा
आपने फेसबुक लाइव के माध्यम से भी सेम टू सेम बात बताई थी. उसका भी लिंक दे देता हूं. फिर अपनी बात आपके समक्ष रखूंगा.
अब जबकि आज 25 जनवरी हो गई है. गणतंत्र दिवस को मात्र एक दिन शेष है. पद्मावत रिलीज हो गई है. आई हटाकर. तब भोर में हमें आपकी बड़ी याद आई. हम अपने टीवी में मल्टी चैनल लगाकर सारे न्यूज चैनल देख रहे थे. कलेजा कांप रहा था. अब उपदेश भाई नहीं बचेंगे. पता नहीं किसी उचक्के ने भावुक उपदेश भाई को पेट्रोल न दे दिया हो. कोई चिरकुट राजपूत माचिस लेने न चला गया हो. कुछ दोस्त मोबाइल में जियो नेट ऑन कर रहे होंगे. पूरा हादसा फेसबुक पर लाइव करने के लिए. पता नहीं कितने परसेंट बर्न होगा. यहां बर्न हॉस्पिटल भी अच्छे नहीं हैं. हे भगवान अब क्या होगा?
लेकिन प्रसन्न मन से ये पत्र लिख रहा हूं. आपकी समझदारी की दाद देता हूं. अभी तक आपकी कोई जले भुने की तस्वीर या वीडियो नहीं आई है. इनफैक्ट आपका मुंह ही नहीं दिखा है भाईसाब. ऊपर वाले का लाख लाख शुक्र है अक्ल आ गई. आपने अपनी जान नहीं ली. पेट्रोल का खर्च बचा लिया. इससे कितना नुकसान होने से बच गया, आपको अंदाजा नहीं है. आपके लाखों चिलुए हैं. आपकी इस बहादुरी से वो भी मोटिवेट हो सकते थे. तो पता नहीं कितने घर उजड़ जाते. दुनिया जानती है कि राजपूत अपनी जबान का पक्का होता है. लेकिन अगर आपकी तरह कच्चा हो तो भी कभी कभी देश का फायदा हो सकता है, ये देश ने देख लिया है. बेवकूफी और बहादुरी में फर्क वाली कहावत सुनी तो बहुत थी लेकिन आपने उसे बिल्कुल सही से करके दिखाया.

वीर उपदेश राणा
इतनी समझदारी तो आपके अंदर आ गई. कि किसी टुच्चे से काम के लिए अपनी जिंदगी से खेलना अच्छा नहीं है. अब बस थोड़ी सी समझदारी और चाहिए. दूसरों की जान से भी न खेलो. किसी के लिए परेशानी का सबब न बनो. आपको पता है आपकी तरह के कुछ रणबाकुंरो ने स्कूल बस पर हमला कर दिया. ईंट पत्थर चला दिए. बिरादरी का इतिहास बचाने के लिए देश के भविष्य की जान ले रहे थे. आपके चिलुए गुंडों ने सिनेमाघरों में तोड़फोड़ की. जहां पद्मावत लगने वाली भी नहीं थी. उन गुंडों ने कितनी गाड़ियां फूंक दीं, कितनी दुकानें जला दीं. कितनों की जिंदगी मुश्किल में डाल दी. आपने अपनी तो बचा ली, लेकिन जिनकी बरबाद की है उसका गुनाह आपके माथे पर है राणा साहब. करणी सेना के गुंडे, लोकेंद्र कालवी, उपदेश राणा और वो जो न्यूज चैनलों पर सौ ग्राम का करणी सेना का प्रवक्ता आता है, सब दोषी हैं.
जहां अपनी बात से मुकर गए हो तो अब थोड़ा शांत भी हो जाओ. इतना आग न मूतो यार. सुप्रीम कोर्ट, राज्यों की सरकारें, केंद्र सरकार सब तुम्हारे आगे हाथ जोड़े खड़े हैं. उनकी लाज रखो. रोजगार करो यार. चार पइसा कमाओ. इज्जत की रोटी खाओ.
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