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अहमद शाह अब्दाली की क्रूरता और सिंधिया परिवार के राजसी शिवलिंग की असली कहानी ये है

पानीपत की लड़ाई में हार के बाद सिंधिया परिवार के 16 पूर्वजों के सिर कलम कर बरछे पर सजा दिए गए थे. सिर्फ महादजी शिंदे बचे, वो भी कटे हुए पैर के साथ.

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बाएं: अहमद शाह अब्दाली, जिसने पानीपत का तीसरा युद्ध जीता. दाएं: महादजी शिंदे, जिनकी पगड़ी में शिवलिंग होने के चलते उनके जीवित बच जाने की बात कही जाती है. (तस्वीरें: विकिमीडिया कॉमन्स))

रशीद किदवई ने एक किताब लिखी. The House of Scindias. इस किताब में  सिंधिया परिवार का 300 साल का सफ़र बताया गया है. मतलब सिंधिया खानदान के बनने और देश की राजनीति में आने तक का सफ़र. इसमें महल और संपत्ति को लेकर साज़िशों और झगड़ों के किस्से तो हैं ही, साथ में एक शिवलिंग का ज़िक्र भी है. मान्यता है कि राजपरिवार में एक छोटा दिव्य शिवलिंग है, जिसमें ‘शक्तियां’ निहित हैं. जिसके पास शिवलिंग होगा, उसके साथ ये शक्तियां भी होंगी. सिंधिया परिवार के हालिया प्रमुख हैं ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो केंद्र की मोदी सरकार में नागर विमानन एंव इस्पात मंत्री भी हैं. उनका कहना है कि वाकई ऐसा शिवलिंग मौजूद है. वो कहते हैं, 

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''यह अंतरात्मा की एक भावनात्मक कहानी है.''

उन्होंने शिवलिंग को लेकर मान्यता से जुड़ी एक कहानी भी सुनाई, जिसका ताल्लुक पानीपत की तीसरी लड़ाई से है. बकौल ज्योतिरादित्य, पानीपत की तीसरी लड़ाई में अहमद शाह अब्दाली की फौज ने उनके 16 पूर्वजों के सिर काटे थे. इन्हें बरछों पर लगाकर परास्त मराठा फौज के सामने परेड करवाई गई थी. ज्योतिरादित्य ने आगे कहा, 

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“14 जनवरी 1761 को पानीपत की तीसरी लड़ाई हुई. इस लड़ाई में सिंधिया परिवार के केवल एक पूर्वज बचे, जिनका नाम था महादजी शिंदे. वो भी लड़ाई में लहुलुहान हुए थे. उनका पैर कट गया था. रणभूमि में गिरे हुए पड़े थे. हमारी जैसी मराठी पगड़ी होती है, वैसी ही महादजी शिंदे ने भी पहनी थी. इस पगड़ी में हमारा शिवलिंग था. पैर कटा होने के बावजूद महादजी के प्राण बच गए.”

ज्योतिरादित्य आगे बताते हैं कि लड़ाई के 10 साल के अदंर महादजी शिंदे ने अपने जेवर, अपनी मां और पत्नी के जेवर बेचकर दोबारा मराठा सेना खड़ी की. और 10 फरवरी 1771 में उन्होंने लाल किले पर भगवा ध्वज फहराया. ऐसा करने वाले वो पहले हिंदू शासक बने थे. और उनके शासन में मराठा साम्राज्य आधुनिक अफगानिस्तान से लेकर पूर्वांचल तक फैला हुआ था. तो शिवलिंग की कहानी में सत्यता है. जब सिंधिया से ये पूछा गया कि क्या इसी शिवलिंग को लेकर उनके पिता माधवराव सिंधिया और दादी राजमाता सिंधिया के बीच विवाद हुआ था, तो उन्होंने कहा,

“यह कहानी अतीत का एक भाग है. और शिवलिंग परिवार में ही है.”

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यह सारी बातें ज्योतिरादित्य ने कहीं दी लल्लनटॉप की पॉलिटिकल इंटरव्यूज़ की सीरीज़ जमघट में. आप पूरा इंटरव्यू यहां देख सकते हैं- 

जमघट: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने PM मोदी, राहुल गांधी और 'तहखाने' पर क्या बताया?

वीडियो: जमघट: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने PM मोदी, राहुल गांधी और 'तहखाने' पर क्या बताया?

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