The Lallantop

तेल के कुओं वाला सऊदी अरब पानी का जुगाड़ कहां से करता है?

हां पता है समुद्र से करता है, मगर कैसे?

Advertisement
post-main-image
सउदी अरब का पड़ोसी देश यूएई आर्टिफिशियल बारिश पर खूब निवेश कर रहा है. (सोर्स-रॉयटर्स)
14 सितंबर की सुबह सऊदी अरब में दो ड्रोन हमले हुए. निशाने पर थी अरामको. दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी. अरामको की एक रिफाइनरी और एक ऑयल फील्ड पर ड्रोन हमले हुए. आज की डेट में ऑयल हमारी सभ्यता को चलाने वाले सबसे इंपॉर्टेंट फ्यूल्स में से एक है. लेकिन जैसे मशीनों को चलने के लिए ऑयल की ज़रूरत होती है, मानव शरीर के चलते रहने के लिए पानी बहुत ज़रूरी है.
सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल एक्सपोर्टर
देश है. मगर आयरनी देखिए कि तेल के बेशुमार भंडार होने के बावजूद उसे पानी के लिए बहुत मगजमारी करनी पड़ती है.
सिर्फ दक्षिण-पश्चिम का इलाका ऐसा है जहां थोड़ा हरा भरा दिख रहा है. (सोर्स - विकीमीडिया)
सिर्फ दक्षिण-पश्चिम का इलाका ऐसा है जहां थोड़ा हरा भरा दिख रहा है. (सोर्स - विकीमीडिया)

गूगल मैप के सैटेलाइट व्यू में सऊदी को देखें तो पूरे नक्शे पर रेगिस्तान ही पसरा नज़र आता है. सऊदी अरब में कोई परमानेंट नदी नहीं बहती. कोई बड़ा तालाब नहीं. और बारिश तो ऐसे बेमन से आती है, जैसे 'मिलेनियल्स कार लेते हैं'
.
पानी के लिए सऊदी दो ही विकल्पों की ओर ताकता है.
>पहला विकल्प है - ग्राउंडवाटर. >और दूसरा है - सॉल्ट वाटर.

'नीचे तो देखो' - ग्राउंडवाटर

पूरी दुनिया में ग्राउंडवाटर का स्तर गिरता जा रहा है.
पूरी दुनिया में ग्राउंडवाटर का स्तर गिरता जा रहा है.

सऊदी के भूभाग पर ग्राउंडवाटर ही इकलौता पानी का स्त्रोत है. ग्राउंडवाटर यानी ज़मीन के भीतर मिलने वाला पानी. वही वाला जो ट्यूबवेल से निकलता है. अब इस पानी रिचार्ज होने के लिए ठीक-ठाक बारिश की ज़रूरत होती है. सऊदी में साल की जो इक्की-दुक्की बारिश होती है, वो ग्राउंडवाटर रिचार्ज में नाकाबिल है. नतीजा ये कि सऊदी के ग्राउंडवाटर का स्तर बहुत तेज़ी से नीचे जा रहा है.
ग्राउंडवाटर के नीचे ढुलकने की एक वजह सऊदी की एक पुरानी नीति भी है. 70 के दशक में सऊदी की सरकार ने लोगों को खेती के लिए प्रोत्साहित किया. लोगों ने धड़ाधड़ कुएं खोदे, खूब पानी निकाला और गेंहू के लहराते हरे खेत खड़े कर दिए.
ये सऊदी में हरित क्रांति का दौर था. जल्द ही सऊदी दुनिया में गेंहू का छठा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बन गया. प्लान था कि रेगिस्तान को हरे मैदान में बदल देना है. लेकिन गेंहू की फसल ज़मीन का पानी गटक गई. और 2008-09 आते-आते काफी सारे कुंए सूख गए.

'समंदर में नहा के और भी...' - सॉल्ट वाटर

पूरे मिडिल-ईस्ट में सबसे ज़्यादा खारे पानी से मीठा पानी बनाता है सउदी अरब. (सोर्स - पुकार)
पूरे मिडिल-ईस्ट में सबसे ज़्यादा खारे पानी से मीठा पानी बनाता है सऊदी अरब. (सोर्स - पुकार)

पानी के लिए सऊदी अपनी ज़मीन के भीतर झांकने के अलावा बगल में भी झांकता है. सऊदी की सीमा दो साइड से हिंद महासागर के टच में है. पश्चिम में लाल सागर है. और पूर्व में है खंबात की खाड़ी.
सऊदी अरब को पीने का पानी चाहिए. लेकिन समंदर होता है नमकीन. सॉल्ट वाटर यानी खारा पानी स्वाद में तो खराब होता ही है, लेकिन इसे पीना इंसानों की सेहत के लिए भी ठीक नहीं है. जब हम खारा पानी पीते हैं तो उसे सूसू के साथ बाहर निकालने के लिए हमारे अंदर का साफ पानी भी खर्च हो जाता है. इसी को डॉक्टर्स डीहाइड्रेशन कहते हैं. यूं समझिए -
अगर शरीर में पानी रखना किसी एग्ज़ाम का स्कोर है तो खारा पानी माइनस मार्किंग है.

स्वादानुसार नमक

सऊदी ने सॉल्ट वाटर को पीने लायक बनाने के लिए डीसेलीनेशन प्लांट्स बना रखे हैं. डीसेलीनेशन मतलब सॉल्ट हटाना. खारे पानी को मीठा यानी पीने लायक बनाना. डीसेलीनेशन की दो तरीके बहुत पॉपुलर हैं -
1. हम पानी को बहुत बारीक छन्नी से निकालें. जिससे नमक पीछे छूट जाए और साफ पानी आगे निकल जाए. लेकिन ऐसा करने के लिए हमें पानी पर प्रेशर बहुत ज़्यादा देना होगा. उतना प्रेशर, जितना स्कूल में बच्चों पर मैथ्स-बायो चुनने का होता है.
पानी उबल कर भाप बनता है, ये वेपोराइज़ेशन है. भाप ठंडी होकर पानी बनती है, ये कंडेन्सेशन है.
पानी उबल कर भाप बनता है, ये वेपोराइज़ेशन है. भाप ठंडी होकर पानी बनती है, ये कंडेन्सेशन है. (सोर्स-विकिमीडिया)

2. हम पानी को गर्म करें. गर्म करने से नमक नीचे रह जाएगा और साफ पानी भाप बनकर ऊपर की ओर जाएगा. इस भाप को कहीं इकट्ठा करके वापस इसको पानी बना लेंगे.

डीसेलीनेशन के सैलानी

डीसेलीनेशन का इतिहास एरिस्टोटल जितना पुराना है. एरिस्टोटल ने कुछ मेंब्रेन्स यानी छन्नियों के एक अरेंजमेंट के बारे में सोचा था, जिससे खारे पानी को पीने लायक बनाया जा सके. हालांकि डीसेलीनेशन का प्रैक्टिकल इस्तेमाल दूसरी शताब्दी के आसपास शुरू हुआ. तब समुद्र में जाने वाले नाविकों ने पीने के लिए समुद्र का पानी उबालना शुरू किया. आगे चलकर यही उबालने वाला तरीका ज़्यादा प्रचलित हुआ.
पानी को उबालकर भाप बनाकर वापस पानी बनाने की ये प्रोसेस जब बड़े लेवल पर की जाती है, तो उस प्रोसेस को थर्मल डीसेलीनेशन कहते हैं. थर्मल मतलब वो प्रोसेस जिसमें आग का इस्तेमाल हो. और आग मतलब ऊर्जा, एनर्जी. यानी थर्मल डीसेलीनेशन को चाहिए भारी निवेश.
डीसेलीनेशन के बाद नमक वाला हिस्सा वापस समंदर में जाता है. ये दिक्कत वाली बात है. (सोर्स - रॉयटर्स)
डीसेलीनेशन के बाद नमक वाला हिस्सा वापस समंदर में जाता है. ये दिक्कत वाली बात है. (सोर्स - रॉयटर्स)

थर्मल डीसेलीनेशन में ऊर्जा और पैसों की खपत होती. इसी वजह से छानने वाला तरीका जगह बना पाया. एरिस्टोटल का तरीका एक कल्पना भर था. उसे डेवलप नहीं किया गया था. लेकिन 50 के दशक में छानने के तरीकों पर रिसर्च तेज़ हुई. और जन्म हुआ रिवर्स ऑसमोसिस की तकनीक का. रिवर्स ऑसमोसिस. ये नाम सुनकर शायद आपके दिमाग की बत्ती न जले. लेकिन इसका शॉर्ट फॉर्म आपने ज़रूर सुना होगा.
RO
आपके दिमाग में अब टीवी का ऐड चलने लगा होगा. वही जिसमें मथुरा से BJP सांसद और फिल्म एक्ट्रेस साफ पानी लिए खड़ी हैं. RO का इस्तेमाल सिर्फ हमारे घरों में पानी साफ करने के लिए नहीं होता, बड़े लेवल पर भी होता है. लेकिन समुद्र जितना खारा पानी साफ करने के लिए अच्छा खासा प्रेशर बनाना होगा. बच्चों पर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने जितना प्रेशर. और इस प्रेशर के लिए भी ज़रूरी होती है ऊर्जा.

पानी तेल की तरह पैसा बहाना

RO वाले डीसेलीनेशन के लिए जो ऊर्जा चाहिए होती है वो थर्मल डीसेलीनेशन से काफी कम होती है. लेकिन फिर भी ऊर्जा के इस्तेमाल में खर्चा तो होता ही है. और इस ऊर्जा का खर्चा कोई तेल वाला देश ही उठा सकता है. उदाहरण के लिए सऊदी अरब.
नक्शे पर सोलह लोकेशन और एक प्लांट की तस्वीर. (सोर्स - रॉयटर्स)
नक्शे पर प्लांट्स की लोकेशन और एक प्लांट की तस्वीर. (सोर्स - रॉयटर्स)

सऊदी ने अपने समुद्रतट की 17 लोकेशन्स पर कुल 27 डीसेलीनेशन प्लांट्स बनाए हैं. इनमें से 21 प्लांट्स पश्चिमी तट पर हैं और 6 पूर्वी तट पर. दुनिया का सबसे बड़ा डीसेलीनेशन प्लांट सऊदी अरब के रास अल खैर में ही है.
पूरी दुनिया में करीब 18,000 से ज़्यादा डीसेलीनेशन प्लांट्स हैं. और इन डीसेलीनेशन प्लांट्स के कुल उत्पाद का लगभग आधा हिस्सा मिडिल-ईस्ट से आता है. मिडिल-ईस्ट जहां पानी का सबसे ज़्यादा खतरा मंडरा रहा है.

मेरे देश की धरती?

एक और जगह है जहां पानी खतरा बिल्कुल सिर पर है. और उस जगह का नाम है भारत. भारत में ग्राउंडवाटर लेवल डरावनी स्पीड से घट रहा है. हमनें इसी साल के जून में भयंकर जल-संकट देखा है.
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले साल तक भारत के 21 शहरों में ग्राउंडवाटर ख़त्म हो जाएगा.
नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगले साल तक भारत के 21 शहरों में ग्राउंडवाटर ख़त्म हो जाएगा.

हमें चेन्नई की उन प्यासी तस्वीरों को नहीं भूलना चाहिए. हमें नहीं भूलना चाहिए नीति आयोग की रिपोर्ट को, जिसके मुताबिक, साल 2030 तक देश की 40 फीसदी आबादी के पास पीने का पानी नहीं होगा.


वीडियो - सऊदी अरामको पर हुआ ड्रोन अटैक कैसे भारत में डीज़ल-पेट्रोल की कीमतों पर बुरा असर डालने वाला है?|Episode 304

Advertisement
Advertisement