पश्चिम बंगाल का एक बड़ा हिस्सा पड़ोसी देश बांग्लादेश से लगता है. इसी सीमारेखा पर एक जिला है- नादिया. इसी नादिया में मौजूद कुछ विधानसभाओं को मिलाकर एक लोकसभा बनती है कृष्णानगर. साल 2019 में इस सीट पर जब लोकसभा चुनाव होने थे, तो राज्य में पावर सम्हाल रही तृणमूल कांग्रेस एक अदद उम्मीदवार की तलाश में थी. क्योंकि दो टर्म से बांग्ला सिनेमा के नायक तापस पॉल इस सीट पर TMC की ओर से सांसद थे, और वो विवादों के चलते राजनीति और पार्टी से दूर हो रहे थे.
महुआ की सांसदी पर लटक रही तलवार, एथिक्स कमिटी की मीटिंग में क्या हुआ?
महुआ की सांसदी जाएगी या नहीं इसके बारे में आने वाले शीतकालीन सत्र में पता चलेगा.


पार्टी की निगाह गई 10 साल पहले ही पार्टी में आई एक महिला नेता पर. उसकी पढ़ाई विदेश की थी, और वो विदेशी बैंकों में नौकरी कर चुकी थी. बाद में राहुल गांधी की टीम में काम कर चुकी थी. और साल 2016 में इसी नादिया जिले की करीमपुर विधानसभा से विधायक चुनी गई थी. वो बोलने और बयान देने में तेज थी. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की नजर लंबे समय से इस नेता पर थी. नेता का नाम- महुआ मोइत्रा. पार्टी ने महुआ को कृष्णानगर लोकसभा का टिकट महुआ को दे दिया.
महुआ ने चुनाव लड़ा. उनके प्रमुख प्रतिद्वंदी थे भाजपा के कल्याण चौबे. कल्याण ईस्ट बंगाल और मोहन बागान जैसी टीमों के साथ फुटबाल खेल चुके थे. बंगाल का जाना पहचाना नाम थे. महुआ को मिले 6 लाख 14 हजार वोट. उन्होंने कल्याण चौबे को लगभग 64 हजार वोटों के अंतर से हरा दिया था.
जीत के बाद महुआ जब लोकसभा पहुंचीं. तो उनके भाषण वायरल होना शुरू हुए. उनके निशाने पर रही केंद्र की भाजपा सरकार. और उद्योगपति गौतम अडानी. उनके भाषण यूट्यूब और सोशल मीडिया पर लाखों लोगों ने देखे. TMC को अपना युवातुर्क मिल गया था.
लेकिन साल 2023 का अवसान आते-आते महुआ मोइत्रा की सांसदी खतरे में पड़ गई. क्यों? क्योंकि उन पर संसद की एथिक्स कमिटी की जांच बैठी. जांच किस बात की? मामला विस्तार से आगे समझाएंगे. अभी छोटे में जानिए कि महुआ मोइत्रा पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने लोकसभा वेबसाइट की अपनी लॉगिन डीटेल अपने दोस्त दर्शन हीरानंदानी को दी. और पैसे लेकर अडाणी पर सवाल पूछे. इस मामले को लेकर पूछताछ हुई. और तैयार हुई एक ड्राफ्ट रिपोर्ट. ये ड्राफ्ट रिपोर्ट सबसे पहले आई NDTV पर, जिसे साल 2022 में अडाणी समूह ने खरीद लिया था. रिपोर्ट का सार ये कि लोकसभा स्पीकर से डिमांड की जाएगी कि महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित किया जाए. फिर 9 नवंबर को इंडियन एक्सप्रेस समेत दूसरे अखबारों ने भी छापा.
फिर 9 नवंबर के दिन एथिक्स कमिटी एक बार फिर से बैठी. जो एक दिन पहले ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार की गई थी. उस ड्राफ्ट रिपोर्ट को अडाप्ट किया जाना था. इसके लिए वोटिंग होनी थी. और वोटिंग में 6 बनाम 4 के बहुमत से इस रिपोर्ट को अडैप्ट कर लिया गया.
किसने इस रिपोर्ट के पक्ष में वोट किया, किसने विपक्ष में?
पक्ष में वोट करने वाले सदस्य -
विनोद सोनकर, भाजपा सांसद, एथिक्स कमिटी के चेयरमैन
राजदीप रॉय, भाजपा सांसद
सुमेधानंद सरस्वती, भाजपा सांसद
प्रणीत कौर, लोकसभा सांसद (उन्हें फरवरी 2023 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए कांग्रेस ने निलंबित कर दिया गया था)
हेमंत गोडसे, शिवसेना सांसद
अपराजिता सारंगी, भाजपा सांसद
विपक्ष में वोट करने वाले सदस्य
दानिश अली, बसपा सांसद
वी वैथिलिंगम, कांग्रेस सांसद
पीआर नटराजन, सीपीआई (मार्कसिस्ट) सांसद
गिरधारी यादव, जदयू, सांसद
इसके अलावा पांच सदस्यों ने वोट नहीं किया -
बालाशोरी वल्लभानेनी, कांग्रेस सांसद
एन उत्तम कुमार रेड्डी, कांग्रेस सांसद
सुभाष भामरे, भाजपा सांसद
सुनीता दुग्गल, भाजपा सांसद
वीडी शर्मा, भाजपा सांसद
लेकिन जिन सांसदों ने विरोध में वोट किया, उन्होंने कमिटी पर आरोप लगाये. कांग्रेस सांसद वी वैथिलिंगम ने कहा कि एथिक्स कमिटी में रिपोर्ट पर बहस नहीं की गई. बस वोटिंग की गई. इस पर बहस की जानी चाहिए थी. अब जानते हैं कि एथिक्स कमिटी के अंदर क्या हुआ, जहां से महुआ की सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव आया.
अब संक्षेप में जानते हैं कि केस क्या है.
तारीख 15 अक्टूबर 2023. झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक शिकायती पत्र लिखा. दुबे ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ससंद में अडानी समूह के खिलाफ सवाल पूछने के लिए पैसे लेती हैं. लिहाजा उन्हें लोकसभा से सस्पेन्ड कर दिया जाए और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच की जाए.
निशिकांत दुबे ने कहा कि बिजनेस ग्रुप हीरानंदानी समूह को अडानी ग्रुप की वजह से एनर्जी और इंफ़्रास्ट्रक्चर से जुड़ा एक बड़ा कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिल पाया. साथ ही अडानी समूह और हीरानंदानी समूह कांट्रैक्ट पाने के लिए देश के कई इलाकों में एक दूसरे के खिलाफ बोली लगाते हैं. यानी दोनों समूहों में तगड़ा कॉम्पिटिशन है. और दुबे के आरोपों को ट्रांसलेट करें तो लगता है कि दर्शन हीरानंदानी ने खार खाकर महुआ मोइत्रा को पैसे दिए कि वो लोकसभा में अडानी को लेकर सवाल उठाएं. लेकिन ये आरोप हैं.
निशिकांत दुबे ने बस यही एक चिट्ठी नहीं लिखी थी. 15 अक्टूबर को ही उन्होंने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी राज्यमंत्री राजीव चंद्रशेखर के नाम भी एक चिट्ठी लिखी. इस चिट्ठी में निशिकांत दुबे ने कहा कि महुआ मोइत्रा ने दर्शन हीरानंदानी को अपना लोकसभा वेबसाइट का लॉगिन, आईडी पासवर्ड दे दिए. फिर निशिकांत दुबे ने मांग रखी कि आईटी मंत्रालय महुआ मोइत्रा की लॉगिन आईडी की जांच करे. और पता लगाए कि क्या उनका लोकसभा अकाउंट किसी ऐसी जगह से चलाया गया, जहां वो खुद मौजूद नहीं थी?
इन आरोपों पर महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर उसी दिन जवाब दिया था. एक्स (पहले ट्विटर) पर महुआ ने लिखा था, "फर्जी डिग्री वालों के साथ भाजपा के अन्य सांसदों के खिलाफ भी बहुत सारे ब्रीच ऑफ प्रिविलिज के मोशन संसद में पेंडिंग हैं. मेरे खिलाफ किसी भी मोशन का स्वागत है, अगर स्पीकर उनकी जांचों को पूरा कर लें. और इस बात का भी इंतजार है कि ईडी और दूसरी एजेंसियां मेरे दरवाजे पर आने के पहले अडानी कोयला घोटाले में FIR दर्ज करेंगी."
उन्होंने ये भी लिखा कि शायद ही कोई सांसद अपना लोकसभा का पोर्टल खुद चलाता हो. उसे ऑपरैट करने के लिए उसके पास बहुत सारे स्टाफ और सहकर्मी होते हैं.
आरोपों लगने के दो दिन बाद यानी 17 अक्टूबर को महुआ मोइत्रा दिल्ली हाई कोर्ट चली गईं. निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई और कई मीडिया संगठनों के खिलाफ मानहानि का केस कर दिया. हालांकि कुछ ही दिनों बाद उन्होंने मीडिया संस्थानों के खिलाफ किया केस वापिस ले लिया.
बहरहाल, निशिकांत दुबे ने जिस दिन यानी 15 अक्टूबर को ये आरोप लगाए थे, उसी दिन देहाद्राई ने भी TMC सांसद के ख़िलाफ़ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) में एक हलफ़नामा भी दायर किया था. दुबे ने अपने पत्र में कहा था कि महुआ के खिलाफ उन्हें ये सबूत देहाद्राई ने ही दिए. आज हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान देहाद्राई ने बताया कि उन्हें सीबीआई की शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया और इसके लिए महुआ मोइत्रा के वकील गोपाल शंकरनारायण ने 19 अक्टूबर को उन्हें फोन किया.
कौन हैं ये देहाद्राई? खबरों में इन्हें महुआ का खास दोस्त बताया जा रहा है, जिनकी महुआ से दोस्ती टूट चुकी है. उनकी लिंक्डइन प्रोफ़ाइल पर लिखा है कि उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से ग्रैजुएशन किया, फिर पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय से कानून में पोस्ट-ग्रैजुएशन की. तब से उन्होंने पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नाडकर्णी के अधीन चेंबर जूनियर के रूप में काम किया. बाद में गोवा सरकार के सरकारी वकील बने. अब तो उनकी ख़ुद की फ़र्म है: लॉ चेंबर्स ऑफ़ जय अनंत देहाद्राई. सफ़ेदपोश आपराधिक मामलों, कमर्शियल मुक़दमेबाज़ी और संवैधानिक मुद्दों से जुड़े केस लड़ते हैं. इसके अलावा, अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के लिए 2013 से 2022 तक 'द इर्रेलेवेंट लॉयर' नाम से कॉलम लिखते थे. बाक़ी संस्थाओं के लिए भी लिख चुके हैं.
न्यूज़लॉन्ड्री की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अनंत और महुआ तीन साल तक एक रिश्ते में थे. इस साल की शुरुआत में दोनों अलग हो गए. महुआ ने मानहानि मुक़दमे में भी देहाद्राई का ज़िक्र किया है. मुक़दमे में दर्ज है कि मोइत्रा ने इस साल मार्च और सितंबर में बाराखंभा पुलिस स्टेशन में देहाद्राई के ख़िलाफ़ घुसपैठ और चोरी की दो शिकायतें भी दर्ज की थीं. लेकिन मामले को 'सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने' का हवाला देकर अक्टूबर में शिकायतें वापस ले लीं. महुआ और अनंत ने मोइत्रा के कुत्ते, हेनरी को लेकर कस्टडी की लड़ाई भी लड़ी थी.
अब वापिस आते हैं केस पर.अभी तक सबकुछ आरोप तक सीमित था. नया मोड़ आया 19 अक्टूबर को. दर्शन हीरानंदानी के एक कथित हलफनामे से. ये हलफनामा लोकसभा की एथिक्स कमिटी को लिखा गया. हलफनामे में हीरानंदानी ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा को उनके दोस्तों और सलाहकारों ने उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने की सलाह दी. और इसी कारण से महुआ लगातार गौतम अडानी पर भी सवाल उठाती हैं. हीरानंदानी ने बताया है कि जब उन्होंने अडानी ग्रुप को लेकर सवालों का पहला सेट दिया था, तो उस पर मिली प्रतिक्रिया से महुआ बहुत खुश थीं. इसके बाद महुआ ने उन्हें अडानी ग्रुप पर हमला करने में लगातार मदद करने को कहा. और पार्लियामेंट लॉगइन और पासवर्ड भी शेयर कर दिया ताकि महुआ के बदले वे खुद सवाल पोस्ट कर सकें. ये भी दावा किया है कि महुआ मोइत्रा उनसे लग्जरी आइटम्स गिफ्ट के तौर पर मांगती थीं, छुट्टियों और यात्राओं पर होने वाले खर्च मांगती थीं. उन्होंने दिल्ली में महुआ के बंगले का रेनोवेशन भी उनसे करवाया था.
बाद में इंडियन एक्सप्रेस को दिए गए अपने इंटरव्यू में महुआ ने इस बात को स्वीकार किया था कि उन्होंने अपना लॉगिन डीटेल दर्शन हीरानंदानी के साथ शेयर किया था. लेकिन उन्होंने पैसे या किसी भी किस्म की आर्थिक मदद लेने से इनकार कर दिया. एथिक्स कमिटी की पूछताछ में भी महुआ ने यही बात दुहराई. इसके बाद एथिक्स कमिटी किस निष्कर्ष पर पहुंची, वो भी हमने आपको बता ही दिया.
लेकिन महुआ केस की जांच कर रहे एथिक्स कमिटी के काम पर भी सवाल उठाए गए. जैसे कमिटी की पूछताछ से बाहर आई महुआ ने कहा कि वो पर्सनल किस्म के सवाल पूछ रहे थे. जैसे मैं किससे बात करती हूं, कब बात करती हूं. महुआ ने कमिटी की पूछताछ के लिए वस्त्रहरण जैसी उपमाओं का इस्तेमाल किया.
महुआ को साथ मिला कमिटी के दूसरे सदस्य दानिश अली का. उन्होंने भी कहा कि महुआ से पर्सनल सवाल पूछे गए. जब 9 नवंबर को कमिटी की रिपोर्ट आई, तो इस रिपोर्ट के साथ दानिश अली को भी डांट पिलाई गई कि उन्होंने कमिटी के भीतर की बातें बाहर रखीं.
अब एथिक्स कमिटी की रिपोर्ट अडैप्ट होने के बाद महुआ की अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन कुछ ही घंटों पहले लोकसभा स्पीकर को लिखी उनकी चिट्ठी उनके एक्स वाल पर है. इस पर उन्होंने आरोप लगाए हैं कि 8 नवंबर को बनी ड्राफ्ट रिपोर्ट NDTV पर कैसे लीक हो गई? इसकी जांच की जाए.
अब बात करते हैं ऑप्शन की और आगे के कदमों की. नियम कहता है कि महुआ के खिलाफ तैयार की गई ये रिपोर्ट अब लोकसभा स्पीकर पर आएगी. हो सकता है कि लोकसभा स्पीकर इसे आगामी संसद सत्र में सदन के पटल पर रखें. इस पर बहस होगी. फिर हाउस की वोटिंग होगी. इस वोटिंग के बहुमत के आधार पर तय होगा कि महुआ को लोकसभा से निष्कासित किया जाएगा या नहीं. अभी के संकेतों को देखें तो महुआ की सांसदी पर खतरा जरूर है. शीत सत्र में संभवतः इस मामले का किसी भी सूरत में पटाक्षेप होगा. हमारी नजर बनी रहेगी.























