The Lallantop

Budget 2026: ब्रेस्ट कैंसर से लेकर ल्यूकेमिया तक, किस काम आती हैं वो 17 दवाएं जो बजट में सस्ती हुईं

Cancer Drugs Price Cut: बजट 2026 में सरकार ने कैंसर की 17 महंगी दवाओं पर इम्पोर्ट ड्यूटी हटाकर मरीजों को बड़ी राहत दी है. इस लेख में जानिए राइबोसिक्लिब, वेनेटोक्लैक्स, इपिलिमुमैब समेत सभी कैंसर दवाओं की कीमत, उपयोग और ड्यूटी हटने से इलाज कितना सस्ता होगा.

Advertisement
post-main-image
कौन सी 17 कैंसर दवाएं हुईं सस्ती और ये किन मरीजों के इलाज में आती हैं

बजट 2026 में वित्त मंत्री ने एक ऐसा ऐलान किया, जो सीधे उन लाखों परिवारों से जुड़ा है, जिनके घर में कोई कैंसर से जूझ रहा है. सरकार ने कैंसर की 17 महंगी दवाओं पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी पूरी तरह हटा दी है. आसान शब्दों में कहें तो जो दवाएं विदेश से आती थीं और जिन पर टैक्स लगने की वजह से कीमत और बढ़ जाती थी, अब उन पर वो टैक्स नहीं लगेगा. इसका सीधा मतलब है इलाज थोड़ा सस्ता होगा और मरीजों को दवा बीच में छोड़ने की मजबूरी कम होगी.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
राइबोसिक्लिब (Ribociclib)

यह दवा खासतौर पर ब्रेस्ट कैंसर की उन मरीजों को दी जाती है, जिनमें कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल चुका होता है. ये दवा कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकती है, ताकि बीमारी कंट्रोल में रहे.

भारत में इसकी कीमत करीब 2.5 से 3 लाख रुपये महीना है. अब तक इस पर करीब 10 फीसदी इम्पोर्ट ड्यूटी लगती थी, यानी 25 से 30 हजार रुपये सिर्फ टैक्स में चले जाते थे. ड्यूटी हटने के बाद कीमत करीब 20 से 30 हजार रुपये तक कम हो सकती है.

Advertisement
एबेमासिक्लिब (Abemaciclib)

यह भी ब्रेस्ट कैंसर में दी जाने वाली दवा है, खासकर तब जब हार्मोन से जुड़ा कैंसर हो. इसे लंबे समय तक लेना पड़ता है.

इसकी कीमत करीब 2 से 2.5 लाख रुपये महीना है. इम्पोर्ट ड्यूटी की वजह से 20 हजार रुपये तक extra जुड़ते थे. अब दवा इतनी ही रकम सस्ती हो सकती है.

टैलीकैबटाजीन ऑटोल्यूसल (Talycabtagene autoleucel)

ये एक बहुत एडवांस इलाज है, जिसे CAR-T थैरेपी कहते हैं. इसमें मरीज के ही खून से सेल निकालकर कैंसर से लड़ने के लिए तैयार किया जाता है. यह ब्लड कैंसर में दिया जाता है.

Advertisement

इस इलाज की कीमत बहुत ज्यादा होती है, करीब 3 से 4 करोड़ रुपये तक. पहले इस पर भी इम्पोर्ट टैक्स लगता था. ड्यूटी हटने से इलाज पर लाखों रुपये की राहत मिल सकती है.

ट्रेमेलिमुमैब (Tremelimumab)

यह दवा इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है, ताकि शरीर खुद कैंसर से लड़ सके. लिवर और कुछ दूसरे कैंसर में दी जाती है. 

इसकी कीमत करीब 4 से 5 लाख रुपये प्रति डोज है. ड्यूटी हटने से 40 से 50 हजार रुपये तक की कमी संभव है.

वेनेटोक्लैक्स (Venetoclax)

यह ब्लड कैंसर की अहम दवा है, खासकर ल्यूकेमिया में. ये कैंसर सेल्स को मरने पर मजबूर करती है. 

भारत में इसकी कीमत करीब 1.5 से 2 लाख रुपये महीना है. टैक्स हटने से 15 से 20 हजार रुपये की राहत मिल सकती है.

सेरिटिनिब (Ceritinib)

यह फेफड़ों के कैंसर में दी जाती है, जब बीमारी खास जीन की वजह से होती है. 

कीमत करीब 2 लाख रुपये महीना है. ड्यूटी हटने से 15 से 20 हजार रुपये कम हो सकते हैं.

ब्रिगैटिनिब (Brigatinib)

यह भी लंग कैंसर में दी जाने वाली दवा है, जब पुरानी दवाएं काम नहीं करतीं. कीमत करीब 2.5 लाख रुपये महीना है. टैक्स हटने से करीब 25 हजार रुपये की राहत.

डारोलुटामाइड (Darolutamide)

यह प्रोस्टेट कैंसर में दी जाती है, खासकर बुजुर्ग मरीजों को. इसकी कीमत करीब 2 लाख रुपये महीना है. ड्यूटी हटने से 15 से 20 हजार रुपये कम हो सकते हैं.

टोरीपालिमैब (Toripalimab)

यह इम्यूनोथैरेपी की दवा है, जो शरीर की ताकत से कैंसर से लड़वाती है. एक डोज की कीमत करीब 3 लाख रुपये है. टैक्स हटने से 30 हजार रुपये तक सस्ती हो सकती है.

सर्प्लुलिमैब (Serplulimab)

यह भी इम्यून सिस्टम को एक्टिव करने वाली दवा है. लंग और पेट के कैंसर में दी जाती है. कीमत करीब 3 लाख रुपये प्रति डोज है. ड्यूटी हटने से 25 से 30 हजार रुपये कम हो सकते हैं.

टिस्लेलिज़ुमैब (Tislelizumab)

यह उन मरीजों को दी जाती है जिनमें कैंसर बार-बार लौट आता है. एक डोज की कीमत करीब 3.5 लाख रुपये है. टैक्स हटने से करीब 30 हजार रुपये की राहत.

इनोतूज़ुमैब ओज़ोगैमाइसिन (Inotuzumab ozogamicin)

यह ब्लड कैंसर की दवा है, जब बीमारी बहुत गंभीर हो जाती है. इसका पूरा इलाज 15 से 20 लाख रुपये तक जा सकता है. ड्यूटी हटने से कुल खर्च में 1 से 2 लाख रुपये तक की कमी संभव है.

पोनेटिनिब (Ponatinib)

यह खास तरह के ल्यूकेमिया में दी जाती है, जब दूसरी दवाएं बेअसर हो जाएं. कीमत करीब 3 लाख रुपये महीना है. टैक्स हटने से 30 हजार रुपये तक कम हो सकते हैं.

इब्रूटिनिब (Ibrutinib)

यह भी ब्लड कैंसर और लिंफोमा में दी जाती है और लंबे समय तक चलती है. कीमत करीब 2 लाख रुपये महीना है. ड्यूटी हटने से 15 से 20 हजार रुपये की राहत.

डाब्राफेनिब (Dabrafenib)

यह त्वचा और कुछ लंग कैंसर में दी जाती है, खास जीन वाले मरीजों को. कीमत करीब 1.5 लाख रुपये महीना है. टैक्स हटने से 10 से 15 हजार रुपये कम हो सकते हैं.

ट्रामेटिनिब (Trametinib)

यह डाब्राफेनिब के साथ दी जाती है ताकि इलाज ज्यादा असरदार हो. कीमत करीब 1.8 लाख रुपये महीना है. ड्यूटी हटने से 15 हजार रुपये तक सस्ती हो सकती है.

इपिलिमुमैब (Ipilimumab)

यह एक जानी-मानी इम्यूनोथैरेपी दवा है, जो कई एडवांस कैंसर में दी जाती है. एक डोज की कीमत करीब 5 लाख रुपये है. टैक्स हटने से 40 से 50 हजार रुपये की राहत मिल सकती है.

ये भी पढ़ें: रेयर अर्थ मटेरियल पर दुनिया में हायतौबा, मगर ये होता क्या है? जेब में लेकर घूमते हैं आप और हम!

ड्यूटी हटने का मरीजों और परिवारों के लिए क्या मतलब

कैंसर का इलाज लंबा और बहुत महंगा होता है. भारत में ज्यादातर लोग अपनी जेब से इलाज कराते हैं. जब दवाओं पर इम्पोर्ट ड्यूटी हटेगी, तो हर महीने हजारों और पूरे इलाज में लाखों रुपये की बचत हो सकती है. इससे मरीज दवा बीच में छोड़ने को मजबूर नहीं होंगे और परिवारों पर कर्ज का बोझ थोड़ा कम होगा.

भारत में कैंसर का बढ़ता खतरा

भारत में हर साल कैंसर के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं. खराब खान-पान, तंबाकू, प्रदूषण और देर से जांच इसकी बड़ी वजह हैं. गांव और छोटे शहरों में इलाज की पहुंच पहले से ही मुश्किल है. ऐसे में दवाओं का सस्ता होना सिर्फ मेडिकल फैसला नहीं, बल्कि इंसानियत से जुड़ा कदम है. 

वीडियो: Eggoz अंडों में ‘कैंसर वाला केमिकल’? वायरल वीडियो का सच क्या है

इस पोस्ट से जुड़े हुए हैशटैग्स
Advertisement