बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार, 26 जनवरी को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उनका कहना था कि वो UGC के नए नियमों को लेकर इस्तीफा दे रहे हैं. हालांकि उनका इस्तीफा नामंजूर कर दिया गया है और उन्हें सस्पेंड करके उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. सोशल मीडिया पर उनके इस्तीफे की खूब चर्चा है. कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि अलंकार ने UGC के जिन नए नियमों को लेकर इस्तीफा दिया, उन पर कुछ रोज बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी. ऐसे में उन्होंने इस्तीफा देने में जल्दबाजी कर दी, और अब हो सकता है कि वो कुछ ही दिनों में अपना इस्तीफा वापस ले लें. लेकिन क्या इस्तीफा देना और वापस लेना इतना आसान है? इसको लेकर नियम क्या कहते हैं? और क्या अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा भविष्य में स्वीकार किया जाएगा? आइए इन सब पर विस्तार से बात करते हैं.
IAS-PCS अफसर अगर इस्तीफा वापस लेना चाहे तो क्या होता है? सारे नियम जान लीजिए
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दिया है. लेकिन, क्या उनका इस्तीफा स्वीकार भी किया जाएगा? आइए जानते हैं कि किसी IAS-PCS अफसर के लिए इस्तीफा देने और फिर उसे वापस लेने से जुड़े नियमों के बारे में.


सरकारी अफसरों (ऑल इंडिया सर्विस, जैसे IAS, IPS, IFS) के इस्तीफा देने, इस्तीफा स्वीकार होने, और इस्तीफा वापस लेकर बहाल होने के नियम मुख्य रूप से All India Services (Death-cum-Retirement Benefits) Rules, 1958 के Rule 5 के तहत आते हैं. ये नियम DoPT (Department of Personnel and Training) द्वारा लागू किए जाते हैं. और समय-समय पर इनमें बदलाव भी होते रहते हैं (जैसे 2011 में बड़ा संशोधन किया गया था).
स्टेप-बाय-स्टेप समझते हैं कि नियम क्या हैं?ये नियम IAS, IPS, IFS पर मुख्य रूप से लागू होते हैं. राज्य सेवाओं (State Civil Services) में थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन बेसिक प्रिंसिपल एक जैसा ही रहता है. पर सबसे पहले ये समझना जरूरी है कि इस्तीफा किसे माना जाता है? माने इस्तीफे की डेफिनेशन क्या है.
इस्तीफा एक लिखित, स्पष्ट और बिना शर्त की सूचना होती है. जिसमें अफसर अपनी सर्विस छोड़ने की इच्छा जताता है. ये तुरंत प्रभाव से हो सकता है. या किसी तय तारीख से.
पर इस्तीफा Voluntary Retirement Scheme (VRS) से अलग है. VRS में पेंशन और ग्रेच्युटी मिलती है. लेकिन साधारण इस्तीफे में कोई पेंशन नहीं मिलती. इस्तीफा ईमानदार और बिना किसी शर्त के होना चाहिए. अगर शर्तें लगाईं (जैसे ‘अगर ये हो जाए तो इस्तीफा मान्य’), तो वो वैलिड नहीं माना जाता.
इस्तीफा किसको सौंपा जाता है?अगर अफसर राज्य कैडर में पोस्टिंग पर है, और इस्तीफा देना चाहता है तो उसे राज्य के चीफ सेक्रेटरी को इस्तीफा भेजना होगा. अफसर अगर केंद्र सरकार में डेपुटेशन पर है, और इस्तीफा देना चाहता है तो उसे संबंधित केंद्रीय मंत्रालय या विभाग के सचिव को इस्तीफा सौंपना होगा.
अब इस्तीफा तो दे दिया. लेकिन देने भर से काम ओके नहीं होता. ना ही तुरंत नौकरी खत्म हो जाती है. इस्तीफा देने के बाद राज्य सरकार और विभाग इसे जांचता है. देखा जाता है कि अफसर के खिलाफ कोई कार्रवाई पेंडिंग तो नहीं है. कोई डिपार्टमेंटल इन्क्वारी तो नहीं चल रही. NOC तो ड्यू नहीं है. कुछ भी पेंच अगर फंसा, तो इस्तीफा रिजेक्ट भी हो सकता है.
ये सब जांच होने के बाद इसकी जानकारी DoPT (केंद्र सरकार) को भेजी जाती है. इसके बाद केंद्र सरकार ही अंतिम फैसला लेती है. माने, फाइनल कॉल रेस्ट्स विद द अल्टीमेट अपॉइंटिंग अथॉरिटी.
इस्तीफा कब और कैसे स्वीकार होता है?इस्तीफा केंद्र सरकार की कंपिटेंट अथॉरिटी द्वारा स्वीकार होने पर ही प्रभावी होता है. सामान्य नियम ये कहते हैं कि सरकार किसी अफसर को जबरदस्ती नहीं रखती. इसलिए इस्तीफा ज्यादातर मामलों में स्वीकार कर लिया जाता है.
कंपिटेंट अथॉरिटी के पास फाइनल अप्रूवल की पावर होती है. IAS के केस में ये फैसला DoPT में MoS लेते हैं. या कई मामलों में PM खुद फैसला लेते हैं. IPS अफसरों के मामले में गृह मंत्री के पास फैसला लेने की पावर होती है. और IFS (इंडियन फॉरेस्ट सर्विस) के इस्तीफे का फैसला पर्यावरण मंत्री के पास होता है.
अफसरों का इस्तीफा रिजेक्ट भी किया जा सकता है. या इसे डिले किया जा सकता है अगर विभागीय जांच, भ्रष्टाचार का केस, या कोई विजिलेंस इन्क्वारी चल रही हो. अगर अफसर सस्पेंड हो, तो भी इस्तीफे को रोका जा सकता है या रिजेक्ट किया जा सकता है.
अफसर का कोई ट्रेनिंग बॉन्ड, स्कॉलरशिप, या फॉरेन सर्विस बॉन्ड बचा हुआ हो, तो इस केस में भी इस्तीफा रुक सकता है.
इसके अलावा अगर कोई अफसर किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट या ऐसी पोजीशन पर हो, जहां तुरंत रिप्लेसमेंट मौजूद न हो तो public interest में इसको रोका जा सकता है. राजनीतिक पार्टी जॉइन करने के लिए अगर कोई अफसर इस्तीफा देता है, तो कुछ मामलों में इसे मंजूरी मिलने में मुश्किल आती है.
इस्तीफा वापस लेना या बहालीये इन रूल्स का सबसे महत्वपूर्ण और जटिल हिस्सा है. Rule 5(1A) (2011 amendment के बाद) के तहत अगर इस्तीफा स्वीकार होने से पहले अफसर लिखित में इस्तीफा वापस लेने की सूचना दे दे, तो ये ऑटोमैटिक वापस हो जाता है. माने इस्तीफा लागू नहीं होता.
अगर इस्तीफा स्वीकार हो गया हो तो भी इसे वापस लिया जा सकता है. केंद्र सरकार जनहित में (public interest) इस्तीफा वापस लेने की अनुमति दे सकती है. लेकिन सख्त शर्तों के साथ. मसलन, इस्तीफा देने का कारण भले ही ठोस रहा हो, लेकिन उसमें अफसर की ईमानदारी, काम करने की क्षमता और उसके व्यवहार पर कोई सवाल न उठा हो.
अगर इस्तीफा प्रभावी होने और उसकी वापसी की रिक्वेस्ट के बीच अफसर कोई गलत व्यवहार नहीं दिखाता, तो भी इस्तीफा वापस लिया जा सकता है. लेकिन ये समय सीमा 90 दिनों से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. माने, इस्तीफा डालने के 90 दिनों के अंदर इसे रिवोक करने की रिक्वेस्ट की गई हो.
इसकी प्रक्रिया क्या है?अफसर राज्य सरकार से रिटेन रिक्वेस्ट करता है. राज्य सरकार रेकमेंडेशन भेजती है. इसके बाद DoPT जांच करती है. अगर जनहित में लगे तो अनुमति दे दी जाती है. उदाहरण के लिए IAS शाह फैसल का इस्तीफा वापस लिया गया था. इस मामले में जनहित देखकर अफसर की बहाली हुई थी. लेकिन हर केस में ऐसा नहीं होती. ये सरकार पर निर्भर करता है.
अन्य महत्वपूर्ण बातेंइस्तीफा स्वीकार होने तक अफसर सेवा में ही माना जाता है. उसकी सैलरी, अलावेंसेज वगैरह जारी रहते हैं. इस्तीफा स्वीकार होने पर पेंशन, ग्रेच्युटी, रिटायरमेंट बेनेफिट्स नहीं मिलते हैं. केवल VRS में इसकी सुविधा मिलती है.
अगर इस्तीफा टेक्निकल रेजिग्नेशन हो, जैसे एक सर्विस से दूसरी में जाने के लिए. तो कुछ लाभ मिल सकते हैं.
राज्य सरकार के अफसरों के लिए राज्य के अपने सर्विस रूल्स लागू होते हैं. लेकिन ये केंद्र के नियमों से काफी मिलते-जुलते हैं.
क्या अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा स्वीकार किया जाएगा?इस सवाल का जवाब जानने के लिए हमने पूर्व IAS विजय शंकर पांडेय से बात की. उन्होंने बताया कि किसी भी अफसर को रिजाइन करने से पहले सरकार को तीन महीने का नोटिस देना होता है. विजय ने कहा,
“अफसर को 3 महीने का नोटिस देना होता है, या सरकार से इसमें छूट मांगनी होती है. एक लंबा लेटर लिखकर आप अपने इस्तीफे की बात करें तो ये नियमों के मुताबिक इस्तीफा नहीं माना जाता.”
विजय शंकर पांडेय ने बताया कि इस इस्तीफे का कोई मतलब नहीं है. सरकार ने बिल्कुल ठीक किया है. उन्होंने बताया,
“कोई भी अफसर सरकार की पॉलिसी का विरोध नहीं कर सकता है. आप रिश्वतखोरी का विरोध करिए, समझ आता है. लेकिन ये बात (जो अलंकार कह रहे हैं) समझ से परे है. ये सर्विस के रूल्स का उल्लंघन है.”
पूर्व IAS विजय शंकर पांडेय ने बताया कि इस्तीफा 2-3 लाइन का होता है. साफ और सीधा. उन्होंने बताया कि 5 पन्ने का इस्तीफा मान्य नहीं होता. अगर किसी अफसर को इस्तीफा देना होता है तो उसे सरकार को तीन महीने का नोटिस सर्व करना होता है. विजय ने बताया कि इसी तरह सरकार अफसर का इस्तीफा स्वीकार करने पर तीन महीने का नोटिस देती है. और इस पीरियड में सैलरी भी देती है.
विजय शंकर पांडेय ने बताया कि इस्तीफे पर अंतिम फैसला अप्वाइंटिंग अथॉरिटी का होता है. अलंकार अग्निहोत्री PCS अफसर हैं. उनके मामले में ये फैसला राज्य सरकार लेगी.
वीडियो: UGC मामले में इस्तीफा देने वाले SDM अलंकार अग्निहोत्री की पूरी कहानी


















.webp?width=120)
.webp?width=120)