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बीजेपी ने पासवान को तो मनाया, मगर सबसे बड़ी टेंशन तो अभी बाकी है!

2019 से पहले बिहार ने बीजेपी की धड़कन बढ़ा रखी है.

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बिहार के साथियों को मनाने समझाने में लगी है बीजेपी.
10 दिसंबर. केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक सकता पार्टी के सर्वेसर्वा उपेंद्र कुशवाहा ने मंत्री पद त्याग दिया. एनडीए से भी बाहर जाने की घोषणा कर दी.
20 दिसंबर. उपेंद्र कुशवाहा ने बिहार में महागठबंधन का दामन थाम लिया. यात्रा पूरी हुई. बिहार का एक सूरमा पूरी तरह से बीजेपी से कट्टी कर चुका था.
पर इस कट्टी से बीजेपी की टेंशन उतनी नहीं बढ़ी. जितनी बिहार के एक और सूरमा. जिन्हें भारतीय राजनीति का सबसे बेहतर मौसम वैज्ञानिक भी कहा जाता है. रामविलास पासवान. उनके एक बेटे और सांसद चिराग पासवान के ट्वीट ने बढ़ा दी. चिराग ने लिखा -
टीडीपी व रालोसपा के एनडीए गठबंधन से जाने के बाद एनडीए गठबंधन नाज़ुक मोड़ से गुज़र रहा है. ऐसे समय में भारतीय जनता पार्टी गठबंधन में फ़िलहाल बचे हुए साथियों की चिंताओं को समय रहते सम्मान पूर्वक तरीक़े से दूर करे.
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फिर एक और ट्वीट आया -
गठबंधन की सीटों को लेकर कई बार भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से मुलाक़ात हुई परंतु अभी तक कुछ ठोस बात आगे नहीं बढ़ पायी है. इस विषय पर समय रहते बात नहीं बनी तो इससे नुक़सान भी हो सकता है.
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ट्वीट से संकेत साफ था. संकेत क्या इसे धमकी समझिए. लोजपा ने साफ कर दिया था कि बीजेपी वालों - या तो सुनो वरना लोजपा नामक एनडीए का एक और चिराग बुझ सकता है. अब तीन राज्यों में ताजा-ताजा झटका खा चुकी बीजेपी को पता था कि इस तरह से लगातार साथियों का जाना उसके लिए अच्छे संकेत नहीं हैं. तो बीजेपी जुट गई है डैमेज कंट्रोल में.
क्यों फंसा हैं पेच?
दरअसल बीजेपी और लोजपा में मेन मसला फंसा है सीट बंटवारे को लेकर. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने लोजपा को 7 सीटें दी थीं तो वो इस बार भी इतने की ही उम्मीद कर रही है. मगर वो साल दूसरा था- ये साल दूसरा है. तब बीजेपी के साथ जेडीयू नहीं थी. उसे पहले ही जोड़े रखने के लिए बीजेपी को खुद को थोड़ा शहीद करना पड़ेगा. ऐसे में लोजपा को लगा होगा कि बलि उसकी भी सीटों की चढ़ेगी. बस इसी आशंका के चलते शुरू हुई राजनीतिक ब्लैकमेलिंग. ट्वीट किए गए. और ट्वीट का असर होता दिखने लगा है. बातचीत शुरू हो गई है.
चिराग ने एक ट्वीट से मामला सेटल करने की कोशिश की है.
चिराग ने एक ट्वीट से मामला सेटल करने की कोशिश की है.

खबर आ रही है कि भारतीय जनता पार्टी ने लोक जनशक्ति पार्टी के साथ ये सीटों का मसला हल कर लिया है. तय हो गया है कि 2019 के लिए किसके पास कितनी सीटें होंगी. डील के तहत लोजपा को 6 लोकसभा तो 1 राज्यसभा की सीट मिलेगी. ये छह सीटें भी सारी बिहार की नहीं होंगी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें पांच बिहार की होंगी तो एक सीट उत्तर प्रदेश या झारखंड में दी जाएगी. अब आप सोंच रहे होंगे कि बची वो एक राज्यसभा सीट किसको दी जाएगी. तो बताया जा रहा है कि इस पर सवार होकर उच्च सदन जा सकते हैं खुद रामविलास पासवान. 72 साल के पासवान के राज्यसभा जाने के फैसले के पीछे का कारण उनका स्वास्थ्य बताया जा रहा है. सीटों के इस बंटवारे को लेकर जल्द ही बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और लोजपा पार्लियामेंटरी बोर्ड के अध्यक्ष चिराग पासवान प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं.
पर क्या नीतीश मानेंगे?
इस सीट शेयरिंग के बाद माना जा रहा है कि लोजपा की तरफ से पिछले हफ्ते से जो टेंशन चली आ रही थी. वो मिलनी अब बीजेपी को खत्म हो जाएगी. पर जो एक और टेंशन बीजेपी को आगे मिल सकती है. वो है नीतीश कुमार की जेडीयू से. वो इसलिए क्योंकि नवंबर में बीजेपी ने घोषणा की थी कि बीजेपी और जेडीयू बिहार में बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. अब बिहार में हैं 40 सीटें. लोजपा को दे दी गईं 5. बचीं 35. सो जाहिर सी बात है कि इसको दो में बांटने पर किसी एक के हिस्से एक सीट ज्यादा जाएगी. जोकि एक नई टेंशन का कारण बन सकता है.
सीटों के बंटवारे पर नीतीश कुमार और अमित शाह के बीच फिर से मीटिंग होनी है.
सीटों के बंटवारे पर नीतीश कुमार और अमित शाह के बीच फिर से मीटिंग होनी है.

बीजेपी के एक नेता का कहना है कि दोनों पार्टियां 17-17 सीटों पर लड़ेंगी. बची एक सीट 35 साल के मुकेश साहनी को जा सकती है. जिन्हें इस वक्त बिहार के लोग 'मल्लाह का बेटा' के नाम से जानते हैं. बॉलिवुड में सेट डिजाइनर रहे साहनी ओबीसी के मल्लाह वर्ग से हैं जिनकी तादाद बिहार में करीब 14 फीसदी है. उन्होंने विकासशील इंसान पार्टी भी बनाई है. और माना जा रहा है कि वो मुज्जफरपुर सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. जोकि इस वक्त बीजेपी के पास है. तो बीजेपी इस एक सीट को साहनी के हाथ देकर मल्लाह वोटर को लुभाने की कोशिश करेगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी 2019 के लिहाज से बिहार का झगड़ा निपटाना जरूरी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी 2019 के लिहाज से बिहार का झगड़ा निपटाना जरूरी है.

मगर इस लुभाने के पहले बड़ा सवाल ये है कि ये डील नीतीश कुमार को कितना लुभाएगी. बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार इन सीटों के समीकरण पर चर्चा करने के लिए दिल्ली पधार भी चुके हैं. सबकी नजरें अब उन्हीं पर होंगी. देखने वाला होगा कि नीतीश और बीजेपी के बीच बात बन पाती है या नहीं. इसी से तय होगा बिहार में बीजेपी, जेडीयू और लोजपा का भविष्य.


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