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17 लोग जिंदा जल गए, BJP और AAP नंगई पर उतारू हैं

इन 17 परिवारों के उजड़ने के लिए अगर MCD और दिल्ली सरकार नहीं, तो क्या पाकिस्तान जिम्मेदार है?

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फोटो - thelallantop
दिल्ली के बवाना में 20 जनवरी की शाम को जो आग लगी थी, उसमें अब तक 17 लोगों की मौत हुई है. 23 लोग अब भी लापता हैं, लेकिन दिल्ली की राज्य सरकार और दिल्ली एमसीडी पर काबिज बीजेपी नंगई पर उतारू हैं. दोनों मिलकर किसी नतीजे पर पहुंचने की बजाय सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप लगाकर राजनीति कर रहे हैं. बीजेपी कह रही है कि हादसे के लिए दिल्ली सरकार जिम्मेदार है, आम आदमी पार्टी कह रही है कि हादसे के लिए एमसीडी जिम्मेदार है. दोनों में से कोई भी न तो जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार है और न ही जिम्मेदारी तय करने के लिए तैयार है. दोनों को ही लगता है कि शायद पाकिस्तान से या फिर अमेरिका से या फिर नॉर्थ कोरिया से कोई आए और कहे कि हां, हमारी वजह से इन 17 लोगों की मौत हुई है.

आग की वजह से अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है.

सच क्या है, दोनों ही पार्टियां जानती हैं. आम आदमी पार्टी और बीजेपी दोनों ही जानती हैं कि इसके लिए वो दोनों ही जिम्मेदार हैं. दिल्ली में जितनी भी फैक्ट्रियां हैं या फिर जितने भी उद्योग धंधे हैं, वो Delhi State Industrial and Infrastructure Development Corporation Ltd (DSIIDC) तहत आते हैं. इन उद्योगों को लाइसेंस देने की जिम्मेदारी MCD के पास है, जबकि इनके रखरखाव से लेकर इन्हें फायर एनओसी देने तक की जिम्मेदारी DSIIDC के पास है, जो दिल्ली राज्य सरकार के तहत है. MCD ने गुलाल बनाने के लिए फैक्ट्री का लाइसेंस दिया, वहां पटाखे बनने लगे. DSIIDC ने फैक्ट्रियों को फायर एनओसी दी, जबकि इस फैक्ट्री में आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं थे.

दिल्ली सरकार और दिल्ली बीजेपी एक दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारी लेने के लिए कोई भी तैयार नहीं है.

नार्थ एमसीडी की मेयर कह रही हैं कि लाइसेंस हमारे ही पास है, हम कुछ नहीं कह सकते.
उनका वीडियो देखिए- फिर घिरीं तो कहा कि लाइसेंस देना हमारा काम है, लेकिन इस हादसे से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी कह रहे हैं कि यह दिल्ली सरकार का औद्योगिक क्षेत्र है. यहां की फैक्ट्रियां उन्हीं के अधिकार के तहत आती हैं. ऐसे में यहां जो भी काम हो रहा है उसकी जवाबदेही दिल्ली सरकार की है. वीडियो पर घिरीं प्रीति अग्रवाल ने फिर सफाई दी. इस सफाई में सफाई कम और आम आदमी पार्टी पर आरोप ज्यादा था. उन्होंने कहा-
‘यह इंडस्ट्रियल एरिया दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन के अधीन आता है. फैक्ट्रियों के लिए जमीन आवंटित दिल्ली सरकार ने की थी. उन्हें कम से कम देखना चाहिए कि वहां क्या काम हो रहा है. क्या फर्जी वीडियो बनाकर लोगों को बरगलाना सही है? यह निंदनीय है और मैं चाहती हूं कि केजरीवालजी इसके लिए माफी मांगें.’

आप के बागी विधायक कपिल मिश्रा को भी राजनीति का मौका मिल गया. उन्होंने भी किसी एक मजदूर की मदद करने के बजाय बयान ट्वीट करना ही बेहतर समझा. उन्होंने लिखा-
'बागी विधायक कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली में अवैध पटाखा फैक्ट्री न चले, इसकी जिम्मेदारी सत्येंद्र जैन की होनी चाहिए थी और अवैध पटाखा न बने, इसकी जिम्मेदारी इमरान हुसैन की. ऐसे में इन 17 मौतों का जिम्मेदार कौन? कपिल ने तंज भरते हुए कहा कि कि सवाल मत पूछना लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा.'

 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी इस राजनीति में पीछे नहीं रहे. हादसे के सात घंटे बाद जब वो मौके पर पहुंचे, तो उन्हें विरोध झेलना पड़ा. जिस वीडियो में प्रीति अग्रवाल कह रहीं हैं कि हम कुछ नहीं कर सकते, उस वीडियो को सीएम केजरीवाल ने भी रीट्वीट किया. भले ही मुख्यमंत्री केजरीवाल ने सीधे तौर पर किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया, लेकिन बीजेपी को घेरते हुए ट्वीट्स को वो रीट्वीट करते रहे.


बीजेपी हो या फिर आम आदमी पार्टी, दोनों के ही नेता ट्वीट कर रहे हैं, रिट्वीट कर रहे हैं. बयान दे रहे हैं. एक-दूसरे पर कीचड़ उछाल रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारी नहीं तय कर पा रहे हैं. कोई तो जिम्मेदार है ही इन मौतों का, कुछ कर नहीं पा रहे हैं, कम से कम मरनेवालों के घरवालों को तो वो नाम बता दीजिए, जिनकी वजह से उनके अपने जिंदा जल गए.


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