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जो कंप्यूटर से बांसुरी बजा दे, सो रहमान होए!

बड्डे बॉय की सारी मधुर धुनों के राज़.

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फोटो - thelallantop

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अमेज़न ने 2010 में दुनिया के टॉप 100 एल्बम की लिस्ट निकाली थी. 'लगान' को इसमें 45वें पायदान पर रखा गया था. आप में से कई लोग कहेंगे कि इससे कई गुना अच्छे गाने हमारी दूसरी फिल्मों में हुए हैं. आखिर लगान ही क्यों?

बाकी के तमाम कंपोजर्स की बात बाद में करेंगे अभी बस 'लगान' के एक गाने की बात. भुवन और गौरी के बीच में प्यार की बात करता गाना, ''ओ री छोरी, मान भी ले बात मोरी''. गाना विशुद्ध भारतीय ढंग से शुरू होता है. उदित नारायण और अल्का याग्निक की आवाज़ में पीछे से मंजीरे और पायल के साथ ढोल बज रहा होता है अचानक ही मंजीरे की आवाज़ धीमी होती है. कई सारे वायलन और प्यानो के साथ सिंफनी शुरू हो जाती है. पीछे से ओपेरा सिंगर्स का कोरस सुनाई पड़ता है. देखते ही देखते पूरा अंतरा वेस्टर्न क्लासिक के खूबसूरत नोटेशन में बदल जाता है. ओपेरा के चरम पर पहुंचते ही एक बार फिर बैलों की घंटियां और सारंगी बजने लगती हैं. अंत में हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों वर्ज़न ऐसे मिल जाते हैं कि सुनने वाले को पता ही नहीं चलता है कि उसने संगीत का कोई अद्भुत प्रयोग सुना है. कह सकते हैं कि यही है रहमान के संगीत की खासियत. 
रहमान की कंपोज़िंग पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है. उनकी तमाम उपलब्धियों पर भी बहुत बातें हुई हैं. एयरटेल की सिग्नेचर ट्यून दुनिया की सबसे ज़्यादा डाउनलोड की गई रिंगटोन है. इसके बाद भी रहमान के काम के जिस पहलू पर कम चर्चा हो पाती है, वो है उनकी टेक्नॉलजी की समझ और गानों में इनका इस्तेमाल.

कंपोज़र न होते तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर होते

हिंदी और तमिल सिनेमा में 7.1 डॉल्बी डिजिटल साउंड को आम बनाने वाले ए आर रहमान दुनिया के किसी भी शहर में जाएं तो म्यूज़िकल इंस्ट्रुमेंट्स की दुकान पर बाद में जाते हैं और पहले सबसे बड़े स्टोर में पहुंचते हैं. फिल्म डायरेक्टर इम्तियाज़ अली के मुताबिक रहमान के पास दुनिया के सारे लेटेस्ट हैंडहेल्ड कैमरा हैं. आज की तारीख में हिंदुस्तान के सारे संगीतकार गाने कंपोज़ करने के लिए एप्पल का 'लॉजिक सॉफ्टवेयर' इस्तेमाल करते हैं, रहमान भी करते हैं. लॉजिक, संगीतकारों के लिए वैसा ही है जैसे इस लेख को लिखते समय कीबोर्ड और वर्डपैड. मगर इसके बाद ऐबसिंथ जैसे सैंपलर्स का इस्तेमाल उनकी धुनों को रहमान टच देता है.
उदाहरण के लिए रहमान के गानों में जो बांसुरी जैसी आवाज़ आपने सुनी होगी वो कंप्यूटर से बनती है.
बॉलीवुड के गानों में रहमान से ज़्यादा सैंपल्स का इस्तेमाल किसी ने नहीं किया है.
'दौड़' फिल्म के गाने 'शब्बा शब्बा हाय रब्बा होने लगा है नशा ' में अफ्रीकी कबीलों की आवाज़, 'रंगीला' में ड्रम्स की आवाज़ दरअसल पहले से रिकॉर्डेड सैंपल्स हैं. सैंपल्स वो प्री-रिकॉर्डेड आवाज़ें होती हैं जिन्हें सॉफ्टवेयर के ज़रिए गानों में मिला दिया जाता है.
इसी तरह से फिल्म 'दिल्ली 6' में श्रेया घोषाल को मरहूम बड़े गुलाम अली खान के साथ छोटा ख़याल गवाना एक ऐसा प्रयोग है जिसे रहमान ने तकनीक के ज़रिए ही संभव किया. श्रेया का सिंगिंग स्केल बड़े गुलाम अली से कहीं नीचा है. ऐसे में दोनों की जुगलबंदी के लिए रहमान की टेक्नोलॉजी की समझ ने ही इस बंदिश की रिकॉर्डिंग को संभव किया. वैसे रहमान ख़ुद भी कहते हैं कि अगर वो संगीतकार न होते तो सॉफ्टवेयर इंजीनियर होते.
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अपने सिंथेसाइज़र के साथ रहमान

संगीत का नया व्याकरण

रहमान की तकनीकी समझ की बात के साथ-साथ उनकी संगीत के व्याकरण को समझने की बात जरूरी है. एक साथ चार की-बोर्ड बजाने वाले रहमान ने की-बोर्ड बजाने से करियर की शुरुआत की. 25 साल की उम्र में मणि रत्नम की फिल्म 'रोज़ा' का संगीत दिया जिसे टाइम मैग्ज़ीन ने दुनिया के 10 सर्वकालिक महान एल्ब्म्स में गिना. 'रोज़ा' और उस दौर की 'बॉम्बे' जैसी कई फिल्मों में रहमान ने कई गाने दिये जो संगीत के व्याकरण को तोड़ते हैं, ये भी कह सकते हैं कि वो एक नया व्याकरण रचते हैं.
आम तौर पर जहां गानों में मुखड़े के बाद अंतरा आता है और अंतरे को उसी सुर पर छोड़ दिया जाता है जहां से फिर मुखड़ा मिल जाता है. ज़्यादातर मौकों पर रहमान इसे नहीं अपनाते हैं. कभी वो 'भारत हमको जान से प्यारा है' में बिलकुल दो अलग-अलग धुनों को एक ही गाने में पिरो देते हैं. कभी 'दिल से' में तमाम उतार-चढ़ावों से होते हुए आखिर में 'दिल से रे' पर आ जाते हैं. 'स्वदेस' का रामलीला वाला गाना 'पल पल है छाई ओ बिपदा' सुनिए. किस तरह से पारंपरिक धुनों पर मंच के संवादों को मिला कर 3 अलग-अलग लय एक ही गाने में इस्तेमाल की गई हैं.

दिग्गजों से तालीम

रहमान की इन सारी योग्यताओं के पीछे उनकी प्रतिभा के साथ-साथ उनकी संगीत की तालीम का भी हाथ है. जैसे उन्होंने लंदन के ट्रिनिटी कॉलेज से वेस्टर्न म्यूज़िक में डिग्री ली. पारंपरिक कर्नाटक संगीत में शिक्षा ली. कव्वाली की तालीम पाकिस्तान जाकर सीधे नुसरत फतेह अली खान से पाई. उन्होंने हरिहरन से गज़ल की बारीकियां भी सीखीं.
दो ऑस्कर जीतने वाले रहमान इकलौते एशियन हैं. उनके एक कॉन्सर्ट का वीडियो देखिये जहां वो बिना किसी इंस्ट्रुमेंट के इंटेल के क्यूरी सॉफ्टवेयर के साथ संगीत पैदा कर रहे हैं.
https://www.youtube.com/watch?v=F7DW2sDyRGM


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