"तू रानी है फ़्रांस की, मैं बांसुरी बांस की हमारी सोसायटी में ये चलता नहीं."इस देश का हिंदुत्व फ़्रांस की रानी है और तुम बांस की बांसुरी. हमारी सोसायटी में ये आज-कल चल नहीं रहा है. और क्या है न, तुम तो बजरंगी भाईजान में भी पाकिस्तानी ही बने थे. गलती तुम्हारी ही है. आज जब अपने कंधे पर प्रभाष एक भारी भरकम शिवलिंग रखकर चलते हुए दिखते हैं तो थियेटर में भीड़ उमड़ पड़ती है. फेसबुक पर फोटुएं चलती हैं कि आमिर खान ने शिव का मज़ाक उड़ाते हुए पीके को करोड़ों दिलाये तो हिन्दू चुप क्यूं हैं. ऐसे में किस मुंह से तुम मुस्लिम होकर रामलीला के पावन ऐक्ट में ऐक्टिंग करने पहुंच गए? वो अलग बात है कि करण और अर्जुन बने सलमान खान और शाहरुख़ खान ने मां काली से ये वादा किया था कि जान चाहे देनी पड़े, बलि वो चढ़ाएंगे. तो क्या हुआ कि "ओ पालनहारे, निर्गुण ओ न्यारे, तुमरे बिन हमरा कौनो नाही" को पहली बार काग़ज़ पर उतारने वाला जावेद अख्तर है, जो खुद को निरा नास्तिक बताता है. उस गाने को संगीत देने वाला अल्लाह रखा रहमान था, जिसने सालों पहले इस्लाम को अपना लिया था. उस फ़िल्म का नायक आमिर खान था. लेकिन क्या है कि आज-कल माहौल देशभक्तिमय हो चुका है. और देशभक्ति का मतलब है पाकिस्तान मुर्दाबाद. और पाकिस्तान का मतलब है मुसलमान. गनीमत यही समझो कि सिर्फ पाकिस्तानी ऐक्टर्स का बहिष्कार किया गया है. तुम्हें कम से कम फिल्मों में काम करने को तो मिलेगा. ज़्यादा लपड़-चपड़ किया तो सीधे इस्लामाबाद में दिखोगे. वो वक़्त गया जब वेद व्यास की लिखी महाभारत को टीवी पर लाने के लिए उसको स्क्रीनप्ले में बदलने के लिए राही मासूम रज़ा ने बीड़ा उठाया था. ये काहे भूल रहे हो कि देश को आज से 14 साल पहले एक मस्जिद को ढहा देने का एक्सपीरियंस हो गया था. उस हिसाब से आज के वक़्त में हमारा एक्सपीरियंस किस लेवल पर पहुंच गया होगा, इसका अंदाज़ा लगा लो. सुनो नवाज़, ज़्यादा फैंटम न बनो. सर-सर करोगे, आगे पीछे घूमोगे, डांट दिए जाओगे. जित्ता कहा जाये, उत्ता करो. जो न कहा जाए, न करो. मस्त रहो. और अपनी ये हिन्दुओं की रामायण में ऐक्टिंग करने के भूत को कहीं कोने में जाके मूत दो. काहे से कर तो कुछ पाओगे नहीं. और जो करना चाहोगे भी, तो करने नहीं दिया जायेगा. क्या है कि मुझे बचपन में ही फ़िज़िक्स की क्लास में ये सिखाया गया था कि दो सतहों के बीच मूवमेंट तब तक होता रहेगा, जब तक फ्रिक्शन नहीं होगा. और फ्रिक्शन न हो इसके लिए आइडियल सर्फेस होना चाहिए. और आइडियल सर्फेस सिर्फ ख्वाबों में ही मिलता है. तो या तो ख्वाबों में रहो या फिर औकात में. रामायण में ऐक्टिंग नहीं करने दी जाएगी. बाकी ऐसा है कि आई लाइक आर्टिस्ट! तुम्हारे देश का हिन्दू.
नवाज़ुद्दीन, तुम मुसलमान हो, तुम्हें राम के हाथों मरने भी न दिया जायेगा
रामलीला में ऐक्टिंग करने की चाहत रखने वाले नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी को खुला ख़त.
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फोटो - thelallantop
डियर नवाज़,
कैसे हो? सुना है कि दशहरे में कुछ प्लान था तुम्हारा? रामलीला में ऐक्टिंग करने जा रहे थे? क्या हुआ? नहीं करोगे? क्यूं? अच्छा! करने नहीं दिया जा रहा है. कोई बात नहीं. आज-कल ऐसा ही हो रहा है. तुम्हें ज़बरदस्ती इस रामलीला में ऐक्टिंग करने से रोका जा रहा है. किसी शिव सेना ने कहा है कि तुमने अपने छोटे भाई की पत्नी से मारपीट की है, इसलिए एक आरोपी से रामलीला में ऐक्टिंग नहीं करवा सकते. तुम तो थोड़े फ़ेमस हो गए हो. टीवी पे इंटरव्यू आता है तुम्हारा. शिव सेना से कॉन्टैक्ट कर सकते हो. उनके लिए कुछ कह भी सकते हो. लोग तुम्हें सुनेंगे. शिव सेना भी सुनेगी. उसी शिव सेना से कह दो कि जो खुद कीचड़ में सना हो वो अगले के कुर्ते पर पान के दाग को न दिखाए तो बेहतर होगा. तुम्हारे ऊपर लगा इल्ज़ाम अभी प्रूव नहीं हुआ है. जबकि शिव सेना की ख्याति समूचा देश जानता है. असली बात मैं बताता हूं. गैंग्स ऑफ़ वासेपुर में तुम्हें फैजल के रूप में, किक में शिव, बदलापुर में लियाकत के रूप में, लंचबॉक्स में "हेलो सार!! कैसे हैं आप?" कहकर ग्रीट करते हुए कभी इस बात पर ध्यान गया ही नहीं कि तुम सिर्फ नवाज़ ही नहीं सिद्दीक़ी भी हो. तुम मुसलमान हो. और रामलीला में ऐक्टिंग करना चाहते हो. गुलज़ार ने बहुत पहले झूम बराबर झूम फ़िल्म में एक गाना लिखा था. टिकट टु हॉलीवुड. उसमें एक लाइन थी,
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