आम तौर पर आपने देखा होगा कि इंडस्ट्री या कन्स्ट्रक्शन साइट पर काम करने वाले मज़दूर पीला हेलमेट पहनते हैं. और भी कई कलर के हेलमेट आपने फ़ैक्टरी में अलग-अलग काम करने वाले मज़दूरों या मैनेजरों को पहने देखा होगा. लेकिन पीएम मोदी का सफेद हेलमेट पहनना बहस बन गया. क्योंकि उन्होंने कुर्ता भी सफेद रंग का पहन रखा था.
तो क्या मोदी ने अपने कुर्ते के रंग से मैच करके हेलमेट पहना था या इसकी कोई और वजह है? नियम-कानून क्या कहते हैं? ऐसा कोई क़ानून या नियम भारत में नहीं है जो अलग-अलग रंगों के हेलमेट पहनने के संबंध में किसी तरह का विवरण देता हो. हालांकि, इंडस्ट्री में इसका "अघोषित नियम" की तरह पालन किया जाता है. उस पर आगे बताएंगे. फिलहाल ये जानिए कि हेलमेट बनाने वाली कंपनियां को इनकी क्वालिटी का ध्यान रखना होता है. उन्हें क्वालिटी चेक से गुजरना होता है. हेलमेट्स की क्वालिटी तय करता है भारत सरकार का ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्ज़
या BIS.
BIS ने औद्योगिक सुरक्षा हेलमेट के लिए 'विशेष विवरण, 1984' के नाम से दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन दिशा-निर्देशों में अलग-अलग ज़रूरतों के लिए कैसे हेलमेट बनाए जाने हैं, इसके बारे में बताया गया है. हेलमेट को बनाने में कैसे केमिकल का इस्तेमाल करना है, कितने तापमान में इसे टेस्ट करना हैं, ये सारी बातें बताई गई हैं. लेकिन, कलर के इस्तेमाल के संबंध में कुछ नहीं कहा गया है.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. (फ़ोटो-इंडिया टुडे)
फ़ैक्टरी के मज़दूरों और कर्मचारियों के लिए अलग-अलग क़ानून हैं जो सुरक्षा उपकरणों पर बात करते हैं. इनमें
फ़ैक्ट्रीज़ ऐक्ट, 1948इन सभी क़ानूनों में सुरक्षा उपकरणों का ज़िक्र है. हेलमेट का भी ज़िक्र है, लेकिन कलर को लेकर इनमें भी कोई बात नहीं कही गई है.
दी माइंस ऐक्ट, 1952
दी डॉक वर्कर्स (हेल्थ सेफ़्टी एंड वेलफ़ेयर) ऐक्ट, 1986
बिल्डिंग एंड कन्स्ट्रक्शन वर्कर्स ऐक्ट, 1996, आदि शामिल हैं.
साल 2020 में एक नया क़ानून पारित किया गया. ऑक्युपेशनल सेफ़्टी हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशन कोड, 2020. इसमें तमाम सेक्टर्स के साथ-साथ कन्स्ट्रक्शन इंडस्ट्री में काम करने वालों की सुरक्षा को लेकर काफ़ी डिटेल दी गई है. लेकिन, हेलमेट के कलर का ज़िक्र इसमें भी नहीं है.
श्रम मंत्रालय के तहत काम करने वाले डायरेक्टरेट जनरल फ़ैक्टरी अड्वाइस सर्विस एंड लेबर इंस्टीट्यूट्स और इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन
ने मिलकर 'नेशनल ऑक्युपेशनल सेफ़्टी एंड हेल्थ प्रोफ़ाइल' के नाम से एक दस्तावेज़ जारी किया है. 2017 में जारी इस दस्तावेज़ में कर्मचारियों की सेफ़्टी से जुड़े हरेक क़ानून का हवाला देते हुए हेलमेट और अन्य सुरक्षा उपकरणों की बात कही गई है. लेकिन फिर वही बात. हेलमेट के रंग के संबंध में यहां भी कुछ नहीं कहा गया है. लेकिन कलर कोड का पालन होता है ऊपर हमने बताया था कि किसी भी कानून में शामिल नहीं होने के बावजूद भारत में हेलमेट के कलर कोड का पालन लगातार किया जाता रहा है. ऐसा विदेशों में चले आ रहे कलर पैटर्न के आधार पर ही होता आ रहा है. अमेरिका की बात करें तो वहां के लेबर डिपार्टमेंट ने 1970 में ऑक्युपेशनल सेफ़्टी एंड हेल्थ ऐक्ट
जारी किया था. इस ऐक्ट में हेलमेट के कलर कोड को साफ़-साफ़ बताया गया है. लगभग यही कलर कोड यूरोप और यूके में भी माना जाता है.

कन्स्ट्रक्शन साइट पर काम कर रहे लोगों के साथ पीएम मोदी. (तस्वीर- पीटीआई)
अलग-अलग पदों के लिए अलग रंग कलर कोड का मतलब है अलग-अलग पदों पर काम रहे हो लोगों का विभाजन. आम तौर पर सफ़ेद, पीला, नीला, लाल, भूरे रंग के हेलमेट इस्तेमाल किए जाते हैं.
1) सफ़ेद- इसका इस्तेमाल साइट इंजीनियर, प्रोजेक्ट मैनेजर, सुपरवाइज़र जैसे पदों पर रहने वाले लोग करते हैं.
2) पीला- सभी तरह के मज़दूर इस हेलमेट का इस्तेमाल करते हैं.
3) नीला- मकैनिक, मशीन ऑपरेटर, फ़ोरमैन जैसे काम करने वाले पदों के लोग इस्तेमाल करते हैं.
4) हरा- सुरक्षा या पर्यावरण विभाग के अफ़सर या कर्मचारी इस हेलमेट का यूज़ करते हैं.
5) लाल- फ़ायर-फ़ाइटर विभाग में काम करने वाले इसका इस्तेमाल करते हैं.
6) नारंगी- इलेक्ट्रीशियन इस हेलमेट का इस्तेमाल करते हैं.
7) ग्रे- अगर कोई साइट विज़िट करना चाहता हो, चाहे क्लाइयंट हो या कस्टमर या कोई और सब इसी हेलमेट का इस्तेमाल करते हैं.
वापस पीएम मोदी पर आते हैं, कि उन्होंने साइट का निरीक्षण करते वक्त सफेद हेलमेट क्यों पहना. तो अघोषित नियमों के हिसाब से यही लगता है कि पीएम मोदी को ग्रे या सफेद कलर का हेलमेट ही पहनने को दिया जा सकता था. अब इसका जवाब हम नहीं देने वाले कि क्या उन्होंने जानबूझकर अपनी पोशाक के रंग की मैचिंग का हेलमेट पहनना पसंद किया. वो क्या है कि पीएम की ड्रेसिंग पर तुक्का लगाने के अलावा भी हमारे पास बहुत काम है. केवल इतना ही कहेंगे कि कन्स्ट्रक्शन साइट पर हेलमेट पहनकर पीएम ने सतर्कता बरती, क्योंकि सुरक्षा बहुत ज़रूरी है.





















