महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी प्रोटोकॉल नियमों में बदलाव के लिए एक रेजोल्यूशन जारी किया है. इसके मुताबिक, अब सरकारी अधिकारी उन विधायकों या सांसदों के सम्मान में खड़े नहीं होंगे, जिन्हें किसी केस में दोषी ठहराया गया हो. या फिर उन्हें किसी मामले की जांच/सुनवाई के लिए बुलाया गया हो, या जो चुनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए सरकारी ऑफिस में गए हों.
दागी MP-MLA के सम्मान में नहीं खड़े होंगे अधिकारी, महाराष्ट्र सरकार का आदेश
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी प्रोटोकॉल में बदलाव किया है. अब सरकारी अधिकारी दागी या फिर जांच का सामना कर रहे सांसद या विधायकों के सम्मान में खड़े नहीं होंगे. इससे पहले नवंबर 2025 में सरकार की ओर से सरकारी अधिकारियों को बैठक में आने वाले विधायकों और सांसदों का खड़े होकर अभिवादन करने का आदेश दिया था.


इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार ने 28 अप्रैल को एक सरकारी रेजोल्यूशन जारी करके अपने पुराने निर्देश में संशोधन किया. पहले अधिकारियों को किसी बैठक में आने पर खड़े होकर चुने गए प्रतिनिधियों का अभिवादन करने को कहा गया था. साथ ही उनके जाने के बाद बैठक छोड़ने का आदेश दिया गया था. 28 अप्रैल, 2026 को ये बदलाव किए गए. नए रेजोल्यूशन में कहा गया,
यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि किसी आपराधिक या दूसरे मामले में दोषी ठहराए गए हैं, या अगर उन्हें किसी भी जांच या सुनवाई में पक्षकार के तौर पर बुलाया गया है, या फिर वे चुनाव प्रक्रियाओं (नॉमिनेशन फाइलिंग, जांच या सुनवाई) के लिए किसी सरकारी ऑफिस में पहुंचे हैं, तो ऐसे में अधिकारियों को विधायक या सांसदों के आने या जाने पर खड़े होने या उनका अभिवादन करने की जरूरत नहीं है.
चीफ सेक्रेट्री राजेश अग्रवाल के ऑफिस से ये आदेश जारी किया गया है. इसमें लिखा है कि इन मामलों में, संबंधित अधिकारियों से उम्मीद की जाती है कि वे चुने गए प्रतिनिधियों के साथ कानून, नियमों और मौजूदा परिस्थितियों के मुताबिक, बिना किसी प्रोटोकॉल के आम नागरिकों की तरह व्यवहार करें.
इससे पहले नवंबर 2025 में तब के चीफ सेक्रट्री राजेश कुमार ने सरकारी अधिकारियों को बैठक में आने वाले विधायकों और सांसदों का खड़े होकर अभिवादन करने का आदेश दिया था. सामान्य प्रशासन विभाग के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि यह बदलाव केवल दोषी ठहराए गए और जांच के दायरे में आए लोगों के संबंध में किया गया है. उन्होंने बताया कि सरकारी अधिकारी अगर जांच के लिए बुलाए गए लोगों के प्रति निष्पक्ष नहीं रहेंगे तो इससे सुनवाई पर असर पड़ सकता है.
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