सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मध्य प्रदेश के खजुराहो स्मारक समूह के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की क्षतिग्रस्त 7 फुट ऊंची मूर्ति के जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण की मांग वाली याचिका खारिज कर दी. याचिका इस आधार पर खारिज कर दी गई कि यह मामला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधिकार क्षेत्र में आता है, जो इस स्थल के संरक्षण और जीर्णोद्धार का प्रबंधन करता है. सुनवाई के दौरान, भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह "जाएं और भगवान से ही कुछ करने के लिए कहें" और भक्तों को अदालत के हस्तक्षेप की बजाय प्रार्थना करने का सुझाव दिया. इन टिप्पणियों पर सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया हुई और धार्मिक भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता के आरोप लगाए गए. मुख्य न्यायाधीश गवई ने बाद में अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए ज़ोर दिया कि उनकी टिप्पणी पुरातात्विक संरक्षण पर एएसआई के अधिकार के संदर्भ में थी, और उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं. अधिक जानकारी के लिए वीडियो देखें.
सीजेआई के बयान पर बवाल, कहा था - "जाएं और भगवान से ही कुछ करने के लिए कहें"
मुख्य न्यायाधीश गवई ने बाद में अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए ज़ोर दिया कि उनकी टिप्पणी पुरातात्विक संरक्षण पर एएसआई के अधिकार के संदर्भ में थी.
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