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जोमैटो बॉय-रैपिडो ड्राइवर रात में छापते थे नकली नोट, पकड़े जाने पर बताया कैसे सीखा ये काम

Hyderabad fake currency print: दिनभर कोई खाना पहुंचाता था, कोई बाइक से सवारी छोड़ता था तो कोई ऑटो चलाकर परिवार का खर्च निकालता था. लेकिन पुलिस के मुताबिक पर्दे के पीछे ये तीनों नकली नोट छापने और उन्हें बाजार में चलाने के खेल में शामिल थे. पुलिस की कार्रवाई ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया है.

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आरोपियों ने ऑनलाइन देखकर नोट बनाना सीखा था. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • हैदराबाद पुलिस ने नकली भारतीय करेंसी नोट छापने और चलाने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 2 लाख 91 हजार रुपये से अधिक मूल्य के नकली नोट बरामद किए गए।
  • आरोपियों ने कथित तौर पर YouTube और Instagram पर वीडियो देखकर नकली नोट बनाना सीखा और आवश्यक उपकरणों को इकट्ठा करके असली नोटों की तरह दिखाने वाले सिक्योरिटी फीचर्स की नकल की।
  • गिरफ्तार किए गए आरोपियों और जब्त सामान को पुलिस ने अपने कब्जे में लिया है, जबकि एक साथी फरार है और उसकी तलाश जारी है, साथ ही जांच की प्रक्रिया भी चलते हुए है।
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अब्दुल बशीर

हैदराबाद में पुलिस ने नकली भारतीय करेंसी नोट (FICN) छापने और उन्हें चलाने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. हैदराबाद कमिश्नर की टास्क फोर्स, शमशाबाद जोन टीम और बालापुर पुलिस ने मिलकर नकली नोट बनाने वाले तीन लोगों को पकड़ा है. गिरोह के पास से 2 लाख 91 हजार रुपये से ज्यादा नकली नोट बरामद किए हैं. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर YouTube और Instagram पर वीडियो देखकर नकली करेंसी बनाना सीखा था.

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आरोपियों की पहचान जोमैटो डिलीवरी वर्कर रामावथ रामू उर्फ मोहम्मद (36), रैपिडो ड्राइवर रामावथ मोतीलाल (35) और ऑटो-रिक्शा ड्राइवर रामावथ गांधी (19) के रूप में हुई है. तीनों तेलंगाना के चिंथल थांडा, वड्डिपतला के रहने वाले हैं. आरोपियों का एक अन्य साथी सुधीर जॉन चेला उर्फ वामशी फरार बताया जा रहा है. 

सब्जी, शराब की दुकान पर यूज किए नोट

इंडिया टुडे से जुड़े अब्दुल बशीर की रिपोर्ट के मुताबिक, जोमैटो बॉय रामू का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, इस कारण कथित तौर पर गैर-कानूनी कामों में शामिल हो गया था. इसके बाद वह अपने रिश्तेदार मोतीलाल के संपर्क में आया. दोनों ने कथित तौर पर YouTube और Instagram पर वीडियो देखकर नकली नोट बनाना सीखा.

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नोट बनाने वाली वीडियो में जिन लोगों का नंबर दिखाई दिया, मोतीलाल ने उनसे कांटेक्ट किया. फिर करेंसी छापने के लिए जो-जो सामान चाहिए था, उसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया. एक कलर प्रिंटर, स्कैनर, बॉन्ड पेपर, रंगीन लिक्विड, पेपर बंडल, आदि. इसके बाद उन्होंने नकली नोट छापने का अपना काम शुरू कर दिया.

पुलिस ने बताया कि आरोपियों ने असली नोट जैसा दिखाने के लिए वॉटरमार्क और गांधी की तस्वीर जैसे सिक्योरिटी फीचर्स की भी नकल करने की कोशिश की. तीनों आरोपी इन नकली नोटों का इस्तेमाल छोटी-मोटी जगह पर करते थे. जैसे कि सब्जी मंडियों और शराब की दुकान पर. खासकर रात के समय. क्योंकि रात के समय भीड़-भाड़ में ज्यादा चांस होते हैं कि नोट के नकली और असली होने पर नजर ना पड़े.

पुलिस को नकली नोटों के साथ क्या मिला?

पुलिस ने इस गैंग के पास से कुल 1124 नकली नोट जब्त किए हैं, जिनकी कीमत 2 लाख 91 हजार से ज्यादा पाई गई. बरामद किए गए नोटों में 500 रुपये के 437 नकली नोट, 100 रुपये के 648 नकली नोट और 200 रुपये के 39 नकली नोट शामिल थे.

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पुलिस ने 500 रुपये के चार और 100 रुपये के चार असली नोट भी जब्त किए. इनका इस्तेमाल कथित तौर पर नकली करेंसी बनाने के लिए रेफरेंस के तौर पर किया गया था. सीज किए गए अन्य सामानों में Epson L6460 कलर प्रिंटर, Epson कलर स्कैनर, लैमिनेटर, पेपर कटर, रंगीन लिक्विड, पेपर बंडल, गांधी जी की छपी हुई तस्वीरें, वॉटरमार्क पेपर, रैपिंग का सामान, स्मार्टफोन और एक मोटरसाइकिल शामिल है.

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों और जब्त किए गए सामान को बालापुर पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया है. आगे जांच चल रही है. फरार साथी सुधीर जॉन चेला की तलाश जारी है.

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