महाराष्ट्र सरकार ने हिंदी भाषा को लेकर बड़ा फैसला किया है. राज्य में अब सरकारी अधिकारियों के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा को पूरी तरह से खत्म करने का आदेश जारी हुआ है. अब सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को सैलरी में बढ़ोतरी और प्रमोशन के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा पास करना जरूरी नहीं होगा. सरकार का तर्क है कि सरकारी कामकाज के लिए मराठी और अंग्रेजी का ही इस्तेमाल होता है. इसलिए हिंदी की परीक्षा की जरूरत नहीं है.
महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों को दी बड़ी राहत, अब नहीं देनी होगी इस विषय की परीक्षा
महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सरकारी अधिकारियों के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा को खत्म करने का फैसला किया है. 7 दशक से ज्यादा समय से चल रही इस परीक्षा को बंद करने का फैसला लिया गया है. सरकार ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं है.

क्यों खत्म की हिंदी की परीक्षा
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि महाराष्ट्र राज्य बनने के बाद से सरकारी कामों के लिए मराठी का प्रयोग किया जाता है. केंद्र और दूसरे राज्यों के साथ संपर्क के लिए अंग्रेजी का इस्तेमाल होता है. सरकारी कामकाज में हिंदी का इस्तेमाल बेहद कम होता है. इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भाषा निदेशालय (Language Directorate) की ओर से आयोजित हिंदी परीक्षा को रद्द करने का फैसला किया है.
यह सरकारी आदेश 31 अगस्त को जारी किया गया था. इसके तहत अब हिंदी भाषा की परीक्षा को औपचारिक तौर पर बंद कर दिया गया है. इस परीक्षा से जुड़े सभी पुराने आदेश को भी रद्द कर दिया गया है.
राजनीतिक दलों ने किया था विरोध
यह मामला तब चर्चा में आया, जब भाषा निदेशालय ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा कराने का ऐलान किया. परीक्षा 28 जून को आयोजित कराई जानी थी. लेकिन तारीखों का ऐलान होते ही महाराष्ट्र में इसका जमकर विरोध शुरू हो गया. राजनीतिक दलों के साथ मराठी भाषा से जुड़े संगठनों ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए.
राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने चेतावनी दी कि अगर परीक्षा कराई गई तो उनके कार्यकर्ता परीक्षा केंद्रों पर प्रदर्शन करेंगे. उद्धव ठाकरे की शिवसेना UBT ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा. पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या गुजरात और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सरकारी कर्मचारियों के लिए हिंदी की परीक्षा अनिवार्य है?
परीक्षा के विरोध को देखते हुए उद्योग और मराठी भाषा मंत्री उदय सामंत ने 28 जून को होने वाली परीक्षा पर रोक लगाने का आदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि सरकार इस बात की समीक्षा करेगी कि इस परीक्षा की जरूरत है या नहीं.
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साल 1950 के दशक में शुरू हुई परीक्षा
बॉम्बे स्टेट ने 1950 के दशक में इस परीक्षा की शुरुआत की थी. उनका मकसद प्रशासनिक अधिकारियों को हिंदी का उपयोग करने में सक्षम बनाना था. साल 1960 में महाराष्ट्र के गठन के बाद भी यह परीक्षा जारी रही. हालांकि समय-समय पर इसमें कई छूट भी दी जाती रही.
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