तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका आरोप है कि जंतर-मंतर पर हो रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने उनका यौन उत्पीड़न किया. ये प्रोटेस्ट मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया. महिला पत्रकारों के कथित यौन उत्पीड़न को लेकर विपक्ष से लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) तक, सभी दिल्ली पुलिस पर हमलावर हैं. राहुल गांधी ने इस मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है. वहीं, दिल्ली पुलिस ने क्राइम ब्रांच को मामले की जांच सौंप दी है.
'ACP विवेक भगत ने ब्रेस्ट दबाए,' पुलिसवालों पर महिला पत्रकारों से यौन उत्पीड़न का आरोप, जांच शुरू
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए. पत्रकारों ने FIR दर्ज करने की मांग की, जबकि दिल्ली पुलिस ने शिकायतें Crime Branch को भेज दी हैं.

दिल्ली पुलिस ने एक X पोस्ट में बताया कि उन्हें तीन महिला पत्रकारों से पुलिस अफसरों के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिली हैं. दिल्ली पुलिस ने निष्पक्ष जांच के लिए केस क्राइम ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया है. वहीं, पत्रकार संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग कर रहे हैं. दिल्ली पुलिस ने एक्स पर लिखा,
3 अक्टूबर को, विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में, कानून और व्यवस्था की स्थिति में होने के दौरान, तीन महिला पत्रकारों द्वारा पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए थे. नई दिल्ली जिले को उनकी शिकायतें मिली हैं. उन्हें निष्पक्ष और निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दिया गया है.

एक पीड़ित महिला पत्रकार ने यहां तक आरोप लगाया कि ACP विवेक भगत ने उनके ब्रेस्ट दबाए. ये दावा करती महिला पत्रकार का वीडियो CJP फाउंडर ने सोशल मीडिया पर शेयर किया. इसमें पीड़िता साफ कहती नजर आती हैं,
“ACP विवेक भगत ने मेरे ब्रेस्ट दबाए. और मुझे धक्का दिया. और जब मैंने उनसे सवाल पूछा, तो वे भाग गए.”
उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ACP विवेक भगत के खिलाफ FIR दर्ज नहीं कर रही है. दी लल्लनटॉप इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.
इस मुद्दे पर लगातार घिरती दिल्ली पुलिस ने एक और बयान दिया. DCP नेहा यादव ने कहा,
“नई दिल्ली इलाके में BNSS की धारा 163 लागू होने के बावजूद, AISA और अन्य पार्टियों ने SIR के विरोध में 3 अक्टूबर को प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों को BNSS की धारा 163 का हवाला देते हुए जगह खाली करने की चेतावनी दी गई. जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया, तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया. शाम करीब 6 बजे, खुद को पत्रकार बताने वाली तीन महिलाओं ने शिकायत दर्ज कराई कि हिरासत के दौरान दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके साथ बदसलूकी की. उनकी शिकायत दर्ज कर ली गई है, मेडिकल जांच हो चुकी है और सभी शिकायतें क्राइम ब्रांच में भेज दी गई हैं.”
DCP नेहा यादव ने अपील की कि अगर किसी के पास इन घटनाओं से जुड़ा कोई फुटेज हो, तो वे उसे क्राइम ब्रांच के साथ शेयर करें.
राहुल गांधी ने अमित शाह से जवाब मांगालोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है. X पर हिंदी में एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि अमित शाह को जवाब देना चाहिए. उन्होंने लिखा,
जंतर-मंतर पर एक महिला पत्रकार ने एक पुलिस अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है. घंटों से सैकड़ों पत्रकार सिर्फ इतनी मांग लेकर बैठे हैं कि FIR दर्ज कर ली जाए. ये तो पुलिस का बुनियादी काम है न? वो भी नहीं किया.
आज ही जंतर-मंतर पर सैकड़ों लोग हिरासत में लिए गए. महिला प्रदर्शनकारियों के साथ बदसलूकी के आरोप हैं. कैमरे छीने गए, पत्रकार घसीटे गए.
और ये पहली बार नहीं है - इससे पहले भी हमने वीडियो सबूतों के साथ देखा है कि पुलिस के अफसर महिलाओं के साथ घिनौनी बदसलूकी करते हैं.
राहुल गांधी ने आगे लिखा,
पूरी दिल्ली की महिलाएं, छात्राएं अपनी सुरक्षा को लेकर घबराहट में हैं, सत्याग्रह कर रही हैं - मगर जिस पुलिस पर महिलाओं की हिफाजत की जिम्मेदारी है, वही महिलाओं पर हाथ उठा रही है.
और एक महिला की शिकायत दर्ज करने से जो सरकार डरती है - वो आखिर किसकी हिफाजत कर रही है?
दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है. अमित शाह जी, कहां हैं आप? जवाब आपको ही देना है.

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CJP का ACP भगत पर आरोपकॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने भी ACP विवेक भगत पर गंभीर आरोप लगाए. CJP का आरोप है कि महिला पत्रकार के साथ यौन उत्पीड़न किया गया और उन्हें गलत तरीके से छुआ गया. उन्होंने कहा,
ये चौंकाने वाली बात है! दिल्ली पुलिस ACP भगत को क्यों बचा रही है? हम महिला पत्रकार के साथ खड़े हैं. पुलिस अधिकारी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए, जिसकी शुरुआत FIR दर्ज करने और उन्हें सस्पेंड करने से हो.

CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने भी आरोप लगाया कि महिला पत्रकार को कथित यौन उत्पीड़न के मामले में FIR दर्ज करने से मना कर दिया गया. दिपके ने कहा,
अभी एक महिला पत्रकार का फोन आया. उसने बताया कि ACP विवेक भगत ने उनके साथ बदसलूकी की और गलत तरीके से छुआ. उसने शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने मना कर दिया. लोकल DCP, ACP विवेक भगत को क्यों बचा रहे हैं? क्या DCP सचिन शर्मा, अमित शाह के चहेते हैं?.

वहीं वामपंथी छात्र संगठन 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) ने भी ऐसी ही शिकायत की है. उसने आरोप लगाया कि महिला प्रदर्शनकारियों, पत्रकारों और वकीलों के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों ने बदसलूकी की.
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