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दिल्ली का युवराज मर्डर केस क्या है? पुरानी कॉलीग ने बुलाया था, नाले में शव मिला

Gurugram Yuvra Manchanda murder: दिल्ली के एक शख्स युवराज सिंह मनचंदा का गुरुग्राम में मर्डर किया गया. युवराज 6 सितंबर को अपनी एक एक्स कॉलीग से मिलने गए थे.

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आरोपी और मृतक, दोनों साथ में एक कंपनी में काम करते थे. (कर्टसी-इंडिया टुडे)

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  • गुरुग्राम में 6 सितंबर को युवराज सिंह मनचंदा की गोली मारकर हत्या की गई, और उनकी हत्या के मामले में उनकी एक्स कॉलीग अन्या वत्स एवं संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया गया है।
  • हत्या के पीछे पैसों के विवाद की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि अन्या वत्स ने युवराज से उधार लिए धन की वापसी नहीं की थी, जिससे दोनों के बीच विवाद हुआ था।
  • पुलिस जांच में तकनीकी सबूतों और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर आरोपी उत्तराखंड से गिरफ्तार किए गए, और मामले की आगे की जांच जारी है।

गुरुग्राम में युवराज सिंह मनचंदा नाम के शख्स की 6 सितंबर को हत्या कर दी गई. परिवार को कथित तौर पर गुमराह करने के लिए दो दिन तक उनके फोन से मैसेज किया गया. लिखा कि मीटिंग की वजह से फंसा हुआ हूं. 11 सितंबर को परिजनों को थोड़ा शक हुआ, तो उन्होंने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई.

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गुरुग्राम के बादशाहपुर पुलिस स्टेशन को 10 सितंबर को नाले से एक शव मिला था. पुलिस ने शव की तस्वीर युवराज मनचंदा के परिवार को दिखाई. उन्होंने कन्फर्म किया को वो युवराज ही थे. 

पुलिस ने मामले में युवराज की एक्स कॉलीग अन्या वत्स और उसके साथी संयम सचदेवा को गिरफ्तार किया है. दोनों रियल एस्टेट फर्म में साथ काम करते थे. मृतक ने कुछ महीनों पहले ही वहां से नौकरी छोड़ दी थी. आरोपी महिला को इसी महीने जॉब से निकाला गया था. शुरुआती जांच में हत्या का कारण पैसों का विवाद बताया जा रहा है. अन्या ने कथित तौर पर मृतक से कुछ पैसे उधार लिए थे, जिसे वो वापस नहीं कर पाई.   

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रात 10 बजे स्विच ऑफ हुआ मृतक का फोन

इंडिया टुडे से जुड़े हिमांशु मिश्रा, अंशुल सिंह और अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, सरिता विहार में रहने वाले युवराज सिंह एक बड़ी रियल एस्टेट कंपनी में काम करते थे. 6 सितंबर को वे अपनी बहन के साथ लाजपत नगर के सेंट्रल मार्केट में शॉपिंग करने गए थे. शाम करीब 4 बजे उन्होंने परिवार को बताया कि वे गुरुग्राम में अपनी एक्स कॉलीग से मिलने जा रहे हैं और रात 10 बजे तक लौट आएंगे.

लेकिन रात 10 बजे के आसपास उनका फोन स्विच ऑफ हो गया, जो अगले दिन सुबह 7 बजे ऑन हुआ. उनके फोन से परिवार को कई मैसेज भेजे गए. कहा कि बड़ी मीटिंग में हूं. बात नहीं कर सकता. 10 तारीख को बात करूंगा. इतने में युवराज के फोन से बेंगलुरु के लिए एक टिकट बुक हुआ, जिसकी कॉपी फैमिली को भेजी गई.

परिवार के लोगों ने 10 सितंबर तक इंतजार किया. लेकिन जब युवराज का कोई मैसेज नहीं आया, तो उन्होंने पुलिस थाने में मामले की शिकायत दर्ज कराई. भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 140 (3) के तहत FIR दर्ज की गई.

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मर्डर के बाद उत्तराखंड गए थे आरोपी

नाले में युवराज का शव मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. उन्होंने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (IPDR), CCTV फुटेज और दूसरे तकनीकी सबूतों की जांच की. तब पता लगा कि मृतक की आखिरी बातचीत अन्या वत्स से हुई थी. आरोपी महिला ने युवराज को गुरुग्राम बुलाया था. दोनों एक मॉल के बाहर कार में मिले थे.

अन्या वत्स ने पुलिस को बताया कि दोनों के बीच बहस हो गई थी. जिसके बाद उसने कथित तौर पर युवराज सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी. 6 से 8 सितंबर के बीच वे इधर-उधर ही कार में शव लेकर घूमते रहे. और 8 सितंबर को लाश नाले में फेंक दी.

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इसके बाद अन्या और संयम कैंची धाम गए. वहां एक PG गेस्ट हाउस में रुके. दिल्ली पुलिस ने वत्स का फोन ट्रैक किया. उनकी लोकेशन उत्तराखंड में मिली, जहां से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है. बताया गया कि दोनों आरोपी बेरोजगार चल रहे थे. उनके साथ में एक बच्चा भी है. आगे मामले की जांच चल रही है. 14 सितंबर को परिजनों ने युवराज सिंह का अंतिम संस्कार किया था.

अन्या वत्स पर पहले भी दर्ज मामले

रिपोर्ट के मुताबिक, अन्या वत्स पर पहले दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी का आरोप लग चुका है. आरोप है कि वह सरकारी अधिकारी बनकर लोगों को काम करवाने का झांसा देती थी. बदले में मोटी रकम लेती थी और फिर गायब हो जाती थी. उसके खिलाफ दर्ज FIR के मुताबिक, उसने कथित तौर पर कई लोगों से लाखों रुपये की धोखाधड़ी की है.

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