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'धमाका हुआ, छाती तक बर्फ, लगा मर गए... ' चमोली हादसे के शिकार मजदूरों ने सुनाई आपबीती

Chamoli Glacier Tragedy: मजदूरों ने बताया कि घटना वाले दिन सुबह से ही बर्फ गिर रही थी. फिर अचानक से धमाके जैसी आवाज आई और वो सब एक खाई में जा गिरे. कुछ देर बाद उन्होंने अपना होश संभाला और फिर...

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एक मजदूर की तलाश अब भी जारी है. (तस्वीर: इंडिया टुडे/PTI)
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अंकित शर्मा

उत्तराखंड के चमोली में हिमस्खलन (Chamoli Glacier Incident) के कारण 7 मजदूरों की मौत हो गई है. जोशीमठ के आर्मी हॉस्पिटल में 45 घायल लोगों का इलाज चल रहा है. एक मजदूर की तलाश अब भी जारी है. इससे पहले बताया गया था कि इस हादसे में 55 मजदूर बर्फ में फंसे थे. लेकिन अब पता चला है कि इनमें से सुनील कुमार नाम के एक मजदूर घटना से पहले ही अपने घर चले गए थे. उनके परिवार ने भी इस बात की पुष्टि की है कि वो घर पर हैं और सुरक्षित हैं.

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया है कि एक घायल मजदूर को इलाज के लिए AIIMS ऋषिकेश में रेफर किया गया है. उन्होंने बताया कि औपचारिकता के बाद मृतकों के शव उनके परिजनों को सौंप दिए जाएंगे.

“अचानक से तेज आवाज आई…”

पीड़ित मजदूर माणा जिले में सीमा सड़क संगठन (BRO) के सड़क निर्माण से जुड़े प्रोजेक्टस में काम करते थे. इलाके में ये काम साल के 12 महीने चलता है. जब भी बर्फबारी होती है या ठंड बढ़ती है तो ये लोग अपने कैंप में वापस आ जाते हैं. मौसम में सुधार होने पर वो वापस से काम शुरू करते हैं. 28 फरवरी की तड़के सुबह ये लोग अपने कैंप में थे, तभी हिमस्खलन हुआ.

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रेस्क्यू किए गए मजदूरों ने इंडिया टुडे ग्रुप को बताया कि अचानक से एक तेज आवाज आई, बिल्कुल किसी विस्फोट के जैसी. इसके बाद तेज हवाएं चलीं और उनके कैंप में रखे कंटेनर हवा में उड़ने लगे. कुछ समय तक तो मजदूरों को समझ ही नहीं आया कि वहां हो क्या रहा है. उन्हें लगने लगा था कि अब वो जिंदा नहीं बच पाएंगे. लेकिन फिर सेना और बचाव दल के लोग आ गए और उन्हें रेस्क्यू कर लिया.

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"तेज हवा आई और हम खाई के पास जाकर गिरे…"

सत्य प्रकाश यादव नाम के व्यक्ति ने बताया कि जैसे ही वो लोग सोकर उठे, तेज हवा आई. इसके पांच मिनट के बाद हादसा हुआ जो काफी भयंकर था. सत्य प्रकाश उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के रहने वाले हैं. उन्होंने कहा कि वो लोग तीन सौ मीटर दूर अलकनंदा नदी के पास एक खाई में जाकर गिरे थे. करीब पांच से दस मिनट के बाद वो ऊपर आ पाए. इसके बाद उनमें से 10 से 12 लोग आर्मी कैंप तक पहुंचे. फिर हेलिकॉप्टर से जोशीमठ पहुंचाया गया.

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"छाती तक बर्फ था…"

बलिया जिले के रहने वाले एक मजदूर ने कहा कि उस दिन सुबह से ही बर्फ गिर रही थी. इलाके में छाती तक बर्फ भर गई थी. उन्होंने कहा कि वो लोग पहले सुरक्षित स्थान पर पहुंचे थे. इसके बाद सेना ने उनकी मदद की. उन्होंने बताया कि उनकी जान बहुत मुश्किल से बच पाई. उत्तरकाशी के अभिषेक ने बताया कि जब वो खाई में गिरे तो उनको कुछ होश नहीं था. कुछ देर बाद वो खुद ही वहां से निकलकर आर्मी गेस्ट हाउस तक पहुंचे थे.

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