यूपी के स्कूलों में ‘मास्टरजी’ लोगों की भारी कमी हो गई है. इतनी ज्यादा कि केंद्र सरकार को राज्य सरकार से कहना पड़ा है कि वह टीचरों की भर्ती का काम तेज करे. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) की बैठक में केंद्र की बीजेपी सरकार ने यूपी की बीजेपी सरकार को ये सलाह दी है.
यूपी में सरकारी टीचरों के इतने पद खाली, हालत देखकर केंद्र सरकार टेंशन में आ गई
उत्तर प्रदेश के सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में 81 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली हैं. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने योगी सरकार से भर्ती प्रक्रिया तेज करने को कहा है, जिस पर राज्य सरकार ने जल्द नियुक्तियां करने का भरोसा दिया है.


हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में प्राइमरी और सेकेंड्री स्कूलों को मिलाकर कुल 81 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं. केंद्र सरकार की सलाह पर शिक्षा विभाग के बड़े अधिकारी ने आश्वासन दिया कि प्रदेश में टीचर्स की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने पहले ही 10 हजार से ज्यादा प्राइमरी स्कूल के टीचरों की भर्ती का ऐलान कर दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक सरकारी स्कूलों में 2 लाख 50 हजार 488 पद मंजूर किए गए हैं. इनमें से 77 हजार 400 पद खाली हैं. माध्यमिक स्कूलों की बात करें तो यहां 11 हजार 83 पद हैं, जिनमें 4 हजार 421 पद खाली पड़े हैं. यानी दोनों लेवल पर कुल मिलाकर 31 फीसदी से ज्यादा टीचर्स के पद खाली हैं. इसको लेकर शिक्षा मंत्रालय ने राज्य सरकार को सलाह दी है कि वह प्राथमिक और माध्यमिक दोनों स्तरों पर शिक्षकों की भर्ती के काम में तेजी लाए.
इस पर उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (बेसिक और माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जवाब दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही शहरी प्राइमरी स्कूलों के लिए 10 हजार नए शिक्षकों की भर्ती का ऐलान कर चुके हैं. इसके अलावा, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने हाल ही में टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) कराया है. इसके नतीजे जल्द आने वाले हैं. उन्होंने बताया कि माध्यमिक स्कूलों (Intermediate) के लिए भी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जारी है.
ये भी पढ़ेंः 65 परसेंट लाने वाले बच्चे 'एग्जाम फ्रॉम होम' में 96% नंबर लेकर आए, प्रोफेसर ने ऐसे पकड़ ली 'चीटिंग'
ट्रेनिंग सेंटर्स में भी स्टाफ की कमीसंकट सिर्फ स्कूलों के शिक्षकों का नहीं है. केंद्र सरकार की रिपोर्ट में टीचर्स को पढ़ाने की ट्रेनिंग देने वाले संस्थानों में भी स्टाफ की भारी कमी बताई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) में खाली पदों का हिसाब 2024-25 में 16.67 फीसदी था. इस साल यह बढ़कर 25 फीसदी हो गया है. वहीं, जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) में खाली पदों का आंकड़ा 42.24 फीसदी से बढ़कर 45 फीसदी हो गया है.
वीडियो: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर उनकी पत्नी ने क्या कहा?












