भारत के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है. चीन ने पहली बार दुनिया के सामने अपने सबसे गुप्त और सबसे एडवांस 6th Generation फाइटर जेट की झलक दिखाकर साफ संदेश दे दिया है कि अब उसकी तैयारी सिर्फ ताइवान या अमेरिका के लिए नहीं, बल्कि पूरे एशिया में सैन्य बढ़त हासिल करने की है. अगर यह विमान तय क्षमताओं के साथ चीनी वायुसेना में शामिल होता है तो भारतीय वायुसेना के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है.
चीन ने खोल दिया अपना सीक्रेट कार्ड! 6th Gen फाइटर की पहली झलक, अमेरिका और भारत दोनों अलर्ट
China Sixth Generation Fighter Jet: चीनी सेना ने आधिकारिक वीडियो जारी कर अपने गुप्त छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान J-36 'लिटिल सिक्स' की पहली झलक दिखाई है. बिना पूंछ वाले इस घातक स्टील्थ लड़ाकू विमान के आने से भारत की हवाई सुरक्षा और सामरिक संतुलन के लिए एक नया और गंभीर खतरा पैदा हो गया है.


भारत समेत दुनियाभर की मीडिया ने इस खबर को प्रमुखता से दिखाया है. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि चीन ने नया फाइटर जेट दिखाया. असली सवाल यह है कि उसने इसे अभी क्यों दिखाया? क्या यह अमेरिका को खुली चुनौती है, या फिर भारत समेत पूरे इंडो पैसिफिक क्षेत्र को अपनी बढ़ती सैन्य ताकत का संदेश? इन सवालों के जवाब समझने के लिए पहले जान लेते हैं कि चीन के इस 6th Generation फाइटर में आखिर ऐसी कौन सी खूबियां हैं, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
वीडियो में क्या दिखा और चीन ने क्या कोडवर्ड दिया
ये पूरा मामला चीन के भारी परिवहन विमान Y-20 की 10वीं वर्षगांठ पर जारी एक प्रमोशनल वीडियो से शुरू हुआ. चीन के आधिकारिक मिलिट्री मीडिया हैंडल 'चाइना मिलिट्री बगल' (China Military Bugle) ने चार मिनट का एक वीडियो जारी किया. इस वीडियो के आखिरी हिस्से में Y-20 टैंकर (हवा में ईंधन भरने वाले विमान) के कॉकपिट में मौजूद को-पायलट कप्तान से पूछता है कि "आज हमें किस विमान में ईंधन भरना है?". इस पर कप्तान जवाब देता है कि “पहले मास्टर सिक्स (Master Six) को, फिर लिटिल सिक्स (Little Six) को.”
डिफेंस एक्सपर्ट्स और रिटायर्ड वायुसेना अधिकारी डॉ सुरेंद्र सिंह के मुताबिक,
'मास्टर सिक्स' चीन के पुराने H-6 बॉम्बर के लिए इस्तेमाल होने वाला नाम है, जबकि 'लिटिल सिक्स' का सीधा मतलब चीन का नया छठी पीढ़ी का फाइटर जेट है, जिसे डिफेंस की दुनिया में हम अस्थाई रूप से चेंगदू J-36 (Chengdu J-36) कह रहे हैं.
वायरल वीडियो में इसके तुरंत बाद कॉकपिट की खिड़की से बाहर एक परों वाले बिना पूंछ (Tailless) के फाइटर जेट की धुंधली परछाईं या सिल्युएट आसमान में तेजी से आगे बढ़ती दिखाई देती है. आगे बढ़ने से पहले आपको वो वीडियो भी दिखा देते हैं.
5वीं पीढ़ी बनाम 6वीं पीढ़ी: ये नया जेट कितना अलग है
दुनिया अभी 5वीं पीढ़ी के राफेल, F-35 और J-20 जैसे विमानों की ताकत देख रही है, लेकिन 6वीं पीढ़ी के जेट युद्ध का पूरा तरीका बदल देंगे. J-36 के डिजाइन और लीक हुई जानकारियों के आधार पर दोनों पीढ़ियों के बीच का अंतर आसानी से समझा जा सकता है.
विकीपीडिया के मुताबिक 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में रडार से बचने के लिए स्टील्थ डिजाइन, इंटरनल वेपन्स बे और एडवांस एवियोनिक्स होते हैं, लेकिन उनमें टेल (पूंछ) होती है. इसके विपरीत, 6वीं पीढ़ी के J-36 में वर्टिकल टेल (खड़ी पूंछ) पूरी तरह गायब है, जिसे फ्लाइंग-विंग या डबल-डेल्टा विंग डिजाइन कहा जाता है. ये डिजाइन इसे रडार की नजरों में बिल्कुल अदृश्य बना देता है. 5वीं पीढ़ी के विमानों को उड़ाने के लिए पायलट की जरूरत अनिवार्य होती है, जबकि 6वीं पीढ़ी के विमान पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस होंगे.
कहा तो यहां तक जा रहा है कि ये विमान बिना पायलट के (ऑटोनॉमस) उड़ सकेंगे और आसमान में अपने साथ वफादार ड्रोन या 'लॉयल विंगमैन' की पूरी फौज को कमांड करेंगे. हालांकि इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हुई है. इसके अलावा इसमें हाइपरसोनिक रफ्तार, लेजर हथियार (डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स) और साइबर अटैक करने की क्षमता होगी.
यहां एक शब्द आया है ‘लॉयल विंगमैन’, ये क्या होता जानने के लिए आप लल्लनटॉप के आर्टिकल 'लॉयल विंगमैन': सरहद पार किये बिना भी एयरस्ट्राइक कर सकेंगे वायुसेना के पायलट पर क्लिक कर सकते हैं.
भारत के लिए ये कितनी बड़ी और सीधी चुनौती है
चीन द्वारा छठी पीढ़ी के फाइटर जेट को आधिकारिक तौर पर सामने लाना भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए एक बड़ा सुरक्षा संकट है. भारत अभी भी अपनी वायुसेना के लिए 5वीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसके प्रोटोटाइप के आने में अभी लंबा वक्त लगेगा. भारत की सीमा पर चीन पहले से ही अपने 5वीं पीढ़ी के J-20 फाइटर जेट्स तैनात कर चुका है.
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के मुताबिक अगर चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) या तिब्बत के एयरबेसों पर हवा में ईंधन भरने की क्षमता वाले 6वीं पीढ़ी के J-36 को ऑपरेट करने लगता है, तो वो भारतीय हवाई सुरक्षा को आसानी से भेद सकेगा. बिना पूंछ वाला ये स्टील्थ डिजाइन भारतीय रडार प्रणालियों को चकमा देने में सक्षम होगा. भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता ये है कि चीन अपनी इस नई तकनीक को पाकिस्तान के साथ भी साझा कर सकता है, जिससे भारत को भविष्य में दोनों मोर्चों पर अत्यधिक उन्नत हवाई खतरे का सामना करना पड़ेगा.
अमेरिका की तुलना में चीन की रफ्तार तेज
वैश्विक रक्षा विश्लेषक इस बात से हैरान हैं कि चीन ने इतनी जल्दी अपने 6th Gen एयरक्राफ्ट को दुनिया के सामने पेश कर दिया है. अमेरिका अपने नेक्स्ट जनरेशन एयर डॉमिनेंस (NGAD) प्रोग्राम के तहत 6वीं पीढ़ी के जेट पर काम कर रहा है, लेकिन बजट और डिजाइन के विवादों के कारण अमेरिकी प्रोग्राम में देरी हो रही है.
चीन ने J-36 के शुरुआती परीक्षण 2024 के अंत में ही शुरू कर दिए थे और 2026 के मध्य तक आते-आते इसके हवा में ईंधन भरने के टेस्ट का वीडियो भी सामने आ गया है. पीएलए वायुसेना के डिप्टी कमांडर वांग वेई ने भी पहले सरकारी मीडिया को दिए इंटरव्यू में संकेत दिया था कि चीन बहुत जल्द अपनी अगली पीढ़ी के विमानों को सार्वजनिक करेगा. ये टाइमलाइन बताती है कि चीन इस रेस में अमेरिका के समानांतर खड़ा हो गया है.
पूरी खबर खत्म होने के बाद अगर आपके मन में ‘पांचवीं पीढ़ी’ और ‘छठवीं पीढ़ी’ के फाइटर जेट का ज़िक्र सुन-सुनकर बेसिक सवाल उठ खड़ा हुआ है कि भईया ये फाइटर जेट्स की पीढ़ी क्या बला है तो इसके लिए हमने लल्लनटॉप पर “फाइटर जेट्स में 'जेनरेशन' का क्या मतलब है? चीन और पाकिस्तान आगे, भारत कहां ठहरता है?” शीर्षक से एक आर्टिकल लिख रखा है, दिलचस्पी हो तो जरूर पढ़िएगा.
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