अहमदाबाद पुलिस की क्राइम ब्रांच ने बच्चों की तस्करी करने वाले एक संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. ये गिरोह गरीब परिवारों के बच्चों से भीख मंगवाने के लिए गुजरात में लाता था. इसमें कथित तौर पर राजस्थान और मध्य प्रदेश के गांव के सरपंच दलाल का काम कर रहे थे.
MP-राजस्थान में सरपंचों ने कई बच्चों को गुजरात में बेचा, भीख में भी कमीशन खा गए
Ahmedabad child trafficking: अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने कथित तौर पर चाइल्ड ट्रैफिकिंग के रैकेट का भंडोफोड़ किया है. पता लगा है कि राजस्थान और मध्यप्रदेश के कुछ सरपंच या गांव के मुखिया दलाल के तौर पर काम कर रहे थे.


पुलिस अब तक 276 बच्चों की पहचान कर चुकी हैं, जिन्हें रैकेट के जरिए शहर में तस्करी करके लाया गया था. फिर मॉल, अस्पताल, मंदिर और ट्रैफिक लाइट पर खड़ा कर दिया जाता था.
बच्चों की तस्करी में गांव के सरपंच शामिलगिरोह की जानकारी पुलिस को एक अभियान से पता चली. क्राइम ब्रांच ने अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के साथ मिलकर शहर की सड़कों से भीख मांगने वाले बच्चों को हटाने के लिए ये अभियान चलाया. क्योंकि 2030 में शहर कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला है.
इस दौरान पुलिस को पता चला कि अलग-अलग जगहों पर जो बच्चे भीख मांग रहे थे, उन्हें तस्करी के एक संगठित नेटवर्क के जरिए यहां तक लाया गया था. टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने बताया,
“सरपंचों को मिलता है बच्चे लाने के लिए पैसा”"सभी भिखारी आम भिखारी नहीं होते. वे एक ऐसे ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो अलग-अलग राज्यों की सीमाओं के पार काम करता है. इनमें से ज्यादातर बच्चे बहुत गरीब परिवारों से आते हैं. उन्हें उनके माता-पिता ने ही भेजा था, जो बड़े शहरों में भीख मांगने को कमाई का जरिया मानते थे."
अधिकारी ने बताया कि यह रैकेट गांवों से शुरू होता है, जहां सिंडिकेट चलाने वाले लोग कमजोर परिवारों की पहचान करने के लिए सरपंचों से संपर्क करते हैं. उन्होंने कहा,
"गुजरात में भीख मांगने वाले सिंडिकेट, राजस्थान और मध्य प्रदेश के गांव के सरपंचों को बच्चे लाने के लिए पैसे देते हैं. सरपंच पैसे का कुछ हिस्सा माता-पिता को देते हैं, बाकी रकम खुद रख लेते हैं. बाद में बच्चों की रोजाना की कमाई का 20% हिस्सा भी लेते रहते हैं."
पुलिस ने बताया कि सिंडिकेट कमाई की संभावना के आधार पर बच्चों को तैनात करने के लिए जगहों को ध्यान से चुनता है. जैसे धार्मिक जगहों पर सबसे ज्यादा कमाई होती है. फिर ट्रैफिक जंक्शन, अस्पताल और शॉपिंग मॉल.
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रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने ऐसे सरपंचों और माता-पिता की पहचान की है जो इस व्यवस्था का हिस्सा थे. उनके खिलाफ बच्चों की तस्करी से जुड़े कानूनों के तहत आरोपों की जांच कर की जा रही है. वहीं, बचाए गए बच्चों को शेल्टर होम में रखा जा रहा है. राज्य प्रशासन ने एक पहल के तहत उनके पुनर्वास (rehabilitation) के लिए एक व्यापक योजना शुरू की है.
अधिकारियों ने बताया है कि सभी 276 बच्चों का दाखिला स्थानीय सरकारी प्राइमरी स्कूलों में कराया जाएगा. उन्हें भोजन, कपड़े और मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग दी जाएगी.
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