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DUSU चुनाव में पहली बार नेत्रहीन उम्मीदवार की दस्तक, पंकज ढींगरा ने छेड़ी प्रतिनिधित्व की नई बहस

नेत्रहीन छात्र पंकज ढींगरा का चुनावी अभियान इस बात पर जोर दे रहा है कि नेतृत्व किसी शारीरिक क्षमता तक सीमित नहीं होना चाहिए. वे छात्रों के बीच जाकर संवाद कर रहे हैं और अपने मुद्दों को सामने रख रहे हैं.

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पंकज ढींगरा नेत्रहीन छात्र हैं. वे बार DUSU चुनाव में सक्रिय रूप से चुनाव प्रचार कर रहे हैं. (फोटो-इंस्टाग्राम)

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  • दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 में नेत्रहीन छात्र पंकज ढींगरा पहली बार उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में हैं, जो नेतृत्व में शारीरिक क्षमता की सीमाओं को चुनौती दे रहे हैं।
  • दिव्यांग छात्रों को कैंपस सुविधाएं, शिक्षा और छात्र राजनीति में बराबर अवसर न मिलने के कारण पंकज ढींगरा ने दिव्यांग प्रतिनिधित्व को बढ़ावा देने के लिए चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है।
  • पंकज ढींगरा की उम्मीदवारी से दिव्यांग छात्रों के नेतृत्व और समान अवसर के मुद्दे चुनावी बहस का केंद्र बन गए हैं और 18 सितंबर के मतदान के बाद इसके प्रभाव सामने आएंगे।

नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 में इस बार एक ऐसा चेहरा सामने आया है, जिसने छात्र राजनीति में प्रतिनिधित्व और समान अवसर को लेकर नई बहस छेड़ दी है. कैंपस लॉ सेंटर के छात्र पंकज ढींगरा चुनावी मैदान में सक्रिय रूप से प्रचार कर रहे हैं और वे DUSU के चुनावी इतिहास में पहले नेत्रहीन उम्मीदवार बनने की दिशा में हैं.

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नेत्रहीन छात्र पंकज ढींगरा का चुनावी अभियान इस बात पर जोर दे रहा है कि नेतृत्व किसी शारीरिक क्षमता तक सीमित नहीं होना चाहिए. वे छात्रों के बीच जाकर संवाद कर रहे हैं और अपने मुद्दों को सामने रख रहे हैं. उनके चुनावी मैदान में उतरने को दिल्ली विश्वविद्यालय के दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए प्रतिनिधित्व और समान अवसर की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है.

दिव्यांग छात्रों के मुद्दे केंद्र में

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दिल्ली विश्वविद्यालय में दिव्यांग विद्यार्थियों को कैंपस सुविधाओं, शिक्षा, अवसर और छात्र राजनीति में भागीदारी से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. पंकज के चुनाव प्रचार ने इन मुद्दों को छात्र राजनीति के केंद्र में ला दिया है.

उनका कहना है कि किसी छात्र की शारीरिक क्षमता उसके नेतृत्व की क्षमता तय नहीं करती. उनका चुनाव अभियान इसी विचार को आगे बढ़ाता दिखाई दे रहा है कि दिव्यांग छात्रों को केवल सुविधाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि निर्णय लेने और नेतृत्व करने की प्रक्रिया का हिस्सा भी बनाया जाना चाहिए.

ASAP की भूमिका भी चर्चा में

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DUSU चुनाव में आम आदमी पार्टी की छात्र विंग ASAP की भूमिका भी चर्चा में है. संगठन ऐसी छात्र राजनीति की बात करता रहा है, जिसमें आम छात्र केवल मतदान करने वाला नहीं, बल्कि निर्णय लेने और नेतृत्व करने वाला भी हो. पंकज ढींगरा का चुनावी अभियान इसी विचार को एक नया आयाम देता दिखाई दे रहा है.

छात्र राजनीति में शिक्षा, रोजगार, फीस, कैंपस सुविधाएं, छात्र अधिकार और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए बेहतर व्यवस्था जैसे मुद्दे भी इस बार चर्चा में हैं. पंकज की उम्मीदवारी इन सवालों को चुनावी बहस के केंद्र में लाने का प्रयास कर रही है.

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18 सितंबर को मतदान, 19 सितंबर को नतीजे

DUSU चुनाव 2026 के लिए 18 सितंबर को मतदान होगा, जबकि 19 सितंबर को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे. चुनावी नतीजों से पहले ही पंकज ढींगरा का अभियान चर्चा में आ गया है.

उनकी उम्मीदवारी ने छात्र राजनीति के सामने कई सवाल भी खड़े किए हैं—क्या दिव्यांग छात्रों को नेतृत्व में बराबर अवसर मिलेगा? क्या छात्र राजनीति में नए चेहरों और नई सोच के लिए पर्याप्त जगह बनेगी? और क्या कैंपस के चुनाव वास्तविक छात्र मुद्दों पर केंद्रित होंगे?

पंकज ढींगरा की चुनावी मौजूदगी इन सवालों को मजबूती से सामने ला रही है. उनका अभियान इस संदेश के साथ आगे बढ़ रहा है कि नेतृत्व शारीरिक क्षमता का नहीं, बल्कि सोच, साहस और छात्रों के लिए खड़े होने की क्षमता का नाम है.

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