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टकसाल सिनेमा गोलीकांड: बुलेरो में आए हमलावरों ने धनंजय सिंह पर चलाई थीं ताबड़तोड़ गोलियां

टकसाल सिनेमाहॉल गोलीकांड फिर से चर्चा में आ गया है. वाराणसी के MP/MLA कोर्ट का फैसला आया है. धनंजय सिंह को बड़ा झटका लगा है. 15 अप्रैल को विधायक अभय सिंह और मिर्जापुर के एमएलसी विनीत सिंह समेत सभी 6 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया.

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कोर्ट का फैसला धनंजय सिंह के लिए बड़ा झटका है. (फाइल फोटो- पीटीआई)

लखनऊ यूनिवर्सिटी के दो लड़के कभी जिगरी दोस्त थे, लेकिन समय के साथ एक-दूसरे के जानी दुश्मन कहे जाने लगे. पहले हैं उत्तर प्रदेश की जौनपुर सीट से पूर्व सांसद धनंजय सिंह. और दूसरे हैं अयोध्या की गोसाईगंज सीट से वर्तमान विधायक अभय सिंह. इनकी अदावत के कई किस्से मशहूर हैं. इन्हीं में से एक है टकसाल सिनेमाहॉल का गोलीकांड.

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किस्सा है साल 2002 के अक्टूबर महीने की 4 तारीख का. धनंजय सिंह अपनी सफारी से वाराणसी से जौनपुर जा रहे थे. अभी वाराणसी पार नहीं किया था. कैट के टकसाल सिनेमाहॉल पहुंचे ही थे कि तभी एक बुलेरो आकर रुकी, और करीब आधा दर्जन लोग गाड़ी से उतरे. धनंजय सिंह पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं. आरोप लगा अभय सिंह पर.

पूरी कहानी आगे सुनाएंगे, अभी बात कोर्ट के उस फैसले की, जिस वजह से टकसाल सिनेमाहॉल गोलीकांड फिर से चर्चा में आ गया है. वाराणसी के MP/MLA कोर्ट का फैसला आया है. धनंजय सिंह को बड़ा झटका लगा है. 15 अप्रैल को विधायक अभय सिंह और मिर्जापुर के एमएलसी विनीत सिंह समेत सभी 6 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया. इससे पहले 13 अप्रैल को विशेष न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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बरी होने के बाद अभय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने कहा, "धनजंय घोषित अपराधी हैं. उन्होंने राजनीतिक कुंठा में मुझे फंसाया. उनके अपराधों की लंबी लिस्ट है. वो कानून पर विश्वास नहीं करते. इन्होंने इटावा में सिपाही की हत्या की. आज सीबीआई जांच हो जाए, तो मुल्जिम हो जाएं."

कोर्ट से बरी हुए MLC विनीत सिंह का भी बयान आया. उन्होंने कहा, "मुझे न्यायालय पर पूर्ण विश्वास था. न्याय की जीत हुई है. मेरा नाम गलत तरीके से डाला गया था. शुरू से अभी तक कोई साक्ष्य ही नहीं था. इसलिए मुझे कोर्ट से न्याय मिला है."

धनंजय सिंह के राजनीतिनिक सफर की शुरुआत स्टूडेंट पॉलिटिक्स से हुई. 27 की उम्र में जौनपुर की रारी विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते भी. 2007 में JDU के टिकट पर विधानसभा पहुंचे. 2009 लोकसभा चुनाव में बसपा से टिकट मिला. जौनपुर से जीत हासिल की. लेकिन 2011 में मायावती ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते निकाल दिया. फिर 2014 में लोकसभा और 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं मिली.

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वहीं अभय सिंह की भी राजनीतिक पारी स्टूडेंट पॉलिटिक्स से शुरू हुई. 2012 में सपा के टिकट पर पहली बार गोसाईगंज विधानसभा सीट से जीते. उसके बाद 2022 में फिर से सपा के टिकट पर उसी विधानसभा सीट से दोबारा विधायक बने. लेकिन इन्हें भी 2025 में पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया. फिलहाल गोसाईगंज से तो विधायक हैं, लेकिन किसी पार्टी से नहीं जुड़े हैं. हालांकि भाजपा से नजदीकियों को लेकर चर्चा में बने रहते हैं.

टकसाल सिनेमाहॉल कांड

हम यहां तक आपको बता ही चुके हैं कि बुलेरो से कुछ लोग निकले और सफारी में बैठे धनंजय सिंह पर गोलियां दागनी शुरू कर दीं. इस हमले में धनंजय सिंह, उनके गनर, ड्राइवर समेत कई लोग घायल हुए. हमलावर घटना को अंजाम देने के बाद तुरंत मौके से फरार हो गए. घायलों को तुरंत मलदहिया के सिंह मेडिकल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. धनंजय के मुताबिक, अभय सिंह और उनके चार-पांच साथियों ने इस हमले को अंजाम दिया था. इसमें मिर्जापुर से अभी के एमएलसी विनीत सिंह भी शामिल थे.

धनंजय ने वाराणसी के नदेसर थाने में अभय सिंह, विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह के खिलाफ केस दर्ज करवा दिया. पुलिस ने फ़ौरन इस मामले में संदीप सिंह, संजय सिंह, विनोद सिंह और सतेंद्र सिंह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया. मामले की सुनवाई हुई और 29 अगस्त, 2025 को अपर जिला जज सुशील खरवार ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में सभी आरोपियों को बरी कर दिया. और अब वाराणसी की एमपी/एमलए कोर्ट ने फायरिंग के मामले में भी सभी आरोपियों को बरी कर दिया है.

वीडियो: धनंजय सिंह को मिली जमानत, चुनाव लड़ने पर भी आया कोर्ट का फैसला

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