अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में CJI सूर्यकांत ने एक अहम टिप्पणी की है. उन्होंने साफ़ कहा कि इस मामले का ‘राजनीतिकरण’ नहीं होना चाहिए. CJI ने ज़ोर देकर कहा कि अदालत के सामने सिर्फ़ ये सवाल है कि अगर कोई अपराध हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित की जाए.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी- 'इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करें'
Ayodhya Ram Mandir row: राम मंदिर चंदा चोरी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ़ कहा है कि इस केस को एक ऐसे मामले की तरह देखना चाहिए जिसमें अपराध हुआ है और उसकी सही जांच होनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि इसे 'राजनीतिक रूप' देने की जरूरत नहीं है.


बार & बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक़, चीफ़ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच उन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें राम मंदिर निर्माण के लिए मिले डोनेशन में कथित गबन की CBI जांच की मांग की गई है. सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा,
‘बस एक सावधानी… इस मुद्दे का राजनीतिकरण मत कीजिए. अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं. ये सिर्फ़ एक अपराध होने (कमिशन ऑफ क्राइम) का मामला है. हमारा काम सिर्फ़ ये सुनिश्चित करना है कि जांच सही तरीक़े से हो.’
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से पूछा कि फिलहाल जांच कौन कर रहा है? इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि पहले एक स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई थी. SIT ने सिर्फ़ ये पाया कि मामला संज्ञेय अपराध का बनता है. जिसके बाद अब पुलिस जांच कर रही है. तो इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या जांच खुद SIT को भी सौंपी जा सकती है? CJI सूर्यकांत ने कहा,
‘हम तीन-चार दिन बाद इस मामले पर फिर से सुनवाई करेंगे और जांच के पहलू पर विचार करेंगे. SIT में वरिष्ठ अधिकारी थे. इंस्ट्रक्शंस लेकर आइए कि क्या जांच के लिए SIT बनाई जा सकती है.’
जिस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने हामी भरी. कहा कि वो इसे गठित करेंगे और रिकॉर्ड पर रखेंगे.
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याचिकाकर्ता की मांगसुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने कहा कि उनकी मांग सिर्फ़ जवाबदेही की है. उन्होंने अदालत से कहा,
‘जब मंदिर बन रहा था, तब सभी लोगों से दान मांगा गया था. अब हमारी मांग है कि उन सभी रसीदों को सुरक्षित रखा जाए और उन्हें अपलोड किया जाए.’
कोर्ट ने इस पर कहा कि इस पहलू पर भी विचार किया जाएगा. वहीं दूसरी ओर, दूसरे वकीलों ने FIR अपलोड करने, डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जांच में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की. इस पर SG तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया कि सभी रिकॉर्ड सुरक्षित हैं.
इस मामले में अलग-अलग याचिकाओं में CBI जांच, कोर्ट की निगरानी में जांच, दान के रजिस्टर्स, बहीखाते, बैंक रिकॉर्ड, UPI लॉग्स, CCTV फुटेज, ई-मेल्स, सर्वर्स और दूसरे फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स सुरक्षित रखने की मांग की गई है. फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई के लिए तय कर दी है.
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