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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 2020 में ही मिल गए थे गड़बड़ी के सबूत, अब तक मिला 3500 करोड़ दान

Ram Mandir Donation: राम मंदिर को मिले दान विवाद में कुछ हैरान करनेवाले खुलासे हो रहे हैं. 2020 में ही मंदिर में मिले चढ़ावे, आभूषण और दान में गड़बड़ी के संकेत मिल गए थे. इसके बावजूद ट्रस्ट ने इस पर ध्यान नहीं दिया.

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24 जून 2026 (पब्लिश्ड: 02:43 PM IST)
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राम मंदिर के लिए 2020 में एक प्राइवेट फर्म से ऑडिट कराया गया था. (PTI)
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अयोध्या में श्री राम मंदिर को मिले दान के मामले में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कथित लापरवाही सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2020 में ही राम मंदिर को मिले चढ़ावे में गड़बड़ी के संकेत मिल गए थे. ट्रस्ट बनने के कुछ ही महीनों बाद एक प्राइवेट ऑडिट फर्म ने अपनी रिपोर्ट में ट्रस्ट की कमियों को उजागर किया था. फंड्स मैनेजमेंट में गैर-पेशेवर रवैये की बात की थी. बताया था कि चंदे का सही रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा है. फर्म ने इन्हें ठीक करने के लिए कुछ तरीके भी बताए थे. 

दावा है कि इसके बावजूद ट्रस्ट ने राम मंदिर के सिस्टम में कोई सुधार नहीं किया. अब, राम मंदिर को मिले डोनेशन में बड़े पैमाने पर चोरी का इल्जाम लगा है. कथित चंदा चोरी मामले में ट्रस्ट और डोनेशन की गिनती से जुड़े लोग जांच के घेरे में आ गए. इंडियन एक्सप्रेस के पत्रकार श्यामलाल यादव की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्राइवेट ऑडिट फर्म ने ट्रस्ट को नवंबर 2020 में राम मंदिर का मैनेजमेंट चलाने से जुड़ी एक रिपोर्ट सौंपी थी. ऑडिट फर्म ने जिम्मेदारी और जवाबदेही तय करने के लिए "लेन-देन, डेटा मैनेजमेंट, स्टाफ और दूसरे रिसोर्स के हर लेवल पर भरोसेमंद SOP (सिस्टेमैटिक ऑपरेटिंग प्रोसेस) बनाने की जरूरत" का सुझाव दिया था.

3500 करोड़ का कैश चंदा, दान में गहने

सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर, 2019 के अपने आदेश में अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया था. मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की देखरेख के लिए 5 फरवरी, 2020 को 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट का गठन किया गया. तब से अब तक लगभग 3,500 करोड़ रुपये के कैश डोनेशन के अलावा दान में गहने भी मिले हैं. राम मंदिर को मिले कुछ दान और गहनों का रिकॉर्ड ना होने को लेकर ही अब आरोप लग रहे हैं.

ऑडिट रिपोर्ट में SOP का दिया था सुझाव 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्राइवेट फर्म के 2020 की रिपोर्ट जमा होने के 6 साल बाद भी उसके बताए तरीके पर कोई काम नहीं हुआ. राम मंदिर के बेहतर मैनेजमेंट के लिए ऑडिट रिपोर्ट में बताई गई 'सिस्टेमैटिक ऑपरेटिंग प्रोसेस' (SOP) बनाने पर कोई अमल नहीं हुआ. नतीजा, राम मंदिर समिति अब चढ़ावे में चोरी के आरोपों का सामना कर रही है.

ऑडिट फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा,

"कामकाजी लेवल पर मैनेजमेंट का ढांचा तय नहीं है और यह तरीका बहुत ही गैर-पेशेवर है... फाइनेंशियल रिपोर्टिंग के लिए (डोनेशन का) कोई सिस्टेमैटिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है... लेन-देन और डेटा एंट्री के किसी भी स्टेज पर कोई दूसरी या तीसरी बार चेकिंग नहीं होती है... एक स्ट्रक्चर्ड ऑर्गेनाइजशन ढांचे में जवाबदेही तय करने की जरूरत है. डेटा की सटीकता और बेहतर मैनेजमेंट के लिए लेन-देन से जुड़े वर्कफ्लो के बीच तालमेल होना बहुत जरूरी है."

2020 में ही ऑडिट फर्म ने डोनेशन में मिली ज्वेलरी के खराब हिसाब-किताब पर चिंता जता दी थी. फर्म ने कहा था कि ऐसी लेन-देन के लिए तो एक बिल्कुल सटीक स्टॉक रजिस्टर बनाया जाना चाहिए. फर्म ने सवाल उठाया था कि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कई हजार कर्मचारियों को काम पर रखा है, लेकिन एक ढंग का ह्यूमन रिसोर्स (HR) डिपार्टमेंट नहीं है.

ऑडिट फर्म ने "समय-समय पर बैंक मिलान (Bank Reconciliation), अकाउंटिंग डेटा एंट्री और MIS (मैनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम) के लिए काबिल स्टाफ की जरूरत" का भी जिक्र किया था.

Ram Mandir Prathistha
श्री राम मंदिर. (PTI)

डेटा मैनेजमेंट के बारे में रिपोर्ट में कहा गया था कि ट्रस्ट से जुड़ी IT मैनेजमेंट कंपनी का सेंसेटिव डेटा मैनेजमेंट सर्विस, सर्वर, डेटा सिक्योरिटी और डेटा चोरी के रिस्क को कंफर्म करने वाला कोई रिकॉर्ड नहीं मिला. IT सर्विस प्रोवाइडर की डेटा एंट्री और डेटाबेस को वेरिफाई, मॉनिटर और जांचने के लिए कोई इंटरनल कंट्रोल सिस्टम नहीं है. इन्फॉर्मेशन और रिपोर्ट की सिक्योरिटी और ईमानदारी बनाए रखने के लिए ट्रस्ट के पास अपना कोई इंटरनल सिस्टम भी नहीं है.

श्यामलाल यादव की रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर ट्रस्ट के सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि नवंबर 2020 में ट्रस्ट के एक टॉप अधिकारी ने उस प्राइवेट ऑडिट फर्म से ट्रस्ट के अंदरूनी ऑडिट और रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम पर सलाह देने के लिए कहा था.

ऑडिट फर्म ने गड़बड़ी के लिए आगाह किया था

इसके बाद ऑडिट फर्म ने अपना काम शुरू किया. मंदिर के सिस्टम और डेटा मैनेजमेंट को जांचा. कई गड़बड़ियों को पता लगाया. ऐसी खामियों के बारे में आगाह किया, जो उस समय के ढर्रे पर ही चलते रहने से सामने आ सकती थीं. सारे मामले ठीक करने के लिए फर्म ने ट्रस्ट को तरीके भी बताए थे.

खबर के मुताबिक, फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि सभी लेवल पर ऑर्गनाइज्ड कल्चर और प्रोसेस बनाए जाएं, जिनका सभी एग्जीक्यूटिव पालन करेंगे. फर्म ने साथ में चेतावनी दी थी कि अनप्रोफशनल यानी गैर-पेशेवर स्टाफ और डेटा मैनेजमेंट की वजह से सिस्टम में शामिल लोगों के बीच गलत जानकारी फैल सकती है. इससे साथी स्टाफ और मैनेजमेंट के गुमराह होने का खतरा बढ़ सकता है.

यह भी पढ़ें: CAG राम मंदिर के दान का ऑडिट कर सकता है? नियम-कानून क्या कहते हैं?

ट्रस्ट से जुड़े एक सोर्स ने कहा कि अगर प्राइवेट ऑडिट फर्म की बताई बातों पर ध्यान दिया गया होता और उन पर अमल किया गया होता, तो अब हो रही फजीहत से बचा जा सकता था. ऐसा हुआ होता तो हालिया कैश डोनेशन और ज्वेलरी का रिकॉर्ड नहीं होने के आरोप नहीं लगते.

अखिलेश ने चंदा चोरी का आरोप लगाया था

7 जून को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर के डोनेशन में कथित हेराफेरी का खुलासा किया था.

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अखिलेश यादव का पोस्ट. (X)
 

मामले ने तूल पकड़ा तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन कर दिया. मंगलवार, 23 जून को SIT ने शुरुआती जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है.

वीडियो: राम मंदिर में चंदा चोरी मामले पर बोले सीएम योगी- '15 दिन में सब साफ हो जाएगा'

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