राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद भक्तों की आस्था को जो धक्का लगा है, उसने देश के सारे मंदिरों को सतर्क कर दिया है. ताजा मामला मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर का है, जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि भक्तों की ओर से चढ़ाए गए दान का एक-एक पैसा पहले दान पात्र में जाना चाहिए. इसके बाद उसे सीधे मंदिर के आधिकारिक खजाने में जमा किया जाए.
बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे के पैसे का क्या हो रहा? सुप्रीम कोर्ट को सख्त चेतावनी देनी पड़ी
सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर में चढ़ावे की रकम को लेकर सख्ती दिखाई है और भक्तों के दान का एक-एक पैसा सीधे दानपात्र में डालने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने वित्तीय गड़बड़ी रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था लागू करने और मंदिर के धन से जमीन खरीदने के किसी भी प्रस्ताव को पहले कोर्ट के सामने रखने को कहा है.

शीर्ष अदालत ने आगे ये भी कहा कि अगर मंदिर से जुड़ा कोई भी सेवायत इसमें बाधा पैदा करता है तो ‘इस कृत्य को बहुत गंभीरता से’ लिया जाएगा. कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन समिति को भी आदेश दिया है कि दान व्यवस्था में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था लागू करे.
भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने मंगलवार, 25 अगस्त को इस मामले पर सुनवाई की. इंडिया टुडे से जुड़े संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, पीठ के सामने सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी. इस स्टेटस रिपोर्ट में बांके बिहारी मंदिर के भंडारियों (अनाज आदि भंडार की देखरेख करने वाले) और सेवायतों पर आरोप लगाया गया कि वे भक्तों को अपना चढ़ावा और भगवान को चढ़ाने के लिए दिए गए पैसे को मंदिर के गुल्लकों यानी दान पात्रों में डालने से रोकते हैं. वो सारी रकम खुद अपने पास रख लेते हैं.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि बांके बिहारी मंदिर में कोई भी भक्त जो भी दान चढ़ाता है, उसका ‘एक-एक पैसा’ दानपात्र यानी गुल्लक (Donation Boxes) में जाना चाहिए. इतना ही नहीं, यहां जमा हर चढ़ावा या फिर ऑनलाइन माध्यम से भेजी गई दान की रकम सीधे मंदिर के आधिकारिक खजाने या बैंक खाते में ही जानी चाहिए.
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अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मंदिर से जुड़ा सेवायत या कोई अन्य व्यक्ति इस काम में बाधा खड़ी करता है तो इस काम को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा. कोर्ट ने मंदिर की प्रबंध समिति को किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी को रोकने के लिए एक पारदर्शी व्यवस्था लागू करने का आदेश भी दिया. कोर्ट ने आगे ये भी कहा कि मंदिर के पैसे का उपयोग करके कोई भी संपत्ति या जमीन खरीदने के किसी भी प्रस्ताव पर अमल करने से पहले उसे कोर्ट के सामने लाया जाना अनिवार्य होगा.
बता दें कि सेवायतों की ओर से कोर्ट में पैरवी कर रहीं वकील तन्वी दुबे ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से मंदिर की व्यवस्थाओं के प्रबंधन के लिए बनाई गई हाईपावर्ड कमिटी पर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि हाई पावर कमेटी ने साल भर में 40 करोड़ रुपये खर्च कर दिए लेकिन मंदिर के हालात जस के तस हैं. उल्टा श्रद्धालुओं की दिक्कत और ज्यादा बढ़ गई है. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि मंदिर के धन का उपयोग करके जमीन खरीदी गई है.
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