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पुलिस ने 'पाकिस्तानी' बता परिवार को भारत-पाक सीमा पर छोड़ा, सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया

पहलगाम हमले के बाद श्रीनगर के एक परिवार को निर्वासन का नोटिस दिया गया है. परिवार ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज किया है. कहा है कि उनके पास वैध भारतीय पासपोर्ट है. कोर्ट ने इसकी जांच के आदेश अधिकारियों को दिए हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनगर के परिवार के निर्वासन पर अस्थायी रोक लगा दी है. (प्रतीकात्मक तस्वीर- पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir News) के एक परिवार को पाकिस्तान डिपोर्ट किए जाने पर अस्थायी रोक लगा दी है. कोर्ट ने कहा है कि जब तक इस परिवार के भारतीय होने या नहीं होने की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक इन्हें देश से नहीं निकाला जाए. पहलगाम हमले (Pahalgam Attack) के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कूटनीतिक कदम उठाते हुए भारत में रह रहे पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए थे. इसके बाद से कुछ विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अन्य सभी पाकिस्तानी नागरिकों को वापस पाकिस्तान भेजा जा रहा है.

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इन्हीं में से एक हैं श्रीनगर के रहने वाले तारिक बट. उन्हें परिवार के साथ भारत छोड़ने का नोटिस (Deportation Notice) जारी हुआ. कहा गया कि पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द कर दिया गया है. ऐसे में उन्हें भी भारत छोड़कर पाकिस्तान जाना होगा. इतना ही नहीं, उनके माता-पिता और भाई-बहन को पुलिस ने गिरफ्तार कर भारत-पाकिस्तान की सीमा पर छोड़ दिया. तारिक बट का कहना है कि उनके पास भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड भी है, फिर भी उन्हें पाकिस्तान भेजा जा रहा है. उन्होंने नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. अब कोर्ट ने इस पर आदेश जारी किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने तारिक बट के मामले की सुनवाई की. 2 मई को उन्होंने आदेश दिया कि अधिकारी तारिक बट और उनके परिवार के दस्तावेजों की ठीक से जांच करें. यह पुष्टि करें कि 6 सदस्यीय परिवार वैध भारतीय पासपोर्ट और आधार कार्ड वाले भारतीय नागरिक हैं या नहीं. कोर्ट ने अधिकारियों से कहा कि इस संबंध में जल्द से जल्द फैसला लिया जाए. 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि, कोर्ट ने एक्शन लेने के लिए अधिकारियों को कोई डेडलाइन नहीं दी है, लेकिन ये जरूर कहा है कि जब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया जाता, याचिकाकर्ता के परिवार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकती. 

इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने असंतुष्ट होने पर याचिकाकर्ता को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट में अपील करने का अधिकार भी दिया है. कोर्ट ने कहा कि हालांकि, इस मामले को मिसाल के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.   

1997 में श्रीनगर आया था परिवार

याचिकाकर्ता अहमद तारिक बट ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में दावा किया कि वह 1997 में अपने परिवार के साथ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मीरपुर से श्रीनगर आए थे. वह एक भारतीय नागरिक हैं, जिनके पास वैध पासपोर्ट और आधार कार्ड है. उनके परिवार में उनके पिता, माता, बड़ी बहन और दो छोटे भाई हैं. बट ने कहा कि साल 1997 तक उनका परिवार मीरपुर में रहता था. इसके बाद उनके पिता जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर चले आए. 

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वह और उनका परिवार 2000 में श्रीनगर आया. उनके भाई-बहनों की पढ़ाई श्रीनगर के ही एक प्राइवेट स्कूल में हुई. बट ने कहा कि गृह मंत्रालय ने इस साल 25 अप्रैल को एक आदेश पारित किया, जिसमें पाकिस्तानी नागरिकों को भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद विदेशी पंजीकरण कार्यालय (FRO) श्रीनगर की ओर से उन्हें और उनके परिवार को एक नोटिस जारी किया गया. 

नोटिस में कहा गया था कि बट और उनके परिवार ने 1997 में भारत में एंट्री की थी. वीजा समाप्त होने पर उन्हें भारत छोड़ना था क्योंकि वे पाकिस्तानी नागरिक हैं. इसी नोटिस को तारिक बट ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता, बहन और भाई को जम्मू-कश्मीर की पुलिस ने 29 अप्रैल की रात 9 बजे ‘अवैध’ तरीके से उठा लिया. 30 अप्रैल की दोपहर करीब 12.20 बजे उन्हें भारत-पाकिस्तान की सीमा पर ले जाया गया. बट का आरोप है कि उनके परिवार को भारत छोड़ने के लिए ‘मजबूर’ किया जा रहा है.

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