The Lallantop

अंतरात्मा की आवाज पर वंदे मातरम न गाने वालों को सजा नहीं मिलनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court ने वंदे मातरम के सभी 6 पद गाने के विवाद पर अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा, 'धार्मिक मान्यता या अंतरात्मा की आवाज पर वंदे मातरम नहीं गाने वालों पर आपराधिक केस नहीं चलाया जाना चाहिए.'

Advertisement
post-main-image
सिंगर TM कृष्णा ने 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. (Courtesy- ITG)

Quick AI HighlightsClick here to view more

  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वंदे मातरम न गाने पर आपराधिक केस नहीं चलना चाहिए, और सरकार को संशोधित धारा-3 के खिलाफ याचिका पर दो हफ्ते में जवाब देना होगा।
  • इस याचिका का कारण PINH की धारा-3 में संशोधन है जिसमें वंदे मातरम के सभी 6 पद गाने को अनिवार्य किया गया है, जिसके खिलाफ सिंगर टीएम कृष्णा ने याचिका दायर की।
  • सुनवाई के बाद कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है और यह मामला मौलिक अधिकारों व धर्मनिरपेक्षता से संबंधित सवालों की वजह से आगे बढ़ेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि अगर कोई शख्स धार्मिक मान्यता या अंतरात्मा की आवाज पर वंदे मातरम नहीं गाता है, तो ऐसे में आपराधिक केस नहीं चलना चाहिए. ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971’ (PINH) की ‘धारा- 3’ में हुए संशोधन के खिलाफ कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. सर्वोच्च अदालत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से 2 हफ्ते में जवाब भी मांगा है. हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वंदे मातरम के सभी 6 पद गाए जाएं या सिर्फ 2 पद, यह तय करना सरकार का काम है.

Advertisement
टीएम कृष्णा की याचिका पर सुनवाई

दरअसल, इसी साल (2026) में PINH की ‘धारा-3’ में संशोधन किया गया है. इसके तहत, सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के सभी 6 पद गाना अनिवार्य किया गया है. अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रगीत के दौरान जानबूझकर व्यवधान डालता है या इसे बाधित करता है, तो इसे अपराध माना जाएगा. ऐसा करने पर 3 साल तक की सजा भी दी जा सकती है. इसी संशोधन के खिलाफ कर्नाटक के सिंगर टीएम कृष्णा ने याचिका दायर की है.

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच कर रही थी. Bar And Bench की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार से 2 हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने केस की सुनवाई में साल 1986 के ‘बिजो इमैनुएल बनाम केरल राज्य’ के फैसले का भी जिक्र किया. इस फैसले के तहत, कोर्ट ने कुछ स्कूली बच्चों को सुरक्षा दी थी. इन बच्चों ने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर सम्मानपूर्वक राष्ट्रगान को गाने से मना कर दिया था.

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा,

‘अंतरात्मा की आवाज पर वंदे मातरम की कुछ पंक्तिया या सभी लाइन नहीं गाने वालों पर आपराधिक केस नहीं चलाया जाना चाहिए.’

कोर्ट ने आगे कहा,  

Advertisement

‘हम उम्मीद करते हैं कि देश का कानून इस एक्ट वाले केस पर भी ‘बिजो इमैनुएल केस’ की तरह लागू हो. बिजो इमैनुएल केस में बने कानून पर अब तक कोई सवाल नहीं उठाया गया है.’

हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र 

सिंगर कृष्णा की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि केंद्र सरकार के निर्देश ‘प्रोटोकॉल तय करने के दायरे' से आगे बढ़ गए हैं.’ हालिया संशोधन के बाद अब नागरिकों के लिए आखिरी चार लाइनें गाना अनिवार्य होगा. सिंगर की याचिका में कहा गया कि ‘वंदे मातरम’ की कुछ पंक्तियों में हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र है.

यह भी पढ़ें: 'हिंदू कट्टरपंथी देश के लिए खतरा', हामिद अंसारी की इस स्पीच पर योगी का रिएक्शन आया

याचिका में यह भी तर्क दिया गया किं सरकार नागरिकों को ऐसे प्रतीक के प्रति सहमति जताने के लिए मजबूर कर रही है, जिसकी चार लाइनों में भक्ति के साथ, देवी-देवताओं को याद किया जाता है. यह धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना के खिलाफ भी है. सिंगर की याचिका में संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (1) (भेदभाव से सुरक्षा), 19 (1) (A) (बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी), 21 (जीवन और व्यक्तिगत आजादी) और 25 (1) (अंतरात्मा और धर्म की स्वतंत्रता) के तहत मिले मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का हवाला दिया गया है.

वीडियो: मीराबाई चानू ने जीता पहला एशियन गेम्स मेडल, जीता सिल्वर

Advertisement