सुप्रीम कोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान कहा है कि वोटर लिस्ट में नाम हटाए जाने से किसी की नागरिकता नहीं चली जाती है. कोर्ट ने साफ किया कि इसके लिए एक अलग प्रक्रिया होती है. पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी एक याचिका की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की है.
SIR पर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश, 'वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने से नागरिकता खत्म नहीं होती'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी नागरिक का नाम वोटर लिस्ट में नहीं है तो इससे उनकी नागरिकता नहीं चली जाती है. इसके लिए एक अलग प्रक्रिया होती है. पश्चिम बंगाल में SIR से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ये टिप्पणी की है.


आजतक के मुताबिक, सर्वोच्च न्यायलय ने कहा कि नागरिकता तय करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार नहीं है. चुनाव आयोग का अधिकार केवल वोटर लिस्ट के नियंत्रण और पर्यवेक्षण तक ही सीमित है. बताया गया कि ये याचिका प्रसेनजीत बोस ने दायर की थी. वे पश्चिम बंगाल में SIR समिति के अध्यक्ष हैं. कोर्ट ने कहा कि मतदाता सूची में नाम न होने से नागरिकता ख़त्म नहीं होती.
याचिका में क्या बताया?इस याचिका में बताया गया कि 34 लाख याचिकाओं में से केवल 38,000 याचिकाओं की सुनवाई ट्रिब्यूनल कोर्ट में हुई है. प्रसेनजीत की तरफ से वकील गणेश शंकरनारायणन कोर्ट में पेश हुए थे. उन्होंने कहा कि याचिका में मांग की गई है कि इन याचिकाओं की जल्द सुनवाई के आदेश दिए जाएं. साथ ही ये भी कहा कि डेटा और प्रोसेस को सार्वजानिक किया जाए जिससे लोगों के सामने निष्पक्षता बनी रहे.
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कोर्ट ने क्या कहा?जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि 27 मई की जजमेंट में साफ कहा गया है कि SIR डेटा का इस्तेमाल चुनाव आयोग नागरिकता तय करने के लिए नहीं कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को बिहार में SIR से जुड़ी याचिका पर फैसला सुनाया था. कोर्ट ने कहा था कि SIR डेटा का इस्तेमाल केवल चुनावी प्रक्रिया के लिए होना चाहिए और किसी अन्य लाभकारी स्कीम को लागू करने के लिए इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 25 अगस्त तय की है.
वीडियो: TMC की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?











