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समलैंगिक विवाह पर पुनर्विचार याचिका खारिज, SC ने पिछले फैसले में दखल ना देने की वजह भी बताई

Supreme Court ने Same-Sex Marriage पर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ ये याचिका बीते साल दायर की गई थी. इस पर फैसला अब सुनाया गया है.

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कोर्ट ने खारिज की समलैंगिक विवाह पर पुनर्विचार की याचिका (तस्वीर: इंडिया टुडे)

समलैंगिक विवाह (Same-Sex Marriage) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक पुनर्विचार याचिका दायर की गई, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोर्ट ने अक्टूबर 2023 में समलैंगिक जोड़ों के विवाह को असंवैधानिक बताया था. सुप्रीम कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ ये याचिका बीते साल दायर की गई थी. इस पर फैसला अब सुनाया गया है.

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बार एंड बेंच में छपी रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार, 9 जनवरी के दिन पांच जजों की बेंच ने बताया कि उन्हें अक्टूबर 2023 के फैसले में कोई "स्पष्ट त्रुटि" नहीं दिखी. इसलिए इस फैसले पर पुनर्विचार करने की जरूरत नहीं है. इस बेंच में जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस दीपांकर दत्ता शामिल थे.

कोर्ट ने बताया कि उसने जस्टिस एस. रवींद्र भट (तत्कालीन जज) और जस्टिस हीमा कोहली (तत्कालीन जज) और जस्टिस पीएस नरसिम्हा (जो अब भी हमारे साथ हैं) के बहुमत वाले फैसले और अलग विचारों को ध्यान से पढ़ा है. 

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कोर्ट ने कहा,

“हमें इनमें किसी भी प्रकार की त्रुटि नजर नहीं आई है. हमने पाया कि इन दोनों फैसलों में व्यक्त किए गए विचार कानून के मुताबिक ठीक हैं, इसलिए इनमें किसी प्रकार के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है.”

अक्टूबर 2023 के फैसले में क्या हुआ था?

बार एंड बेंच के मुताबिक 17 अक्टूबर, 2023 के दिन बेंच ने 3-2 के बहुमत से समलैंगिक विवाह को मान्यता देने से इनकार कर दिया था. पांच जजों की इस बेंच की अध्यक्षता चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ कर रहे थे, वे खुद इस फैसले से असहमत थे. इस बेंच में उनके अलावा जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिस एस. रवींद्र भट, जस्टिस हीमा कोहली और जस्टिस पीएस नरसिम्हा शामिल थे.

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जस्टिस रवींद्र भट, हीमा कोहली और पीएस नरसिम्हा का कहना था कि समलैंगिक जोड़ों को सिविल यूनियन या विवाह का कानूनी तौर पर अधिकार नहीं है. साथ ही इन्हें बच्चों को गोद लेने का अधिकार भी नहीं दिया जा सकता.

ये भी पढ़ें -सेम सेक्स मैरिज पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर पुनर्विचार याचिका में कहा क्या गया है?

वहीं चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजय किशन कौल का अलग सोचना था. उनका मानना था कि समलैंगिक जोड़ों को सिविल यूनियन में अपने संबंधों को मान्यता देने का अधिकार है. इन्हें इसके साथ जुड़ी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई 2024 में जस्टिस संजीव खन्ना ने खुद को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था. जो कि अब देश के चीफ जस्टिस (CJI) हैं. जस्टिस पीएस नरसिम्हा अकेले ऐसे जज हैं, जो अक्टूबर 2023 के फैसले देने वाली मूल बेंच में भी शामिल थे. बाकी जज (CJI डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस एसके कौल, जस्टिस रवींद्र भट, और जस्टिस हीमा कोहली) अब रिटायर हो चुके हैं. 

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