अमेरिकी मिड टर्म इलेक्शन में डॉनल्ड ट्रंप की आखिरी चाल भी काम नहीं आई. वोटिंग से एक दिन पहले ट्रंप ने ऐलान किया था कि अगले साल से वो इजरायल को मिलिट्री मदद देना बंद कर देंगे. अमेरिकी चुनाव में ये काफी अहम मुद्दा था, जिसके बारे में ट्रंप को भी शायद पता चल गया था कि नुकसान होने वाला है. तभी 3 नवंबर को उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि इजरायल को मदद की जरूरत नहीं है, इसलिए अमेरिका इस साल के अंत तक उसे मिलिट्री सहायता देना बंद कर देगा.
'इजरायल को सैन्य मदद नहीं देंगे', ट्रंप का आखिरी पैंतरा भी फेल, लोगों ने अब्दुल को जिता दिया
अमेरिकी मिड टर्म चुनाव से ठीक पहले डॉनल्ड ट्रंप ने इजरायल को सैन्य मदद बंद करने का ऐलान किया था. इसे इजरायल को दी जाने वाली अमेरिकी सहायता के विरोधी डेमोक्रेट उम्मीदवार अब्दुल अल सैयद के मुद्दे की काट के तौर पर देखा गया.

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ एक समझौता किया है. इसके तहत 2026 के अंत तक इजरायल को हर साल मिलने वाली करीब 4 अरब डॉलर की अमेरिकी मदद बंद कर दी जाएगी. ट्रंप का कहना है कि इजरायल को अब अमेरिका से मिलने वाली इस आर्थिक और सैन्य मदद की जरूरत नहीं है.
ट्रंप ने आगे ये भी कहा कि अगर इजरायल को इसकी जरूरत नहीं तो हम अब्दुल अल-सैयद जैसे ‘सनकी’ (Lunatics) लोगों के हमले क्यों झेलें? ट्रंप का इशारा विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट कैंडिडेट अब्दुल अल सैयद की ओर था, जिन्होंने इसे चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाया था. वह इजरायल को दी जा रही अमेरिकी मदद के कट्टर आलोचक थे. पेशे से डॉक्टर अल सैयद ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि उन्हें ये ठीक नहीं लगता कि अमेरिका विदेशी सेनाओं को फंडिंग करे. वहीं, ट्रंप ने इसके जवाब में कहा था कि मिड टर्म इलेक्शन में इस मुद्दे पर बेवजह विवाद हो रहा है.
अब लगता है शायद चुनाव से ऐन पहले उन्हें इस मुद्दे की गहराई समझ आ गई थी. तभी उन्होंने 'बेस्ट फ्रेंड' नेतन्याहू की नाराजगी मोल लेते हुए कह दिया कि इस साल के अंत तक इजरायल को सैन्य मदद नहीं देंगे. लेकिन इसका फायदा उन्हें नहीं मिला. उल्टा अमेरिकी नागरिकों ने अब्दुल सैयद को पहला मुस्लिम सीनेटर बना दिया, जिन्हें ट्रंप ने 'जिहादी' कहा था.
पैक्ट के तहत इजरायल को मददअमेरिका एक पैक्ट के तहत इजरायल को हर साल करीब 4 अरब डॉलर की सैन्य मदद देता है. ये समझौता 2028 में खत्म होने वाला है. लेकिन इससे पहले ही ट्रंप ने चुनाव को देखते हुए ऐलान कर दिया कि ये मदद इस साल के अंत से खत्म हो सकती है. हालांकि ये अभी साफ नहीं है कि क्या प्रेसिडेंट ट्रंप अपने स्तर पर इस सैन्य मदद को पूरी तरह से रोक सकते हैं या नहीं. इस फंड को मंजूरी अमेरिकी संसद से मिलती है. हां, ट्रंप हथियारों की सप्लाई रोकने या टालने का अधिकार रखते हैं. लेकिन सांसदों से मंजूर फंडिंग को रोकने पर उनके अधिकारों की स्थिति साफ नहीं है.
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खैर, चुनाव से ठीक पहले ट्रंप का ये पैंतरा भी काम नहीं आया. मिड टर्म इलेक्शन में डेमोक्रेट्स ने US कांग्रेस के दोनों सदनों पर कंट्रोल जीत लिया है. पार्टी ने टेक्सास, साउथ कैरोलिना, ओहियो और कैंसस जैसे पारंपरिक रूप से कंजर्वेटिव माने जाने वाले राज्यों में रिपब्लिकन के कब्जे वाली कई सीटें जीत ली हैं. यहां तक की अब्दुल अल सैयद भी जीत की ओर हैं, जिन्हें ट्रंप ने ‘सनकी’ और ‘आतंकवादियों का साथ देने वाला’ बताया था.
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