महीने का बिजली बिल आते ही सबसे पहले नजर आखिरी रकम पर जाती है. इस बार 1,000 रुपये है, अगले महीने 1,500 रुपये और गर्मियों में अचानक 2,500 रुपये. फिर घर में चर्चा शुरू होती है कि आखिर बिजली इतनी बढ़ कैसे गई. लेकिन असली सवाल ये है कि आपके घर में कौन सा उपकरण कितनी बिजली खा रहा है और उसकी वजह से बिल में कितने रुपये जुड़ रहे हैं.
आपके घर में रोज कितनी बिजली बर्बाद हो रही है? एक महीने का बिल खुद निकालिए
घर में AC, फ्रिज, गीजर, पंखा और वॉशिंग मशीन कितनी बिजली खाते हैं? जानिए 1 यूनिट बिजली का मतलब, हर उपकरण की मासिक खपत निकालने का आसान फॉर्मूला, 5 स्टार रेटिंग का मतलब, स्टैंडबाय पावर की सच्चाई और बिजली का बिल कम करने के आसान तरीके.

बिजली की खपत समझने के लिए बहुत मुश्किल गणित की जरूरत नहीं है. बस तीन चीजें जाननी हैं. उपकरण कितने वॉट का है, रोज कितने घंटे चलता है और महीने में कितने दिन चलता है. इसके बाद आप मोटे तौर पर खुद पता लगा सकते हैं कि घर की बिजली कहां जा रही है.
पहले समझिए 1 यूनिट बिजली होती कितनी है
बिजली के बिल में जिस यूनिट की बात होती है, वो किलोवॉट-घंटा यानी किलोवॉट आवर (kWh) है. आसान भाषा में समझिए, 1,000 वॉट का कोई उपकरण एक घंटे चले तो करीब 1 यूनिट बिजली खर्च होगी. इसी तरह 100 वॉट का उपकरण 10 घंटे चले तो करीब 1 यूनिट खपत होगी.
किसी उपकरण की मासिक खपत निकालने का आसान फॉर्मूला है-
मासिक यूनिट = उपकरण के वॉट ÷ 1000 × रोजाना इस्तेमाल के घंटे × महीने के दिन
मान लीजिए 100 वॉट का पंखा रोज 10 घंटे चलता है. तो 100 ÷ 1000 × 10 × 30 = 30 यूनिट. अगर आपके इलाके में प्रभावी बिजली लागत 7 रुपये प्रति यूनिट मान लें, तो सिर्फ उस पंखे की ऊर्जा लागत करीब 210 रुपये बैठेगी. असली बिल इससे अलग हो सकता है, क्योंकि उसमें स्लैब, फिक्स्ड चार्ज, टैक्स और दूसरे शुल्क शामिल हो सकते हैं.
AC क्यों बन जाता है सबसे बड़ा खिलाड़ी?
घर में बिजली की खपत की बात हो तो एयर कंडीशनर (AC) को नजरअंदाज करना मुश्किल है. इसकी वजह सिर्फ ज्यादा वॉट नहीं, बल्कि लंबे समय तक चलना भी है.
मसलन किसी AC की औसत विद्युत खपत 1.2 किलोवॉट मान लें और वो रोज 8 घंटे चले. 30 दिन में अनुमानित खपत होगी 1.2 × 8 × 30 यानी करीब 288 यूनिट. अगर इसी दौरान कमरे का तापमान बहुत कम रखा जाए, दरवाजे बार बार खुलें, फिल्टर गंदा हो या कमरा ठीक से बंद न हो, तो वास्तविक खपत बढ़ सकती है.
BEE के मुताबिक AC की ऊर्जा दक्षता को समझने में आईएसईईआर (ISEER) महत्वपूर्ण है. AC के स्टार लेबल पर सालाना बिजली खपत जैसी जानकारी भी दी जाती है. इसलिए केवल ये देखना काफी नहीं कि AC कितने टन का है. खरीदते समय उसके ऊर्जा लेबल पर दी गई खपत और दक्षता भी देखनी चाहिए.
BEE के एक पुराने ऊर्जा दक्षता गाइड में 1.5 टन AC के उदाहरण के आधार पर 5 स्टार और 1 स्टार मॉडल के बीच सालाना ऊर्जा बचत का अनुमान 200 से 700 किलोवॉट-घंटे तक बताया गया था. वास्तविक बचत मॉडल और उपयोग के तरीके पर निर्भर करेगी.
फ्रिज चुपचाप चलता है, इसलिए नजर से बच जाता है
AC की तरह फ्रिज आम तौर पर कई घंटे लगातार चलता हुआ महसूस नहीं होता. लेकिन फ्रिज 24 घंटे बिजली से जुड़ा रहता है. इसलिए इसकी सालाना ऊर्जा खपत देखना ज्यादा उपयोगी है.
BEE के फ्रिज मानकों में ऊर्जा खपत को किलोवॉट-घंटे प्रति वर्ष के रूप में दर्ज किया जाता है. यानी फ्रिज खरीदते समय उसके ऊर्जा लेबल पर दी गई सालाना खपत को देखना आपके लिए ज्यादा उपयोगी आंकड़ा है. अलग क्षमता और तकनीक वाले फ्रिज की खपत अलग होगी.
इसलिए 5 स्टार का मतलब ये नहीं कि फ्रिज बिजली बिल्कुल नहीं खाएगा. मतलब सिर्फ इतना है कि समान श्रेणी में उसकी ऊर्जा दक्षता बेहतर होनी चाहिए.
गीजर कुछ मिनट में बिल बढ़ा सकता है
गीजर का मामला थोड़ा अलग है. पानी गर्म करने में काफी ऊर्जा लगती है, इसलिए ज्यादा क्षमता वाले गीजर को लंबे समय तक चालू रखना महंगा पड़ सकता है.
मान लीजिए 2,000 वॉट का गीजर रोज 1 घंटे चलता है. 30 दिन में उसकी सैद्धांतिक खपत 2 × 1 × 30 यानी 60 यूनिट होगी. अगर इसका इस्तेमाल रोज सिर्फ आधे घंटे हो, तो यही आंकड़ा करीब 30 यूनिट रह जाएगा.
इसलिए गीजर को जरूरत से काफी पहले चालू करके लंबे समय तक गर्म रखने की आदत बिजली की खपत बढ़ा सकती है. इलेक्ट्रिक गीजर भी BEE के अनिवार्य स्टार लेबल वाले उपकरणों में शामिल है.
पंखा सस्ता लगता है, लेकिन संख्या ज्यादा हो तो हिसाब बदलता है
एक सामान्य पंखे की खपत AC के मुकाबले बहुत कम हो सकती है. लेकिन घर में चार या पांच पंखे हों और सभी रोज 10 से 12 घंटे चलें, तो कुल खपत जुड़ती जाती है.
BEE के अनुसार सीलिंग फैन की स्टार रेटिंग सिर्फ बिजली की खपत पर नहीं, बल्कि उसकी सर्विस वैल्यू यानी बिजली की खपत के मुकाबले मिलने वाली हवा पर आधारित होती है. इसलिए पंखे पर भी स्टार रेटिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
वॉशिंग मशीन और बाकी उपकरणों का असली खेल
वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव, टीवी, कंप्यूटर और दूसरे उपकरणों की खपत का हिसाब भी इसी फॉर्मूले से निकाला जा सकता है. यहां सबसे बड़ा फर्क इस्तेमाल के समय से पड़ता है.
मसलन कोई 500 वॉट का उपकरण रोज सिर्फ 30 मिनट चलता है तो उसकी 30 दिन की सैद्धांतिक खपत 7.5 यूनिट होगी. वहीं 500 वॉट का उपकरण रोज 4 घंटे चले तो यही खपत 60 यूनिट हो जाएगी.
यानी सिर्फ वॉट देखकर फैसला करना अधूरा है. वॉट × समय ही असली कहानी है.
स्टैंडबाय बिजली भी होती है, लेकिन हर उपकरण समान नहीं
टीवी, सेट-टॉप बॉक्स, चार्जर, कंप्यूटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बंद दिखने के बावजूद कुछ परिस्थितियों में बिजली ले सकते हैं. इसे स्टैंडबाय खपत कहा जाता है. BEE के अलग अलग उपकरण मानकों में स्टैंडबाय बिजली की माप और सीमाओं का प्रावधान मौजूद है.
इसका मतलब ये नहीं कि हर चार्जर को सॉकेट में लगा छोड़ने से ही आपका बिल हजारों रुपये बढ़ जाएगा. लेकिन घर में दर्जनों उपकरण लगातार जुड़े हों तो अनावश्यक खपत को कम करना समझदारी है.
5 स्टार का मतलब क्या है?
BEE की स्टार रेटिंग 1 से 5 तक होती है और ज्यादा स्टार आम तौर पर ज्यादा ऊर्जा दक्षता को दर्शाते हैं. लेकिन अलग अलग उपकरणों के लिए स्टार रेटिंग तय करने का तरीका अलग हो सकता है. उदाहरण के लिए फ्रिज में सालाना ऊर्जा खपत और AC में आईएसईईआर जैसे मानक इस्तेमाल होते हैं.
इसलिए सिर्फ स्टार देखकर उपकरण न खरीदें. उसी श्रेणी के मॉडल का सालाना ऊर्जा खपत आंकड़ा और कीमत दोनों देखें.
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1,000 रुपये का बिल 700 रुपये कैसे हो सकता है?
इसका कोई जादुई फॉर्मूला नहीं है. सबसे पहले अपने पिछले बिल की यूनिट खपत लिखिए. फिर घर के सबसे ज्यादा चलने वाले पांच उपकरण चुनिए. AC, गीजर, फ्रिज, पंखे और वॉशिंग मशीन से शुरुआत कर सकते हैं.
अब हर उपकरण का वॉटेज नोट कीजिए और ऊपर वाला फॉर्मूला लगाइए. जिस उपकरण की अनुमानित खपत सबसे ज्यादा निकलती है, सबसे पहले उसी के इस्तेमाल का तरीका बदलिए.
AC का तापमान बहुत कम रखने के बजाय संतुलित सेटिंग रखें, कमरे के दरवाजे और खिड़कियां ठीक से बंद रखें, फिल्टर साफ रखें. गीजर को जरूरत से ज्यादा देर न चलाएं. पुराने और कम दक्ष उपकरण बदलने से पहले उनके वास्तविक इस्तेमाल और नए उपकरण की ऊर्जा बचत का हिसाब लगाएं.
और सबसे जरूरी बात, बिजली बचाने का मतलब सिर्फ उपकरण बंद करना नहीं है. सही क्षमता का उपकरण खरीदना, उसकी दक्षता देखना और जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल करना ज्यादा असरदार तरीका है.
आखिर में अपने घर की बिजली का हिसाब किसी कंपनी के विज्ञापन से नहीं, अपने मीटर से मिलाइए. उपकरण का वॉटेज और इस्तेमाल का समय लिखिए, यूनिट निकालिए और फिर बिल से तुलना कीजिए. कुछ ही दिनों में साफ दिखने लगेगा कि घर में बिजली कहां खर्च हो रही है और कहां बेवजह जा रही है.
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