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'पटाखों पर बैन मजाक बनकर रह गया', दिल्ली सरकार को SC की फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा- 'पिछले साल ग्रीन पटाखों की छूट के दौरान नियमों का पालन कराने के लिए क्या कार्रवाई की गई? उसकी रिपोर्ट कोर्ट में पेश कीजिए.' अदालत ने कहा कि आदेश जारी करने का फायदा नहीं, जब तक उन्हें जमीन पर लागू न किया जाए.

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(COURTSEY- ITG)

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  • सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को दिल्ली सरकार और एयर क्वालिटी मैनेजमेंट को पटाखों की बिक्री और उपयोग पर पाबंदियों के सही पालन न करने पर फटकार लगाई।
  • पटाखों पर पाबंदियां लगाने में नाकामी और त्योहारों के दौरान प्रदूषण की समस्या को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने ग्रीन पटाखों की सीमित बिक्री की संभावित अनुमति पर संकेत दिए हैं।
  • कोर्ट ने अधिकारियों को पटाखों के जिम्मेदार उपयोग और नियमों के कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है, साथ ही इस मुद्दे पर अगले आदेश के लिए रिपोर्ट मांगी है।

दीपावली आते ही हर साल पटाखों को लेकर बहस शुरू हो जाती है. ये साल यानी 2026 भी इससे अछूता नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दिल्ली सरकार और 'कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' (CAQM) को फटकार लगाई है. कोर्ट ने कहा कि पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर लगी पाबंदियों को ठीक से लागू नहीं किया गया है. हालांकि, कोर्ट ने फिर दोहराया कि त्योहारों के दौरान प्रदूषण की समस्या का हल पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना नहीं है. 

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सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस दिवाली पर दिल्ली-NCR में कुछ तय दिनों के लिए 'ग्रीन पटाखों' की बिक्री और उन्हें जलाने की अनुमति दी जा सकती है. हालांकि इस नई अंतरिम व्यवस्था पर कोर्ट ने अपना आदेश अभी सुरक्षित रखा है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अक्टूबर 2025 में त्योहार के लिए दी गई तीन दिन की छूट केवल एक बार के लिए थी, जिसे अपने आप आगे नहीं बढ़ाया जा सकता. 

'जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करें'

हिंदुस्तान टाइम्स (HT) की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस पी बी वराले की बेंच ने दिवाली मनाने से जुड़ी लोगों की भावनाओं का जिक्र किया. लेकिन यह भी कहा कि त्योहार के उत्साह का इस्तेमाल, पटाखों पर लगी पाबंदियों को लागू करने में हो रही नाकामी को छिपाने के लिए नहीं किया जा सकता. बेंच ने कहा,

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‘हम लोगों की भावनाओं को समझते हैं. लोग त्योहार मनाना चाहते हैं. इसलिए, हम पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि इसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं. लेकिन साथ ही, हमें इस मामले में कोई बहुत सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर न करें.’

कोर्ट ने कहा कि वह अधिकारियों से यह नहीं कह रहा कि वे लोगों को दिवाली मनाने से रोकें. बल्कि यह सुनिश्चित करें कि पटाखों का इस्तेमाल जिम्मेदारी से और केवल तय समय-सीमा के भीतर ही हो. भले ही इसके लिए उन्हें खुद अपने त्योहार का जश्न छोड़कर नियमों का पालन सुनिश्चित करना पड़े, चालान काटने पड़ें, लाइसेंस रद्द करने पड़ें या नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करनी पड़े.

कोर्ट ने कहा,

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‘त्योहारों के दौरान लोगों में काफी उत्साह होता है. वे आम लोग हैं. हम उनके खिलाफ केस दर्ज नहीं कर सकते. लेकिन आप यह तो सुनिश्चित कर सकते हैं कि हमारे आदेशों का पालन हो. लोगों की सोच बदलने में समय लगेगा. हमारे समाज में अलग-अलग तरह के लोग हैं, बच्चे, महिलाएं आदि. हमें सबका ध्यान रखना है. हम हर साल आदेश जारी करते हैं, लेकिन यह बस एक कागजी कार्रवाई बनकर रह जाता है.’

'बीते साल की पूरी रिपोर्ट दो'

सुनवाई के दौरान सर्दियों के प्रदूषण की एक पुरानी समस्या सामने आई. दरअसल लगाई गई पाबंदियां और जमीनी स्तर पर या बाजारों में उनके लागू होने के बीच का अंतर काफी अधिक मिला. बेंच ने पिछले आदेशों के तहत की गई जांच, जब्ती और अन्य कार्रवाइयों का ब्यौरा मांगा. बेंच ने टिप्पणी की,

‘पिछले साल हमारे आदेश के बाद, आपने असल में क्या किया? इन आदेशों को पारित करने और शर्तें तय करने का कोई फायदा नहीं है, जब तक कि आप जमीनी स्तर पर इन्हें लागू न करें. यह एक मजाक बनकर रह जाता है.’

(यह भी पढ़ें: दिल्ली-NCR में पटाखे जलाने की मंजूर मिलने वाली है! सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए हैं)

पूरी तरह बैन पर क्या कहा?

30 सितंबर को कोर्ट ने कुछ खास ग्रीन पटाखों को कुछ सुरक्षा शर्तों के साथ इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी. वहीं, बेरियम वाले पटाखों के मामले को आगे की वैज्ञानिक जांच के लिए खुला छोड़ दिया था. उस समय बेंच ने कहा था कि पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने से लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं. जबकि बिना किसी रोक-टोक के दिन भर पटाखे फोड़ने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ेगा.

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