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CJI सूर्यकांत ने अब किसे बताया 'पैरासाइट'?

CJI Surya Kant Parasites Cyber fruad: सुप्रीम कोर्ट ने साइबर फ्रॉड के आरोपी की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि साइबर अपराधी 'परजीवी' हैं. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने ये टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि समाज का हित तभी है, जब ये लोग (साइबर अपराधी) जेल में हों.

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CJI सूर्यकांत ने एक साइबर अपराधी को 'परजीवी' कहा. (फोटो- इंडिया टुडे)

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  • चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत ने साइबर अपराधियों को 'पैरासाइट' कहते हुए एक आरोपी की याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दी और कहा कि ऐसे अपराधियों को सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
  • सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका मिली आरोपों और राज्य दर राज्य अपराध करने के तरीकों के खिलाफ बढ़ती साइबर फ्रॉड की घटनाओं के कारण हुई, जिससे आरोपी जांच से बचते हैं।
  • अदालत ने आरोपी की याचिका खारिज करते हुए हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया और साइबर फ्रॉड की जांच को लेकर सीबीआई को देशव्यापी नेतृत्व देने का आदेश दिया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने फिर किसी को 'पैरासाइट' कहा है. इस बार इस शब्द का इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए किया गया है. साइबर फ्रॉड के एक आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका डाली थी. 17 जून को इस पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए CJI सूर्यकांत ने कहा,

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“आप लोग परजीवी (parasites) हैं... आप लोग निवेशकों से पैसे लेते हैं और उन्हें धोखा देते हैं. हमें आपके लिए बहुत सख्त होना होगा. समाज की भलाई तभी है जब आप जेल के अंदर हों, बाहर नहीं. ऐसे अपराध हमेशा पूरे देश में फैले होते हैं. गुजरात में किसी से पैसे लिए, फिर मुंबई में, और इसी तरह आगे बढ़ते गए.”

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, मनोज कुमार सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में ये याचिका दायर की थी. उन पर बिहार, तमिलनाडु और जम्मू-कश्मीर में साइबर फ्रॉड के कई मामले चल रहे हैं. इस साल की शुरुआत में जम्मू पुलिस और तमिलनाडु की तिरुपुर पुलिस ने उनके खिलाफ धोखाधड़ी के आरोप में मामले दर्ज किए थे.

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CJI सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने साइबर फ्रॉड के आरोपियों के काम करने के तरीके पर ध्यान दिया. कहा कि वे अक्सर एक राज्य में अपराध करते हैं और फिर पकड़े जाने और गिरफ्तारी से बचने के लिए दूसरी जगह चले जाते हैं. चीफ जस्टिस ने कहा,

"आप लोग ऐसे अपराधी हैं जिनके शिकार पूरे देश में फैले हुए हैं. आप तमिलनाडु में किसी के साथ धोखाधड़ी करते हैं और फिर जम्मू चले जाते हैं."

इसके बाद कोर्ट को आरोपी की याचिका पर सुनवाई का कोई आधार नहीं मिला और इसे खारिज कर दिया. अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत पाने के लिए हाई कोर्ट जाने का निर्देश दिया.

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बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल अक्टूबर में चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम के बढ़ते खतरे पर स्वतः संज्ञान लिया. ये कार्यवाही हरियाणा के अंबाला की एक 73 वर्षीय महिला की शिकायत पर शुरू हुई. महिला का आरोप था कि स्कैमर्स ने सुप्रीम कोर्ट के नकली आदेशों का इस्तेमाल करके उसे तथाकथित 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा और एक करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली की.

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दिसंबर 2025 में CJI सूर्यकांत ने CBI को 'डिजिटल अरेस्ट स्कैम' की पूरे देश में जांच का नेतृत्व करने का निर्देश दिया. साथ ही हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु और उत्तराखंड को जांच को लेकर सहमति और सहयोग देने को कहा था. 

कर्नाटक में सबसे ज्यादा साइबर अपराध

इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 2025 के आखिर तक भारतीयों को डिजिटल धोखाधड़ी में 3 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है. नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के ताजा आंकड़े कहते हैं कि 2021 और 2023 के बीच साइबर अपराध के मामलों में लगभग 63 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. ये मामले 86 हजार से ज्यादा हो गए. साइबर अपराध के सबसे ज्यादा मामले कर्नाटक में दर्ज किए गए, इसके बाद तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र का नंबर आता है.

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