दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में बुलडोजर एक्शन के दौरान पुलिस पर पथराव किया गया. 6-7 दिसंबर की दरमियानी रात फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बड़ा तनाव देखने को मिला. म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों पर अवैध निर्माण हटाने के लिए बुलडोजर चलाने पहुंची थी. MCD ने पहले अतिक्रमण हटाने के लिए समय दिया था, लेकिन कार्रवाई शुरू होते ही स्थानीय लोगों में भारी विरोध देखा गया. पुलिस ने स्थिति को कंट्रोल में करने के लिए आंसू गैस के गोले भी दागे.
तुर्कमान गेट में बुलडोजर एक्शन के बाद तनाव, मस्जिद के पास पथराव, पुलिस और स्थानीय लोग आमने-सामने
Turkman Gate bulldozer action: दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए. स्थानीय लोगों के विरोध के बीच पुलिस पर पथराव हुआ, जवाब में आंसू गैस छोड़ी गई. पुलिस ने भारी बल तैनात कर स्थिति को नियंत्रण में बताया.


MCD अधिकारियों के अनुसार, ये कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद की गई, इंडिया टुडे से जुड़े आनंद सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद के आसपास लगे अतिक्रमण को हटाने के लिए 17 बुलडोजर तैनात किए गए थे. ये अभियान रामलीला मैदान के नजदीक मस्जिद और कब्रिस्तान से जुड़ी जमीन पर चल रहा है. मंगलवार, 6 दिसंबर को ही दिल्ली हाईकोर्ट ने मस्जिद सैयद इलाही की प्रबंध समिति की याचिका पर नोटिस जारी किया था. इस याचिका में एमसीडी के अतिक्रमण हटाने के फैसले को चुनौती दी गई है.
इसके बावजूद, बुधवार, 7 जनवरी की सुबह यह डिमॉलिशन ड्राइव शुरू कर दी गई. स्थानीय लोग इस कार्रवाई का कड़ा विरोध कर रहे थे. विरोध के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भारी बल तैनात किया है. पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त फोर्स लगाई गई है ताकि हालात बेकाबू न हों.
मस्जिद फैज-ए-इलाही के आसपास की कई जगहों पर अतिक्रमण किया गया था. जिसमें सड़क का हिस्सा, फुटपाथ, सामुदायिक हॉल, पार्किंग क्षेत्र और एक डायग्नोस्टिक सेंटर भी शामिल था. सेंट्रल रेंज के संयुक्त पुलिस आयुक्त मधुर वर्मा ने बताया कि MCD ने मस्जिद फैज-ए-इलाही के आसपास के इन अतिक्रमणों को हटाने का अभियान चलाया. अभियान के दौरान कुछ उग्र लोगों ने पथराव करके व्यवधान डालने की कोशिश की. वर्मा ने कहा,
“स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया. न्यूनतम और संयमित बल प्रयोग किया गया, जिससे कोई बड़ी घटना हुए बिना सामान्य स्थिति बहाल हो गई.”

उन्होंने आगे बताया कि इस डेमोलिशन ड्राइव को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए पूरी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. पूरे इलाके को 9 जोनं में बांटा गया था. हर जोन की जिम्मेदारी एक अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त को सौंपी गई थी और सभी संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था.
MCD का ये फैसला दिल्ली हाईकोर्ट की एक डिविजन बेंच के 12 नवंबर 2025 के आदेश के अनुसार लिया गया था. इस आदेश में हाईकोर्ट ने एमसीडी और लोक निर्माण विभाग (PWD) को तुर्कमान गेट के पास रामलीला मैदान में 38,940 वर्ग फुट के अतिक्रमण को हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया था. ये आदेश सेव इंडिया फाउंडेशन नामक संगठन की याचिका पर पारित किया गया था, जिसकी ओर से कोर्ट में वकील उमेश चंद्र शर्मा ने पैरवी की थी.
तुर्कमान गेट मामले का इतिहास1976 में इंदिरा गांधी की सरकार के समय उनके बेटे संजय गांधी ने दिल्ली को सुंदर बनाने और स्लम-मुक्त करने के नाम पर बड़े पैमाने पर झुग्गी-झोपड़ियां हटाने का अभियान चलाया था. अप्रैल 1976 में संजय गांधी ने पुरानी दिल्ली का दौरा किया और तुर्कमान गेट इलाके को लेकर नाराजगी जताई. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के वाइस चेयरमैन जगमोहन के नेतृत्व में 13 अप्रैल 1976 से बुलडोजर चलाए गए.
स्थानीय मुस्लिम बहुल आबादी ने इस कदम का विरोध किया. विरोध के दौरान जबरन नसबंदी (forced sterilization) अभियान भी चला, जिससे गुस्सा और भड़का. 18-19 अप्रैल 1976 को पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई, जिसमें दर्जनों लोग मारे गए (आधिकारिक रूप से 6, लेकिन अनौपचारिक आंकड़े 150 से ज्यादा तक बताए जाते हैं). हजारों बेघर हुए, और इलाका तबाह हो गया. शाह आयोग ने बाद में इसे आपातकाल की ज्यादतियों का हिस्सा माना और संजय गांधी को जिम्मेदार ठहराया. ये घटना आज भी बुलडोजर कार्रवाई की तुलना में याद की जाती है, जहां कानूनी प्रक्रिया की बजाय जबरदस्ती का इस्तेमाल हुआ था.
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