अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ जो युद्ध छेड़ा, उसने रूस की 'मौज' कर दी है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को काफी हद तक बंद कर दिया है. इससे कच्चे तेल के दाम उछल गए हैं. कहा जा रहा है कि रूस ने इस मौके का भरपूर फायदा उठाया है.
ईरान युद्ध से रूस का फायदा ही फायदा, ट्रंप ने कुल्हाड़ी पर पैर दे मारा
अमेरिका द्वारा दी गई छूट की वजह से समुद्र में रुके रूसी तेल टैंकरों को आगे बढ़ने और तेल बेचने का मौका मिल रहा है. छूट के बाद रूसी तेल की खरीद अचानक बढ़ गई है. इससे रूसी कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए हैं.


ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट बताती है कि कच्चे की तेल की कीमतों में तेजी का फायदा उठाने के लिए रूस ने अपने टैंकरों में कच्चे तेल को तेजी से लोड करना शुरू कर दिया. अमेरिका ने रूसी तेल को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों पर फिलहाल छूट दी हुई है. अगर होर्मुज के रास्ते से मिडिल ईस्ट के कच्चे तेल का आना पूरी तरह से शुरू नहीं होता है तो अमेरिका मजबूरन रूसी तेल पर लगाए अपने प्रतिबंधों में और ढील दे सकता है.
जाहिर है रूस इसकी उम्मीद भी कर रहा होगा. ईरान युद्ध के खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. लेकिन इसने रूस की लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था में जान फूंक दी है. हालांकि, यूरोपीय नेताओं ने रूस के यूक्रेन के शहरों पर बमबारी जारी रखने के बावजूद प्रतिबंधों से पीछे हटने के लिए अमेरिका की कड़ी आलोचना की है.
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रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका द्वारा दी गई छूट की वजह से समुद्र में रुके रूसी तेल टैंकरों को आगे बढ़ने और तेल बेचने का मौका मिल रहा है. छूट के बाद रूसी तेल की खरीद अचानक बढ़ गई है. इससे रूसी कच्चे तेल के दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए हैं. भारत की रिफाइनरी कंपनियों पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिलते ही कई तेल के जहाज, जो पहले स्ट्रेट ऑफ मलक्का की ओर जा रहे थे, अब वापस भारत की तरफ मुड़ गए हैं. वहीं, जो जहाज लाल सागर (Red Sea) से निकल रहे हैं, वे अब भारत के पश्चिमी तट पर मौजूद रिफाइनरियों की ओर जा रहे हैं.
16 मार्च को ब्रेंट क्रूड लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट लगभग 93 डॉलर पर था. युद्ध शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है. पिछले दो हफ्तों में तेल के दाम 40% से अधिक उछले हैं.
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