सोनम वांगचुक अपना अनशन खत्म करने को राजी हैं, लेकिन एक शर्त के साथ. उन्होंने सरकार को एक लेटर लिखा है. इसमें सोनम वांगचुक ने साफ कहा है कि अगर सरकार उन्हें एक आश्वासन दे तो वे अनशन खत्म कर देंगे.
सोनम वांगचुक अनशन खत्म करने को राजी, बस ये शर्त रखी
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर अनशन पर बैठे Sonam Wangchuk अपनी Hunger Strike को खत्म कर सकते हैं. लेकिन इसके बदले उन्होंने एक शर्त रखी है. केंद्रीय मंत्रियों JP Nadda और Jitendra Singh ने वांगचुक से मुलाकात की थी, जिसके बाद उनकी ओर से यह बयान आया.

आश्वासन ये कि इस आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई लीगल ऐक्शन नहीं लिया जाएगा. सोनम वांगचुक ने लेटर में सरकार से वादा किया कि अगर उनकी ये शर्त मानी गई तो वे अपनी भूख हड़ताल खत्म कर देंगे. लेकिन अगर ऐसा नहीं होता तो उनका आंदोलन भूख हड़ताल के साथ जारी रहेगा.
सोनम वांगचुक अनशन तोड़ेंगे, लेकिन एक शर्त हैसोनम वांगचुक ने अपना ये लेटर एक्स पर शेयर किया है. इसमें वांगचुक की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय परमाणु ऊर्जा मंत्री जितेंद्र सिंह से हुई मुलाकात के बारे में बताया गया. पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया, ‘मेरा उपवास तोड़ने के संबंध में सरकार से अपील.’ वहीं लेटर में लिखा है,
‘आदरणीय नड्डा जी और जितेंद्र सिंह जी, कल रात अस्पताल में मुझसे मिलने और मेरा अनशन खत्म करने की आपकी ईमानदार अपील के लिए धन्यवाद. हमारी बातचीत के दौरान आपने मुझे भरोसा दिलाया कि सरकार इन बातों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी.’

वांगचुक ने आगे अपनी शर्तों को लेकर लिखा,
परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवार को उचित मुआवजा.
जवाबदेही तय करने के लिए संसद में सार्थक चर्चा, जिनमें माननीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर विचार करना शामिल है.
पुलिस की ओर से ज्यादती और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग के बावजूद ‘चलो संसद’ मार्च बहुत शांतिपूर्ण रहा. पूरे देश और दुनिया ने लोकतांत्रिक विरोध के प्रति उनके धैर्य और प्रतिबद्धता को देखा.
वांगचुक ने लिखा कि उन्हें पूरी उम्मीद है लोकतांत्रिक संस्थाओं में इस भरोसे को किसी भी कानूनी मामले, उत्पीड़न या इसमें शामिल लोगों के खिलाफ बदले की भावना से की गई कार्रवाई से कमजोर नहीं किया जाएगा.
लेटर में यह भी बताया कि अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों से करीब 65 सांसदों ने उन्हें लेटर लिखा. सोनम के मुताबिक, अन्य पार्टियों के सांसदों ने भी सोनम से उनका अनशन खत्म करने की अपील की है. उन्होंने बताया,
अन्य पार्टियों के सांसदों ने याद दिलाया कि मुझे अभी देश की सेवा में बहुत काम करना है. मैं उनसे सहमत हूं. मैं जीना चाहता हूं. मैं अपने छात्रों, शिक्षा और उस काम में लौटना चाहता हूं, जिसने मेरे जीवन को एक पहचान दी है. लेकिन मैं उन युवा लोगों की कीमत पर ऐसा नहीं कर सकता, जिनके लिए यह आंदोलन शुरू हुआ था.
वांगचुक ने सरकार से अपील करते हुए लिखा,
मैं सरकार से सम्मानपूर्वक यह स्पष्ट आश्वासन चाहता हूं कि इस आंदोलन में भाग लेने वाले किसी भी युवा प्रदर्शनकारी को कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा. क्योंकि, उनका एकमात्र ‘अपराध’ एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज उठाना रहा है.
लेटर में आगे लिखा कि अगर ऐसा आश्वासन दिया जाता है, तो वो (सोनम) इस भरोसे के साथ अपना अनशन खत्म कर देंगे कि सरकार ने न केवल उनकी अपील सुनी है. बल्कि, लाखों भारतीय युवाओं की आकांक्षाओं को भी सुना है. लेकिन ये भी कह दिया कि ऐसे आश्वासन के अभाव में वे अनिश्चित काल तक अपना अनशन जारी रखने के लिए मजबूर हो जाएंगे.
वीडियो: सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 25 दिन, दिपके ने कर दी अपील













