सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने सरकार पर वादा तोड़ने का आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ बैठक में तय हुआ था कि जब तक छात्र प्रतिनिधि और विपक्ष के नेता शामिल नहीं होते, तब तक अनशन खत्म होने की तस्वीरें जारी नहीं की जाएंगी. लेकिन बैठक खत्म होने के तुरंत बाद ही तस्वीरें पब्लिक कर दी गईं. वांगचुक का आरोप है कि ऐसा करके सरकार ने अपना वादा तोड़ा.
मैंने मना किया था तस्वीरें मत डालना लेकिन... सोनम वांगचुक का इस मंत्री ने भरोसा तोड़ा
Sonam Wangchuk का आरोप है कि सरकार ने वादा तोड़ा. बैठक में तय हुआ था कि विपक्ष और छात्र नेताओं के बिना अनशन खत्म होने की तस्वीरें जारी नहीं होंगी, लेकिन तुरंत तस्वीरें पब्लिक कर दी गईं. सोनम वांगचुक ने अब पूरी बात बताई है.

इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई के साथ एक खास इंटरव्यू में सोनम वांगचुक ने यह खुलाया किया. उन्होंने 23 और 24 जुलाई की उस दरमियानी रात के बारे में बताया, जब केंद्रीय मंत्री के हाथों से सूप पीकर उन्होंने अपना 26 दिनों का अनशन खत्म किया था. वांगचुक ने कहा,
“मंत्री अपने साथ फोटोग्राफर लाए थे. उन्होंने मुझसे वादा किया था कि वे तस्वीरें जारी नहीं करेंगे. उन्होंने अपना वादा तोड़ा.”
सोशल एक्टिविस्ट ने कहा कि इस पल को सिर्फ रूलिंग पार्टी से जुड़े कार्यक्रम के तौर पर नहीं दिखाया जाना चाहिए था. आगे कहा,
"मैंने उनसे कहा कि मैं चाहता हूं कि इसमें दूसरी राजनीतिक पार्टियों के सदस्य, उनके नेता और छात्र नेता भी शामिल हों. मैं चाहता था कि यह एक संयुक्त कार्यक्रम हो."
सोनम वांगचुक ने कहा कि चूंकि मंत्री आधी रात के बाद पहुंचे, इसलिए उन्होंने एक दूसरा इंतजाम सुझाया. उन्होंने कहा,
"मैंने कहा कि मैं अनशन तोड़ दूंगा, लेकिन खबर मेरी शर्तों पर जारी की जाएगी, जिसमें विपक्षी नेता और अगर हो सके तो स्टूडेंट लीडर्स की तस्वीरें भी होंगी ताकि लगे कि यह सब मिलकर किया गया है."
वांगचुक के मुताबिक, मंत्री इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए और मीटिंग के दौरान मौजूद इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के सीनियर अधिकारियों को इस समझौते का गवाह बनाया गया. उन्होंने दावा कि कुछ ही मिनटों में इस समझौते का उल्लंघन कर दिया गया. वांगचुक ने बताया कि पांच मिनट के भीतर आईबी का एक सीनियर अधिकारी हांफते हुए आया और बोला,
"सर, मुझे नहीं पता कैसे, लेकिन ये तस्वीरें पहले ही टेलीविजन चैनलों पर चल रही हैं."
वांगचुक ने कहा कि इस घटना ने राजनीतिक नेताओं पर से उनका भरोसा डिगा दिया है. उन्होंने कहा, "उन्होंने वादा तोड़ा. इसलिए मेरा इन सभी नेताओं से भरोसा उठ गया है."
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'पहले ही डील कर सकता था'सोशल एक्टिविस्ट ने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि उन्होंने अपना अनशन खत्म करने के लिए सरकार के साथ कोई ‘आधी रात की डील’ की थी. उन्होंने कहा,
"मैं वह डील बहुत पहले कर सकता था. मुझे 26 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठने की जरूरत नहीं थी. मैं इससे कहीं बड़ी डील कर सकता था. मैं यह भी कह सकता था कि मुझे शिक्षा मंत्री बना दो. अगर मुझे डील करनी होती, तो मेरे पास कई मौके थे."
सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे. उन्होंने 28 जून 2026 को अपनी भूख हड़ताल शुरू की थी. स्वास्थ्य बिगड़ने पर पुलिस ने उन्हें 18 जुलाई को जबरदस्ती दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था. बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट किया गया.
छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई का विरोध किया. उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम वांगचुक को उनकी मर्जी के खिलाफ वहां ले जाया गया था. सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद 24 जुलाई को उन्होंने अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया.
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