कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘चलो संसद’ मार्च से पहले ही सोनम वांगचुक का अनशन खत्म होने की आहट मिल गई है. खबर है कि सोनम वांगचुक ने अपनी 21 दिनों की भूख हड़ताल खत्म करने की पेशकश की है. उन्होंने शर्त रखी है कि कोई नेता उनसे मिलकर आश्वासन दे कि वो शिक्षा के क्षेत्र में जवाबदेही का मुद्दा संसद में उठाएंगे तो वो अपना अनशन खत्म कर देंगे. वांगचुक ने अपना ये प्रस्ताव पत्नी गीतांजलि आंगमो के जरिए भेजा है. हालांकि, उन्होंने अपनी शर्त में किसी विशेष नेता या मंत्री का नाम नहीं लिया है.
सोनम वांगचुक भूख हड़ताल खत्म करने पर मान गए? सिर्फ ये शर्त रखी है
सोनम वांगचुक ने 21 दिन की भूख हड़ताल खत्म करने की पेशकश करते हुए शर्त रखी है कि राजनीतिक दल शिक्षा में जवाबदेही का मुद्दा संसद में उठाने का भरोसा दें. यह प्रस्ताव सीजेपी के 'चलो संसद' मार्च और संसद के मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले आया है.


इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार, 19 जुलाई को गीतांजलि ने कहा कि अगर राजनीतिक दलों के नेता उनसे मिलें और सोमवार, 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र में शिक्षा से जुड़ा मुद्दा उठाने का वादा करें तो सोनम वांगचुक अपना अनशन खत्म कर दें. गीतांजलि ने कहा कि वांगचुक की भूख हड़ताल भारत के एजुकेशन सिस्टम में जवाबदेही तय करने के मकसद से था.
वांगचुक की ओर से ये ऐलान सीजेपी के संसद मार्च से ठीक एक दिन पहले आया है. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही सीजेपी ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च का ऐलान किया है. पार्टी का कहना है कि यह मार्च देश के एजुकेशन सिस्टम में सुधार और पेपर लीक के मामलों की न्यायिक जांच की मांग को लेकर किया जा रहा है. 'चलो संसद' मार्च सोमवार, 20 जुलाई को सुबह करीब 9 बजे जंतर-मंतर से शुरू होने वाला है. इसे लेकर रविवार, 19 जुलाई से ही जंतर-मंतर पर भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी.
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सीजेपी ने अपने समर्थकों को मार्च में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के लिए मिस्ड कॉल अभियान शुरू किया है. पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दावा किया कि इस पहल के माध्यम से 13 लाख से ज्यादा लोग पहले ही रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. हालांकि, दिल्ली पुलिस ने कहा है कि इस मार्च के लिए उनसे कोई परमिशन न मांगी गई थी और न ही दी गई है. पुलिस ने ये भी कहा कि जंतर-मंतर छोड़कर पूरी दिल्ली में धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू है. लोगों के जुटान पर रोक है.
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